बृहस्पति ग्रह 6 अप्रैल 2021 मंगलवार को मकर राशि से कुंभ राशि में गोचर करेंगे। इस राशि में देवगुरु बृहस्पति 14 सितंबर तक रहने के बाद वक्री अवस्था में पुनः मकर राशि में प्रवेश कर जाएंगे, जहां 20 नवंबर 2021 तक रहेंगे। उसके बाद पुनः मार्गी अवस्था में कुंभ राशि में प्रवेश कर जाएंगे। देवगुरु बृहस्पति के इस गोचर का प्रभाव सभी राशियों पर शुभ-अशुभ रूप में पड़ेगा। ज्योतिष विज्ञान के अनुसार, देवगुरु बृहस्पति बेहद महत्वपूर्ण ग्रह है। यह अन्य ग्रहों की तुलना में भी बेहद विशाल ग्रह है। धनु और मीन इसकी राशियां हैं। कुंडली के कुछ विशेष भाव में बृहस्पति का होना राजयोग बनाता है।
Jupiter Transit 2021: 6 अप्रैल को देवगुरु बृहस्पति बदलेंगे अपनी राशि, कुंडली में ऐसे बनेगा राजयोग
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अगर किसी का बृहस्पति केंद्र में होता है तो उसे अच्छा माना जाता है। इसके साथ ही अगर लग्न में हो तो और भी ज्यादा अच्छा होता है। ऐसा होने पर यह आपके कुंडली में तमाम दोषों को खत्म कर देता है। व्यक्ति की आयु बढ़ जाती है।
जब बृहस्पति और चंद्रमा एक दूसरे के केंद्र में विराजमान रहते हैं तो उस योग को गजकेसरी योग कहते हैं। यह योग कर्क, वृश्चिक और मीन राशि वाले लोगों के लिए फायदेमंद है। ऐसे लोग किसी भी कार्य में काम करते हैं तो उन्हें सफलता जरूर मिलती है। ऐसे योग वाले लोगों को भगवान शिव की आराधना करनी चाहिए।
बृहस्पति अगर कर्क, धनु, मीन राशि में हो तो यह राजयोग बनता है। यह योग व्यक्ति को समाज में मान, प्रतिष्ठा दिलाता है। इसके साथ ही काम करने के क्षमता को भी बढ़ाता है। वहीं वृषभ के चंद्रमा पर गुरु की दृष्टि कहीं से भी हो तो वह जातक उच्च पदाधिकारी, शासनाधिकारी या राजनीति में उच्चतम सफलता दिलाता है।
गुरु ज्ञान का कारक है व चंद्र मन का, यदि गुरु पंचम भाव में हो व चंद्रमा दशम भाव में हो तो वह जातक अत्यंत बुद्धिमान, यशस्वी, मन को वश में रखने वाला होकर राजसुख पाने वाला होता है। बृहस्पति देव की पूजा-अर्चना करने वाले लोगों को सात्विक रहना चाहिए। ऐसे लोगों पर बृहस्पतिदेव की कृपा बनी रहती है।