ज्योतिष शास्त्र में राहु ग्रह को एक पापी ग्रह की संज्ञा दी गई है। आमतौर पर कुंडली में राहु ग्रह का नाम सुनते ही लोगों के मन में भय उत्पन्न हो जाता है। परंतु कोई भी ग्रह शुभ या अशुभ नहीं होता है बल्कि उसका फल शुभ-अशुभ होता है। यदि कुंडली कोई ग्रह मजबूत स्थिति में होता है तो वह शुभ फल देता है।
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ज्योतिष में राहु
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वहीं जब कमजोर स्थिति में होता है तो उसके फल नकारात्मक मिलते हैं। यहां हम राहु ग्रह की बात कर रहे हैं। राहु को अशुभ फल देने वाला ग्रह माना जाता है। लेकिन यह पूर्ण रूप से सत्य बात नहीं है। राहु कुंडली में शुभ होने पर शुभ फल भी देता है। इसके शुभ फल से व्यक्ति धनवान और राजयोग का सुख भी प्राप्त करता है।
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राहु देव
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कुंडली में राहु की शुभ स्थिति व्यक्ति की किस्मत को चमका देती है। राहु के शुभ प्रभाव से व्यक्ति कुशाग्र बुद्धि का होता है। बली राहु वाले व्यक्ति समाज में अपनी सम्मानित छवि को स्थापित करने में सफल होते हैं। ये अपने धर्म का पालन बहुत ही अच्छी तरह से करते हैं। हालांकि कुंडली में राहु की शुभ-अशुभ स्थिति इसके निश्चित स्थान अथवा शत्रु या मित्र ग्रहों के संग युति अथवा उनकी दृष्टि पर निर्धारित होती है।
अगर किसी व्यक्ति की कुंडली में शनि, शुक्र और बुध लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु शुभ फल दे सकता है। राहु शुक्र, शनि और बुध का मित्र माना जाता है। वहीं अगर कुंडली में सूर्य, चंद्र, मंगल या चंद्रमा लग्न भाव के स्वामी हैं तो राहु से अशुभ फल मिल सकते हैं। क्योंकि राहु इन ग्रहों का शत्रु है।
वहीं जन्म कुंडली में राहु ग्रह का तीसरे, छठे और ग्यारहवें भाव में होना शुभ फलकारी होता है। कुंडली में राहु शुभ होने पर व्यक्ति एक मजबूत व्यक्तित्व का होता है। वह धर्म-कर्म के कार्यों में विशेष रुचि रखता है। ऐसे व्यक्ति धार्मिक और आध्यात्मिक क्षेत्र में बेहद सफल माने जाते हैं। इनके पास धन की कोई कमी नहीं होती है और ये समाज में अपनी पहचान एक धनवान व्यक्ति के रूप में स्थापित करते हैं।