Trigrahi Yoga in Pisces: ज्योतिष शास्त्र के अनुसार, जब तीन ग्रह एक ही राशि में एकत्र होते हैं, तो उसे त्रिग्रही योग कहा जाता है। यह योग अत्यंत प्रभावशाली होता है और जातक के जीवन में गहरे प्रभाव छोड़ता है। वर्ष 2025 में मीन राशि में शनि, शुक्र और बुध का दुर्लभ संगम हो रहा है, जिससे एक विशेष और अत्यंत शुभ त्रिग्रही योग का निर्माण हो रहा है। यह योग वर्षों में एक बार ही बनता है और इसका प्रभाव सभी राशियों पर विभिन्न रूपों में देखने को मिलता है।
Shani Dev Ki Priya Rashi: शनिदेव की विशेष कृपा से इन राशियों का भाग्य बदलता है, मिलता है अपार धन और प्रतिष्ठा
यह त्रिग्रही योग विशेष रूप से उन जातकों के लिए सौभाग्य लेकर आ रहा है, जिनकी कुंडली में ग्रहों की स्थिति अनुकूल है। इस योग के प्रभाव से व्यक्ति को आर्थिक उन्नति, करियर में सफलता, पारिवारिक सुख और आत्मविश्वास की वृद्धि का वरदान प्राप्त हो सकता है। साथ ही, यह योग आध्यात्मिक प्रगति के द्वार भी खोलता है। आइए जानते हैं, यह त्रिग्रही संयोग किन राशि के जातकों के जीवन में बदलाव की नई किरण बनकर उभरने वाला है।
Mangal Gochar 2025: मंगल ग्रह करेंगे सिंह राशि में प्रवेश, इन राशियों की चमकेगी किस्मत और सुख-सुविधाओं में होगा इजाफा
2 of 4
त्रिग्रही योग
- फोटो : अमर उजाला
वृषभ राशि
वृषभ राशि पर इस त्रिग्रही योग का प्रभाव पंचम और सप्तम भाव पर है। शनि नवम भाव में धैर्य, धर्म और दीर्घकालिक भाग्य का कारक बन रहा है। वहीं शुक्र जो स्वयं वृषभ के स्वामी हैं, शनि के साथ मिलकर अत्यंत शुभ फल प्रदान करते हैं। बुध की स्थिति चतुर्थ भाव से सप्तम दृष्टि डाल रही है जिससे वाणी में माधुर्य और पारिवारिक सुखों में वृद्धि होगी। इसके फलस्वरूप जातक को संतान पक्ष से शुभ समाचार प्राप्त हो सकते हैं। शिक्षा में रुचि रखने वालों के लिए यह काल उत्तम रहेगा। वैवाहिक जीवन में सौहार्द बढ़ेगा तथा जिनका विवाह रुका हुआ है, उन्हें विवाह के उत्तम प्रस्ताव मिल सकते हैं। धन और व्यापार की बात करें तो निवेश में लाभ, आर्थिक योजनाओं में सफलता और व्यापारिक निर्णयों में स्थिरता आएगी। आय के नए स्रोत भी खुल सकते हैं। शुक्र और शनि का यह योग वृषभ राशि के जातकों के लिए राजयोग के समान परिणाम देने वाला सिद्ध हो सकता है।
3 of 4
त्रिग्रही योग
- फोटो : अमर उजाला
मिथुन राशि
मिथुन राशि के जातकों की कुंडली में त्रिग्रही योग दशम भाव में घटित हो रहा है, जो कर्म और प्रतिष्ठा का भाव है। बुध ग्रह मिथुन राशि के स्वामी हैं और जब शनि और शुक्र के साथ दशम में संयोग करते हैं तो यह कर्म सिद्धि योग का निर्माण करता है। इसके प्रभाव से व्यवसाय और नौकरी में लाभ मिल सकता है। उच्च अधिकारियों से संबंध सुधरेंगे, पदोन्नति के योग बनेंगे। विद्यार्थियों और प्रतियोगी परीक्षाओं की तैयारी कर रहे जातकों को अच्छे परिणाम मिल सकते हैं। बुध की शुभता से बुद्धि और तर्क शक्ति तीव्र होगी जिससे निर्णय लेने में सहायता मिलेगी। ज्योतिषीय दृष्टि से यह योग भाग्योदय और सम्मान में वृद्धि लाता है। यह काल लंबे समय से अटकी योजनाओं को पूर्णता देने वाला सिद्ध होगा।
4 of 4
daily rashifal
- फोटो : अमर उजाला
कुंभ राशि
कुंभ राशि के जातकों की कुंडली के लिए यह योग द्वादश भाव में घटित हो रहा है, जो व्यय, विदेश यात्रा, मोक्ष और आत्म-चिंतन का भाव है। शनि कुंभ राशि के स्वामी हैं और जब शनि, शुक्र और बुध के साथ द्वादश भाव में स्थित हों तो यह योग अद्भुत दृष्टिकोण से जीवन के रहस्यों को समझने की क्षमता प्रदान करता है। इसके प्रभाव से विदेश से संबंधित योजनाएं सफल हो सकती हैं। विदेश यात्रा, प्रतियोगी परीक्षा के लिए प्रयास कर रहे जातकों को सफलता मिल सकती है। इसके साथ ही आध्यात्मिक चिंतन और ध्यान में रुचि बढ़ेगी। स्वास्थ्य में सुधार होने के योग हैं। शनि द्वादश में होने पर थोड़ी मानसिक थकावट हो सकती है, परंतु बुध और शुक्र की ऊर्जा इसे संतुलित कर देती है। कर्मफल सिद्धांत के अनुसार इस समय जो भी कर्म किए जाएंगे, उनका दीर्घकालिक प्रभाव पड़ेगा। इसलिए सोच-समझकर कदम बढ़ाएं। शत्रु पक्ष पर विजय के योग हैं और कानूनी मामलों में भी सफलता संभव है।
डिस्क्लेमर (अस्वीकरण): यहां दी गई जानकारी सामान्य मान्यताओं, ज्योतिष, पंचांग, धार्मिक ग्रंथों आदि पर आधारित है। यहां दी गई सूचना और तथ्यों की सटीकता, संपूर्णता के लिए अमर उजाला उत्तरदायी नहीं है।