{"_id":"5af27e404f1c1b63098b8c23","slug":"woman-and-her-father-sentenced-life-time-imprisonment-in-case-of-six-unparented-girls","type":"story","status":"publish","title_hn":"अनाथ बच्चियों से रेप के मामले में 50 वर्षीय महिला और उसके प्रोफेसर पिता को उम्रकैद","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
अनाथ बच्चियों से रेप के मामले में 50 वर्षीय महिला और उसके प्रोफेसर पिता को उम्रकैद
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Updated Wed, 09 May 2018 10:26 AM IST
विज्ञापन
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
मध्य प्रदेश के शिवपुरी जिले में छह अनाथ एवं नाबालिग बच्चियों के साथ रेप एवं उनका उत्पीड़न करने के मामले में विशेष अदालत ने एक 79 वर्षीय सेवानिवृत्त प्रोफेसर और उनकी बेटी को उम्रकैद की सजा सुनाई है। विशेष न्यायाधीश अरुण कुमार ने पेश किए गए सबूतों के आधार पर मुख्य आरोपी के. एन. अग्रवाल और उसकी अधिवक्ता बेटी शैला अग्रवाल (50) को अनाथ लड़कियों से रेप करने, उनके साथ मारपीट करने, धमकाने एवं उनके साथ अत्याचार करने के आरोपों में दोषी करार देते हुए आजीवन कारावास की सजा सुनाई।
विज्ञापन
इसके अलावा अदालत ने दोनों पर 16-16 हजार रुपये का जुर्माना भी लगाया। बता दें कि प्रो. के. एन. अग्रवाल सरकारी डिग्री कॉलेज से रिटायर हो चुके हैं। उनकी बेटी शैला अग्रवाल परमार्थ समिति द्वारा संचालित अनाथ आश्रम की अध्यक्ष थीं। अग्रवाल वर्ष 2004 में रिटायर होने बाद अनाथ आश्रम में ही रहने लगे थे।
विज्ञापन
इस मामले का खुलासा 2016 में आश्रम की दो लड़कियों ने किया था। ये लड़कियां यौन शोषण के कारण आश्रम से भागी थीं। जांच में सामने आया था कि छह लड़कियों के साथ नींद की गोली देकर ज्यादती की जाती थी।
विज्ञापन
अभियोजन पक्ष के मुताबिक, आश्रम में 23 लड़कियां रहती थीं, जिनमें से छह ने उनके साथ रेप किए जाने की शिकायत की थी। इस खुलासे के बाद शैला और उसके पिता को पॉक्सो एक्ट की विभिन्न धाराओं के तहत गिरफ्तार कर आश्रम को सील कर दिया गया था। इस मामले में पुलिस ने बाप बेटी समेत चार के खिलाफ आरोप पत्र पेश किया था। इनमें शैला का भाई भी शामिल है, लेकिन विक्षिप्त होने के कारण कोर्ट ने उसके खिलाफ सजा नहीं सुनाई। चौथे आरोपी को साक्ष्य के अभाव में बरी कर दिया गया।
