भाई-बहन का रिश्ता जीवन के सबसे अनमोल रिश्तों में से एक माना जाता है। बचपन की यादों से लेकर जीवन के कठिन समय तक, भाई-बहन अक्सर एक-दूसरे का सहारा बनते हैं। लेकिन कई बार देखा जाता है कि इस रिश्ते में बार-बार तकरार, मनमुटाव या दूरी पैदा हो जाती है। वैदिक ज्योतिष के अनुसार, ऐसे संबंधों को समझने के लिए कुंडली के कुछ विशेष भावों और ग्रहों का अध्ययन किया जाता है। आइए जानते हैं भाई बहन में झगडा करने में कौन से ग्रह जिमीदार माने जा सकते हैं।
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भाई-बहन के बीच कौन-सा भाव देखा जाता है?
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भाई-बहन के बीच कौन-सा भाव देखा जाता है?
ज्योतिष में तीसरा भाव (तृतीय भाव) छोटे भाई-बहनों का प्रतिनिधित्व करता है, जबकि ग्यारहवां भाव बड़े भाई-बहनों से संबंधित माना जाता है। इन भावों की स्थिति, उनके स्वामी ग्रह और उन पर पड़ने वाली दृष्टियां भाई-बहन के संबंधों की गुणवत्ता को प्रभावित कर सकती हैं।
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कुंडली में मंगल ग्रह
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मंगल का प्रभाव
मंगल को साहस, ऊर्जा और प्रतिस्पर्धा का ग्रह माना जाता है। यदि मंगल तृतीय भाव में अशुभ स्थिति में हो या इस भाव को प्रभावित कर रहा हो, तो भाई-बहनों के बीच अहंकार, गुस्सा और टकराव की स्थिति बन सकती है। छोटी-छोटी बातों पर विवाद बढ़ने की संभावना रहती है।
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राहु से बढ़ सकती हैं गलतफहमियां
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राहु से बढ़ सकती हैं गलतफहमियां
राहु को भ्रम और असमंजस का ग्रह माना जाता है। जब राहु भाई-बहनों से जुड़े भावों या उनके स्वामी ग्रह को प्रभावित करता है, तो रिश्ते में अविश्वास, गलतफहमियां और अचानक विवाद उत्पन्न हो सकते हैं। कई बार बिना किसी बड़े कारण के भी तनाव बना रहता है।
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केतु ला सकता है दूरी
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केतु ला सकता है दूरी
केतु आध्यात्मिकता और विरक्ति का कारक ग्रह माना जाता है। इसका प्रभाव भाई-बहनों के बीच भावनात्मक दूरी, संवाद की कमी या अलगाव की भावना पैदा कर सकता है। ऐसे जातकों में आपसी प्रेम होने के बावजूद अभिव्यक्ति की कमी देखी जा सकती है।