अपराधियों पर इस तरह नकेल कसेगा 'क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर'
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देश में अपराधियों पर नकेल कसने के लिए 'क्राइम मल्टी एजेंसी सेंटर' (सी-मैक) के प्रोजेक्ट पर काम शुरू हो गया है। नेशनल क्राइम रिकॉर्ड ब्यूरो (एनसीआरबी) का दावा है कि 2019 तक देश में सी-मैक सिस्टम लागू कर दिया जाएगा। इसके शुरू होते ही पुलिस किसी भी वीडियो, चाहे वो दो घंटे का ही क्यों न हो, से अपराधी को खोज निकालेगी।
सीसीटीवी फुटेज या घटना स्थल से जुड़ी अन्य किसी भी क्लिप से देशभर के अपराधियों के डाटा से चंद मिनट में मिलान हो जाएगा।सी-मैक की खास बात यह है कि इससे वह व्यक्ति तुरंत पकड़ा जाएगा, जिसने अपने अलग-अलग नाम से कहीं पर किसी भी तरह के डाटा का इस्तेमाल किया है।
26/11 की घटना के बाद देश में आतंकी वारदातों पर नियंत्रण करने और उन्हें अंजाम देने वालों को पकड़ने के लिए मैक (मल्टी एजेंसी सेंटर) की स्थापना की गई थी। इसमें आईबी, रॉ, तीनों सेनाओं की इंटेलीजेंस, सभी अर्धसैनिक बल, वित्त मंत्रालय से जुड़ी खुफिया एजेंसी और आरपीएफ सहित करीब 26 संगठन शामिल हैं। ये सभी संगठन रोजाना नियमित तौर पर बैठक कर जरूरी सूचनाएं सांझा करते हैं।
अब देश में बढ़ते अपराध को रोकने के लिए मैक की तर्ज पर ही सी-मैक सिस्टम तैयार किया जा रहा है। एनसीआरबी के डिप्टी डायरेक्टर डॉ. प्रसून गुप्ता का कहना है, आजकल कहीं भी कोई घटना होती है तो कोई न कोई चश्मदीद उसका वीडियो बना लेता है। अभी यह दिक्कत आ रही थी कि पुलिस को अगर अपराधी या संदिग्ध के बारे में मालूम है तो ही उस सीसीटीवी को खंगालती है।
यदि घटनास्थल पर भीड़ जमा है और वह अपराधी भी उसी भीड़ में छुपा है तो पुलिस के लिए यह पता करना बड़ा मुश्किल होता है। अगर घटना का कोई वीडियो बना है तो वहां मौजूद सभी लोगों के चेहरे को क्राइम डाटा से मिलाना नामुमकिन होता है।संगठित अपराध को अंजाम देने वाले अक्सर पुलिस की इन्हीं कमियों का फायदा उठाकर बच निकलते हैं।
कितना ही बड़ा वीडियो क्यों न हो, अपराधी मिल जाएगा
सी-मैक के जरिए घटनास्थल पर बने किसी भी वीडियो का मिलान पुलिस क्राइम डाटा से तुरंत सम्भव होगा। डॉ. गुप्ता के मुताबिक, मान लीजिए वीडियो में हजारों आदमी हैं, तो उन सबका पता कैसे लगाया जाए। अगले साल से यह संभव हो जाएगा। सी-मैक में देश के हर छोटे-बड़े अपराधी का डाटा और उनके फोटो मौजूद रहेंगे। वारदात से जुड़ी अगर कोई क्लिप, फुटेज या वीडियो है तो उसमें मौजूद सभी लोगों की जानकारी उनके चेहरे से पता चल जाएगी।
जो कोई भी व्यक्ति यदि पहले किसी भी तरह के अपराध में शामिल रहा है, जेल गया है, कोर्ट से लताड़ लगी है, किसी मामले में आरोपी है आदि, तो कम्प्यूटर स्क्रीन पर उसके चेहरे के सामने अलर्ट दिखेगा। यह सब जानकारी पुलिस जांच में रामबाण का काम करेगी। चेन स्नैचर, वाहन चोर गिरोह, लूटमार गिरोह, बैंक फ्रॉड, कॉल सेंटर के जरिए लोगों को चूना लगाने वाले गिरोह, इन सबका पता लगाना आसान हो जाएगा। इनका फोटो बता देगा कि इन्होंने पहले कहां, कब और किस राज्य में वारदात की है।
सी-मैक में यह सब शामिल रहेगा
एफआईआर, क्राइम डिटेल, कोर्ट सरेंडर फॉर्म, प्रॉपर्टी सर्च और जब्त, अपील फॉर्म का नतीजा, मिसिंग पर्सन डिटेल, अन-आइडेंटिफाइड पर्सन रजिस्ट्रेशन, आइडेंटिफाइड डेड बॉडी, गैंग प्रोफाइल फॉर्म, गैंग क्रिमिनल ऐक्टिविटी एंड मेंबर फॉर्म, लॉस्ट प्रॉपर्टी डिटेल, मेडिको लीगल केस, फॉरनर रजिस्ट्रेशन फॉर्म, मिसिंग वीकल, प्रोक्लेम अफेंडर, फिंगर प्रिंट अनालिसिस, रिक्वेस्ट फॉर लुकआउट सरकुलर, लेटर रोगेटरी रिक्वेस्ट, समन वारंट, जेल डिटेल, आर्म्स लाइसेंस, रिट पेटिसन, सीनियर सिटिजन, सिंगल वुमन, ड्रग पेड्लर, सेक्स अफेंडर और विलेज क्राइम डिटेल आदि जानकारी शामिल रहेगी।