आप का आरोप, छात्रों को सूखा राशन बांटने के लिए उत्तरी नगर निगम ने अब तक जारी नहीं किया टेंडर
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन संदीप कपूर ने कहा, निगम के बच्चों को सूखा राशन उपलब्ध कराने की एक प्रक्रिया है। इसके अंतर्गत जुलाई से अक्तूबर महीने का चार महीने का सूखा राशन बच्चों को बांटा जा चुका है...
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आम आदमी पार्टी ने उत्तर दिल्ली नगर निगम के छात्रों को सूखा राशन बांटने के लिए अभी तक टेंडर प्रक्रिया शुरू न करने पर भाजपा की आलोचना की है। पार्टी ने कहा है कि यह एमसीडी के स्कूलों में पढ़ने वाले छात्रों के भविष्य के साथ खिलवाड़ है। वहीं भाजपा ने इसे आम आदमी पार्टी का एक और झूठ करार दिया है। पार्टी ने कहा है कि निगम स्कूलों में नियमों के अनुसार बच्चों को सूखा राशन उपलब्ध कराया जा रहा है।
आम आदमी पार्टी का आरोप
आप नेता सौरभ भारद्वाज ने बुधवार को प्रेस कांफ्रेंस में कहा कि उत्तरी दिल्ली नगर निगम के 700 स्कूलों में चार लाख के लगभग बच्चे पढ़ते हैं। सरकार के द्वारा इन्हें मुफ्त सूखा राशन उपलब्ध कराया जाता है, लेकिन भाजपा ने अभी तक बच्चों को राशन उपलब्ध कराने का टेंडर जारी नहीं किया है। इससे बच्चों के कुपोषण की समस्या उभर सकती है।
उन्होंने कहा कि भाजपा ने दिल्ली सरकार की उस योजना को भी रोकने की कोशिश की जिसके अंतर्गत लोगों के घर तक मुफ्त राशन पहुंचाया जाना था। आप नेता ने आरोप लगाया कि निगम स्कूलों में उच्च स्तर की पढ़ाई भी नहीं की जाती, जिससे बच्चों का भविष्य अंधकारमय होता जा रहा है।
भाजपा ने किया बचाव
पूर्वी दिल्ली नगर निगम के स्टैंडिंग कमेटी के पूर्व चेयरमैन संदीप कपूर ने अमर उजाला से कहा कि यह आम आदमी पार्टी का एक और झूठ है। निगम के बच्चों को सूखा राशन उपलब्ध कराने की एक प्रक्रिया है और इसमें किसी तरह का फेरबदल नहीं किया गया है। इसके अंतर्गत जुलाई से अक्तूबर महीने का चार महीने का सूखा राशन बच्चों को बांटा जा चुका है। नवंबर से मार्च के बीच चार महीने का राशन जल्द ही बांटा जाना है। इसमें किसी तरह की देर नहीं हुई है और सब कुछ तय प्रक्रिया के अनुसार चल रहा है।
कितना मिलता है राशन
संदीप कपूर के मुताबिक़ नगर निगम के स्कूलों में पढ़ने वाले हर छात्र को प्रति चार महीने में 4.650 किलो गेंहूं, 4.650 किलो चावल, 3.5 किलो दाल और एक लीटर रिफाइंड तेल दिया जाता है। बच्चों को राशन उपलब्ध कराने वाली कंपनी गेहूं और चावल फ़ूड कारपोरेशन ऑफ़ इंडिया से प्राप्त करती है, जबकि दाल और तेल के लिए उसे निगमों की तरफ से धन दिया जाता है। ठेकेदार के द्वारा किट बनाकर स्कूलों को सौंप दिया जाता है और इसे छात्रों को बांट दिया जाता है। यह प्रक्रिया सभी निगमों के द्वारा अपनाई जाती है।