Panchang Kya Hota Hai: हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग भी कहा जाता है। यह एक ऐसा ज्योतिषीय कैलेंडर है, जिसके जरिए दिन, तिथि, ग्रह-नक्षत्रों की स्थिति और शुभ-अशुभ समय की जानकारी मिलती है। पंचांग का इस्तेमाल पूजा-पाठ, व्रत, त्योहार और धार्मिक कार्यों के लिए सही समय जानने में किया जाता है। पंचांग के माध्यम से पूरे वर्ष का समय और काल की सटीक गणना की जाती है। दैनिक पंचांग में शुभ मुहूर्त, राहुकाल, सूर्योदय और सूर्यास्त का समय, तिथि, करण, नक्षत्र, योग, सूर्य और चंद्र की वर्तमान स्थिति के अलावा हिंदू माह और पक्ष के बारे में जानकारी दी जाती है। आज हम जानेंगे कि पंचांग क्या है, इसे कैसे देखा जाता है और इसका ज्योतिषीय महत्व क्या है।
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Panchang: क्या होता है पंचांग, इसे कैसे देखा जाता है? जानिए ज्योतिष में इसका महत्व
Wed, 16 Jul 2025 03:31 PM IST
ज्योति मेहरा
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
Published by: ज्योति मेहरा
Updated Wed, 16 Jul 2025 03:31 PM IST
सार
हिंदू पंचांग को वैदिक पंचांग भी कहा जाता है। पंचांग के माध्यम से पूरे वर्ष का समय और काल की सटीक गणना की जाती है। आइए जानते हैं पंचांग क्या है, इसे कैसे देखा जाता है और इसका ज्योतिषीय महत्व क्या है?
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पंचांग क्या होता है?
- फोटो : Amar Ujala
पंचांग के पांच अंग
- फोटो : freepik
पंचांग के पांच अंग
पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण के बारे में बताते है। इन्हीं पांच अंगों के कारण इसे "पंचांग" कहा जाता है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
1. तिथि (चंद्र दिवस)
तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच की कोणीय दूरी पर आधारित होती है। जब चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है, तो एक तिथि पूरी होती है। एक माह में तीस तिथियां होती हैं और ये तिथियां दो पक्षों (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) में विभाजित होती हैं। शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है।
सभी तिथियों के नाम
प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, और पूर्णिमा/अमावस्या।
पंचांग मुख्य रूप से पांच अंगों से मिलकर बना होता है। ये पांच अंग तिथि, नक्षत्र, वार, योग और करण के बारे में बताते है। इन्हीं पांच अंगों के कारण इसे "पंचांग" कहा जाता है। आइए इनके बारे में विस्तार से जानते हैं।
1. तिथि (चंद्र दिवस)
तिथि चंद्रमा और सूर्य के बीच की कोणीय दूरी पर आधारित होती है। जब चंद्रमा सूर्य से 12 अंश आगे बढ़ता है, तो एक तिथि पूरी होती है। एक माह में तीस तिथियां होती हैं और ये तिथियां दो पक्षों (कृष्ण पक्ष और शुक्ल पक्ष) में विभाजित होती हैं। शुक्ल पक्ष की आखिरी तिथि पूर्णिमा और कृष्ण पक्ष की अंतिम तिथि अमावस्या कहलाती है।
सभी तिथियों के नाम
प्रतिपदा, द्वितीया, तृतीया, चतुर्थी, पंचमी, षष्ठी, सप्तमी, अष्टमी, नवमी, दशमी, एकादशी, द्वादशी, त्रयोदशी, चतुर्दशी, और पूर्णिमा/अमावस्या।
नक्षत्र (तारा समूह)
- फोटो : adobe stock
2. नक्षत्र (तारा समूह)
नक्षत्र आकाश में स्थित तारों के समूह होते हैं। ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं, और हर नक्षत्र पर किसी न किसी ग्रह का प्रभाव होता है।
इन 27 नक्षत्रों के नाम हैं
अश्विन नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, मृगशिरा नक्षत्र, आर्द्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र, मघा नक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, घनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र।
नक्षत्र आकाश में स्थित तारों के समूह होते हैं। ज्योतिष में कुल 27 नक्षत्र माने गए हैं, और हर नक्षत्र पर किसी न किसी ग्रह का प्रभाव होता है।
इन 27 नक्षत्रों के नाम हैं
अश्विन नक्षत्र, भरणी नक्षत्र, कृत्तिका नक्षत्र, रोहिणी नक्षत्र, मृगशिरा नक्षत्र, आर्द्रा नक्षत्र, पुनर्वसु नक्षत्र, पुष्य नक्षत्र, आश्लेषा नक्षत्र, मघा नक्षत्र, पूर्वाफाल्गुनी नक्षत्र, उत्तराफाल्गुनी नक्षत्र, हस्त नक्षत्र, चित्रा नक्षत्र, स्वाति नक्षत्र, विशाखा नक्षत्र, अनुराधा नक्षत्र, ज्येष्ठा नक्षत्र, मूल नक्षत्र, पूर्वाषाढ़ा नक्षत्र, उत्तराषाढ़ा नक्षत्र, श्रवण नक्षत्र, घनिष्ठा नक्षत्र, शतभिषा नक्षत्र, पूर्वाभाद्रपद नक्षत्र, उत्तराभाद्रपद नक्षत्र, रेवती नक्षत्र।
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वार (दिन)
- फोटो : Adobe Stock
3. वार (दिन)
वार यानी सप्ताह के सात दिन, जो ग्रहों के नाम पर आधारित हैं।
सोमवार (चंद्र)
मंगलवार (मंगल)
बुधवार (बुध)
गुरुवार (गुरु)
शुक्रवार (शुक्र)
शनिवार (शनि)
रविवार (सूर्य)
वार यानी सप्ताह के सात दिन, जो ग्रहों के नाम पर आधारित हैं।
सोमवार (चंद्र)
मंगलवार (मंगल)
बुधवार (बुध)
गुरुवार (गुरु)
शुक्रवार (शुक्र)
शनिवार (शनि)
रविवार (सूर्य)
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योग
- फोटो : adobe stock
4. योग
योग, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर बनते हैं। जब सूर्य और चंद्रमा के विशेष कोण बनते हैं, तो एक योग बनता है। कुल 27 योग होते हैं।
योगों के नाम
विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।
योग, सूर्य और चंद्रमा की स्थिति के आधार पर बनते हैं। जब सूर्य और चंद्रमा के विशेष कोण बनते हैं, तो एक योग बनता है। कुल 27 योग होते हैं।
योगों के नाम
विष्कुम्भ, प्रीति, आयुष्मान, सौभाग्य, शोभन, अतिगण्ड, सुकर्मा, धृति, शूल, गण्ड, वृद्धि, ध्रुव, व्याघात, हर्षण, वज्र, सिद्धि, व्यातीपात, वरीयान, परिघ, शिव, सिद्ध, साध्य, शुभ, शुक्ल, ब्रह्म, इन्द्र और वैधृति।