बांद्रा स्टेशन पर जुटी भीड़ मामले में गिरफ्तार टीवी पत्रकार को मिली जमानत
- बांद्रा कोर्ट ने 15 हजार के निजी मुचलके पर दी जमानत
- अन्य आरोपियों को पुलिस हिरासत
विस्तार
वही, मामले में भीड़ का हिस्सा रहे और पुलिस पर हमला करने के आरोप में जिन 9 लोगों को गिरफ्तार किया गया है उन्हें कोर्ट में पेशी के बाद 19 अप्रैल तक पुलिस हिरासत में भेज दिया गया है।
मराठी चैनल के पत्रकार राहुल कुलकर्णी को उनके गांव मराठवाड़ा के उस्मानाबाद जिले से गिरफ्तार किया गया था। उसके बाद स्थानीय पुलिस उसे लेकर मुंबई आई थी। बुधवार को बांद्रा पुलिस ने राहुल के खिलाफ विभिन्न धाराओं के तहत एफआईआर दर्ज कर हिरासत में लेकर लंबे समय तक पूछताछ की, उसके बाद गिरफ्तार कर लिया था।
गृहमंत्री अनिल देशमुख ने ट्वीट कर राहुल की गिरफ्तारी की जानकारी दी थी। उन्होंने ट्वीट किया था कि जिस खबर की वजह से लॉकडाउन का उल्लंघन कर हजारों मजदूर बांद्रा रेलवे स्टेशन पर इकट्ठा हुए थे, उस मामले में पत्रकार राहुल कुलकर्णी को गिरफ्तार कर लिया गया है।
इस मामले में सोशल मीडिया पर घर की ओर चलो अभियान चलाकर प्रवासी मजदूरों को लॉकडाउन तोड़ने के लिए उकसाने के आरोपी विनय दुबे को सबसे पहले गिरफ्तार किया गया था, उसके बाद उस्मानाबाद से मराठी चैनल के पत्रकार कुलकर्णी और अन्य दूसरा आरोपियों को गिरफ्तार किया गया।
गिरफ्तार आरोपियों में वे भी शामिल हैं जो वायरल वीडियो में लोगों से कह रहे थे कि या तो उनके घर जाने की व्यवस्था की जाए या सरकार सबको 15000 रुपये दे। वीडियो में नजर आ रहे दूसरे आरोपियों की पहचान की कोशिश की जा रही है, जिससे पता लगाया जा सके कि कहीं पूर्व नियोजित साजिश तो नहीं थी।
रेल मंत्रालय पर मामला दर्ज करे महाराष्ट्र सरकार-राउत
पत्रकार राहुल को जमानत मिलने पर वरिष्ठ पत्रकार व शिवसेना प्रवक्ता सांसद संजय राउत ने कहा कि बांद्रा स्टेशन पर हुई भीड़ के लिए रेल मंत्रालय और सोशल मीडिया पर उकसाने वाला पोस्ट जिम्मेदार है। इसलिए महाराष्ट्र सरकार को रेल मंत्रालय के खिलाफ भी एफआईआर दर्ज करानी चाहिए। वहीं, पत्रकार राहुल को जमानत मिलने पर राउत ने प्रसन्नता व्यक्त की है।
दूबे से जान पहचान नहींः देशमुख
गृह मंत्री अनिल देशमुख ने सोशल मीडिया पर वायरल हो रही आरोपी विनय दुबे के साथ की तस्वीरों पर सफाई दी है। उन्होंने कहा कि 8 दिन पहले मंत्रालय में एक ऑटो रिक्शावाला आया था। मुख्यमंत्री मौजूद नहीं थे, इसलिए उसने मुख्यमंत्री सहायता निधि के लिए ₹25000 का चेक मेरे चेंबर में मुझे सौंपा था। इस दौरान वहां मौजूद दूसरा शख्स शायद विनय दुबे था