ज्योतिष गणना में सभी नौ ग्रहों का विशेष स्थान होता है। ये ग्रह हैं सूर्य, चंद्र, मंगल, बुध, गुरु, शुक्र, शनि और राहु-केतु। सभी ग्रह जातकों पर अलग- अलग प्रभाव डालते हैं। सभी नौ ग्रहों मे शनि को न्यायाधीश का दर्जा प्राप्त है। मान्यता के अनुसार शनि प्रत्यक्ष देवता सूर्यदेव के पुत्र हैं लेकिन पिता और पुत्र में मतभेद के चलते शनि अपने पिता से नाराज रहते हैं। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि देव मकर और कुंभ राशि के स्वामी है। शनि की छाया को बहुत ही अशुभ माना गया है। ज्योतिष शास्त्र के अनुसार जिन जातकों की कुंडली में शनि अशुभ भाव में आकर बैठ जाते हैं उनको तमाम तरह की परेशानियां और बीमारियां घेर लेती हैं। वहीं दूसरी तरफ जिन जातकों की कुंडली में शनि शुभ भाव में आकर बैठ जाते हैं उन्हें तमाम तरह की सुख-सुविधाएं, वैभव और धन संपत्ति की प्राप्ति होती है। आइए जानते है शनि के बारे में कुछ खास बातें...
मकर और कुंभ राशि के स्वामी शनिदेव इन उपायों से जल्द होते हैं प्रसन्न
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- शनि सबसे धीमी गति से चलने वाले ग्रह हैं। ये करीब ढाई वर्षो में एक राशि से दूसरी राशि में जाते हैं।
ज्योतिष: सूर्य से लेकर राहु-केतु तक, दोषों से मुक्ति के लिए करें ये आसान उपाय
- शनि के राशि बदलने पर कई राशियों पर साढ़ेसाती और ढैय्या सवार हो जाती है।
- जिन जातकों पर शनि की साढ़ेसाती या ढैय्या लगी हुई होती है उन्हें कई तरह की परेशानियों का सामना करना पड़ता है।
- शनि इस समय मकर राशि में गोचर हैं जिस कारण से धनु, मकर और कुंभ राशि पर शनि की साढ़ेसाती है। जबकि कन्या और तुला राशि पर ढैय्या है।
- जिन जातकों की कुंडली में शनि भारी रहते है उन्हें हर शनिवार सरसों का तेल दान करना चाहिए।
- ज्योतिष शास्त्र के अनुसार शनि को शुभ बनाने के लिए शनिवार को काले तिल का दान करें। इसके अलावा चमड़े के जूते-चप्पल दान करना भी शुभ माना गया है।
- जो लोग हनुमान चालीसा का पाठ नियमित करते हैं शनि देव उन्हें कभी भी परेशान नहीं करते हैं।