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बृहस्पति ग्रह कुंडली में ऐसे बनाता है राजयोग, दिलाता है महासफलता

Thu, 03 Sep 2020 08:23 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला Published by: रुस्तम राणा Updated Thu, 03 Sep 2020 08:23 AM IST
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Know when Jupiter forms Raj Yoga in Kundali
ज्योतिष में बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay

ज्योतिष शास्त्र में बृहस्पति ग्रह को देवगुरु कहा जाता है। यह मीन और धनु राशि का स्वामी है। इसे ज्ञान, संतान, धर्म एवं वृद्धि आदि का कारक ग्रह माना जाता है। किसी जातक की कुंडली में देवगुरू बृहस्पति अगर शुभ स्थान में बैठा हो तो यह उसके लिए राजयोग का निर्माण करता है और राजयोग के प्रभाव से व्यक्ति सफलता की ऊँचाइयों में पहुंच जाता है। उसे हर एक क्षेत्र में बड़ी कामयाबी मिलती है। आज हम जानेंगे कि बृहस्पति ग्रह कुंडली में कौनसी स्थिति में राजयोग का निर्माण करता है और उन राजयोग से व्यक्ति को क्या लाभ होता है। 

Know when Jupiter forms Raj Yoga in Kundali
बृहस्पति देव - फोटो : अमर उजाला
बृहस्पति केन्द्रीय भाव में होता है बेहद शुभ
अगर किसी का बृहस्पति केंद्र में होता है तो उसे अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही अगर लग्न में हो तो और भी ज्यादा अच्छा होता है। ऐसा होने पर यह आपके कुंडली में तमाम दोषों को खत्म कर देता है। व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है।
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बृहस्पति देव
गुरु ऐसे बनाता है गजकेसरी योग
जब बृहस्पति और चंद्रमा एक दूसरे के केंद्र में विराजमान रहते हैं तो उस योग को गजकेसरी योग कहते हैं। यह योग कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। ऐसे लोग किसी भी कार्य में काम करते हैं तो उन्हें सफलता जरूर मिलती है। ऐसे योग वाले लोगों को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
गुरु के इन राशियों में होने से बनता है राजयोग
बृहस्पति अगर कर्क, धनु, मीन राशि में हो तो यह राजयोग बनता है। यह योग व्यक्ति को समाज में मान, प्रतिष्ठा दिलाता है। इसके साथ ही काम करने के क्षमता को भी बढ़ाता है। वहीं वृषभ के चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि कहीं से भी हो तो वह जातक उच्च पदाधिकारी, शासनाधिकारी या राजनीति में उच्चतम सफलता दिलाता है।
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बृहस्पति से बड़ा ग्रह
गुरु व चंद्रमा की इस स्थिति में बनता है राज योग
गुरु ज्ञान का कारक है व चंद्र मन का, यदि गुरु पंचम भाव में हो व चंद्रमा दशम भाव में हो तो वह जातक अत्यंत बुद्धिमान, यशस्वी, मन को वश में रखने वाला होकर राजसुख पाने वाला होता है। बृहस्पति देव की पूजा-अर्चना करने वाले लोगों को सात्विक रहना चाहिए। ऐसे लोगों पर बृहस्पतिदेव की कृपा बनी रहती है।
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