2016 नरेन्द्र मोदी के लिए कैसा रहेगा इस विषय का आंकलन करते हुए ज्योतिषशास्त्री सचिन मल्होत्रा बताते हैं कि वर्ष 2015 प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के लिए मिलाजुला रहा। साल की शुरुआत में नरेंद्र मोदी ने अमेरिकी राष्ट्रपति बराक ओबामा को गणतंत्र दिवस पर भारत बुला कर अंतराष्ट्रीय राजनीति में अपने और देश के बढ़ते कद का एहसास करवाया। लेकिन फरवरी में हुए दिल्ली विधानसभा चुनावों में उनकी पार्टी की बुरी हार और बाद में 'भूमि अधिग्रहण बिल' पर सरकार की किरकिरी ने विपक्ष को उनकी सरकार के विरुद्ध लामबंद कर दिया।
संपादन-राकेश झा
जेटली के बाद इन बातों से 2016 में लगेगा मोदी को झटका
उसके बाद तो व्यापम घोटाले, ललित मोदी का मामला, असहिष्णुता के मुद्दे और बिहार विधान सभा चुनावों में पराजय ने विपक्ष को मोदी सरकार पर सड़क से लेकर संसद तक हावी होने का पूरा मौका दिया। साल के अंत में जापान से बुलेट ट्रेन के करार और रूस के साथ बड़े रक्षा सौदों को जहां नरेंद्र मोदी के कुशल अन्तर्राष्ट्रीय राजनीति का उदहारण कहा जा सकता है, वहीं घरेलू मोर्चे राम जन्म मंदिर विवाद और वित्त मंत्री अरुण जेटली पर भ्रष्टाचार के आरोप 'मोदी सरकार' के लिए बड़ी चुनौती बन कर उभरे हैं।
जेटली के बाद इन बातों से 2016 में लगेगा मोदी को झटका
ज्योतिशास्त्र के दृष्टिकोण से देखें तो मोदी की समस्या 2016 में और बढ़ने की आशंका नजर आती है। इस बात के संकेत नरेंद्र मोदी की कुंडली, आजाद भारत की कुंडली और भाजपा की कुंडली से मिल रहे हैं। साल की शुरुवात में राहु 9 जनवरी को सिंह राशि में प्रवेश करेंगे। सिंह राशि में राहु का गोचर वृश्चिक राशि से प्रभावित नरेंद्र मोदी और बीजेपी के चतुर्थ-दशम भाव के अक्ष को पीड़ित करेगा।
जेटली के बाद इन बातों से 2016 में लगेगा मोदी को झटका
वृषभ लग्न की भारत की कुंडली पर यह राहु-केतु का अक्ष भी उसके चतुर्थ-दशम भाव को ग्रसित करेगा। मेदिनी ज्योतिष में चतुर्थ भाव सत्ता, सिंहासन और संसद को दर्शाता है। दशम भाव प्रधानमंत्री की कार्य-शैली और केंद्र सरकार के मंत्रिमंडल से संबंध रखता है। अतः राहु के इस बुरे प्रभाव से मोदी सरकार के कुछ बड़े मंत्रियों के साल की पहली छमाही में भ्रष्टाचार और स्कैंडल में फसने के योग बन रहे हैं।
जेटली के बाद इन बातों से 2016 में लगेगा मोदी को झटका
इसके अतरिक्त गोचर में शनि और मंगल के वृश्चिक राशि में लम्बे समय तक युति में रहने से भी नरेंद्र मोदी और भाजपा की मुश्किलें बढ़ेगी। देश में सांप्रदायिक तनाव बढ़ेगा और जनवरी-फरवरी महीनों में आतंकी वारदातों को अंजाम दिया जा सकता है, ऐसी आशंका दिखती है।