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Jupiter Transit 2021: 6 अप्रैल को देवगुरु बृहस्पति बदलेंगे अपनी राशि, कुंडली में ऐसे बनेगा राजयोग

Tue, 06 Apr 2021 07:15 AM IST
रुस्तम राणा ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली
ज्योतिष डेस्क, अमर उजाला, नई दिल्ली Published by: रुस्तम राणा Updated Tue, 06 Apr 2021 07:15 AM IST
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Jupiter Transit 2021 know the significance of jupiter in Astrology
गुरु का कुंभ राशि में परिवर्तन 2021 - फोटो : अमर उजाला

बृहस्पति ग्रह 6 अप्रैल 2021 मंगलवार को मकर राशि से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में देवगुरु बृहस्पति 14 सितंबर तक रहने के बाद वक्री अवस्था में पुनः मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जहां 20 नवंबर 2021 तक रहेंगे। उसके बाद पुनः मार्गी अवस्था में कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। देवगुरु बृहस्पति के इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर शुभ-अशुभ रूप में पड़ेगा। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति बेहद महत्वपूर्ण ग्रह है। यह अन्य ग्रहों की तुलना में भी बेहद विशाल ग्रह है। धनु और मीन इसकी राशियां हैं। कुंडली के कुछ विशेष भाव में बृहस्पति का होना राजयोग बनाता है। 

Jupiter Transit 2021 know the significance of jupiter in Astrology
बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
बृहस्पति केन्द्रीय भाव में होता है बेहद शुभ

अगर किसी का बृहस्पति केंद्र में होता है तो उसे अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही अगर लग्न में हो तो और भी ज्यादा अच्छा होता है। ऐसा होने पर यह आपके कुंडली में तमाम दोषों को खत्म कर देता है। व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है।

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प्रतीकात्मक तस्वीर - फोटो : Pixabay
गुरु ऐसे बनाता है गजकेसरी योग

जब बृहस्पति और चंद्रमा एक दूसरे के केंद्र में विराजमान रहते हैं तो उस योग को गजकेसरी योग कहते हैं। यह योग कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। ऐसे लोग किसी भी कार्य में काम करते हैं तो उन्हें सफलता जरूर मिलती है। ऐसे योग वाले लोगों को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।

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बृहस्पति ग्रह - फोटो : Pixabay
गुरु के इन राशियों में होने से बनता है राजयोग

बृहस्पति अगर कर्क, धनु, मीन राशि में हो तो यह राजयोग बनता है। यह योग व्यक्ति को समाज में मान, प्रतिष्ठा दिलाता है। इसके साथ ही काम करने के क्षमता को भी बढ़ाता है। वहीं वृषभ के चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि कहीं से भी हो तो वह जातक उच्च पदाधिकारी, शासनाधिकारी या राजनीति में उच्चतम सफलता दिलाता है।

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गुरु ग्रह - फोटो : सोशल मीडिया
गुरु व चंद्रमा की इस स्थिति में बनता है राज योग

गुरु ज्ञान का कारक है व चंद्र मन का, यदि गुरु पंचम भाव में हो व चंद्रमा दशम भाव में हो तो वह जातक अत्यंत बुद्धिमान, यशस्वी, मन को वश में रखने वाला होकर राजसुख पाने वाला होता है। बृहस्पति देव की पूजा-अर्चना करने वाले लोगों को सात्विक रहना चाहिए। ऐसे लोगों पर बृहस्पतिदेव की कृपा बनी रहती है।

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