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Bihar Election: दो मुख्यमंत्री देने वाली बिरादरी को महज तीन टिकट, संख्याबल की सियासत में कायस्थों का महत्व गौण

Thu, 30 Oct 2025 08:00 AM IST
Himanshu Mishr हिमांशु मिश्र
Updated Thu, 30 Oct 2025 08:00 AM IST
सार

बिहार को दो मुख्यमंत्री देने वाली बिरादरी के प्रत्याशियों को इस बार के विधानसभा चुनाव में महज तीन टिकट दिए गए हैं। संख्या बल की राजनीति से कायस्थों का महत्व गौण होता दिख रहा है। महागठबंधन में सिर्फ कांग्रेस ने इकलौता प्रतिनिधित्व दिया है। पढ़िए ये रिपोर्ट

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Bihar Election community that gave two CMs got three tickets Kayasthas secondary in politics of number game
बिहार विधानसभा चुनाव 2025 - फोटो : अमर उजाला ग्राफिक्स

विस्तार

बिहार में सूबे की प्रबुद्ध और समृद्ध कायस्थ बिरादरी पर इस बार संख्या बल की राजनीति हावी हो गई। इतनी हावी कि राज्य को दो सीएम, देश को पहला राष्ट्रपति सह संविधान सभा का अध्यक्ष और संपूर्ण क्रांति के प्रणेता देने वाली यह बिरादरी विधानसभा चुनाव में टिकट के मामले में मोहताज हो कर रह गई। इसका अंदाजा इसी से लगाया जा सकता है कि इस बार दोनों गठबंधनों के तीन दलों ने इस बिरादरी से महज तीन लोगों को मौका दिया है। दोनों गठबंधनोंं में शामिल नौ अन्य दलों में इस बिरादरी का प्रतिनिधित्व शून्य है।
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भाजपा ने दो सीटिंग विधायक कुम्हरार से अरुण सिन्हा व नरकटियागंज से रश्मि वर्मा का टिकट काट दिया। पार्टी ने इस बिरादरी से नीतीश सरकार में मंत्री नितिन नबीन को इकलौता उम्मीदवार बनाया है। जदयू ने भी एक ही विधायक को टिकट दिया है। कांग्रेस से गया शहर से मोहन श्रीवास्तव इकलौते उम्मीदवार हैं। महागठबंधन में शामिल राजद, तीन वाम दलों समेत 6 दलों ने तो राजग के अन्य सहयोगी लोजपा आर, आरएलएम और हम ने इस बिरादरी को प्रतीकात्मक प्रतिनिधित्व भी नहीं दिया है।
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अन्य सवर्ण बिरादरी पर भरोसा...
इस चुनाव में दोनों गठबंधनों ने सवर्ण बिरादरी के 124 लोगों को मौका दिया है। इनमें से एक प्रतिशत से भी कम आबादी वाली कायस्थ बिरादरी की संख्या महज 3 है। राजग ने सवर्ण बिरादरी के 85 लोगों को मौका दिया है, इनमें कायस्थ बिरादरी की संख्या दो है। विपक्षी महागठबंधन सवर्ण बिरादरी के जिन 39 लोगों को मौका दिया है, उनमें कायस्थ बिरादरी की इकलौती उपस्थिति है।
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दशकों रही है सियासत की धुरी...
यह बिरादरी 1990 में मंडल राजनीति की शुरुआत से पहले राज्य की सियासत की धुरी रही है। इस बिरादरी के केबी सहाय करीब चार साल और महामाया प्रसाद सिन्हा कुछ महीनों तक सीएम रहे हैं। सिन्हा नाटकीय घटनाक्रम में 1967 में कृषक मजदूर पार्टी का इकलौता विधायक रहते सीएम बनने में सफल रहे। इसी बिरादरी के डॉ राजेंद्र प्रसाद देश के पहले राष्ट्रपति और संविधान सभा के अध्यक्ष रहे। इसी बिरादरी के जयप्रकाश नारायण के संपूर्ण क्रांति के नारे ने केंद्र में पहली बार कांग्रेस को सत्ता से हटाने में मुख्य भूमिका अदा की थी।
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