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पूरे इंतजाम के साथ बुजुर्ग पिता को ट्रेन में छोड़ा लावारिस, जेब में पड़े मिले 2150 रुपये
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, ग्वालियर
Updated Sun, 10 Jun 2018 04:49 PM IST
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आज के समय में मानवता दिन प्रति दिन खत्म होती जा रही है। इस बात का अंदाजा कोई मां बाप नहीं लगा सकता कि कब उनके बच्चे उन्हें बोझ समझकर घर से बाहर कर दें। यदि ओल्ड एज होम की वेबसाइट पर लोगों के सवाल जवाब देखे जाएं तो बहुत से लोग अपने माता पिता को वहां रखने के लिए महीने का किराया पूछ रहे होते हैं। मानवता को तार तार कर देने वाला ऐसा ही एक मंजर ग्वालियर में भी देखा गया।
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यहां बुधवार दोपहर अटेंडेंट ने व्हील चेयर पर बैठे एक बुजुर्ग को छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस के एचए-वन कोच से उतारा और कुली को बता दिया कि उन्हें ग्वालियर से कोई लेने आएगा। लेकिन काफी देर तक इंतजार करने के बाद भी उन्हें लेने कोई नहीं पहुंचा।
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बुजुर्ग व्यक्ति की उम्र करीब 60 साल है। वह बीमार हैं और उन्हें पूरे इंतजाम के साथ लावारिस छोड़ा गया है। उनकी जेब से 2150 रुपये मिले हैं। टिकट बुक कराने वाले ने ना तो अपना नाम दर्ज करवाया और ना ही पता। बुजुर्ग के पास भी पहचान से संबंधित कोई दस्तावेज नहीं मिला।
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फिलहाल बुजुर्ग आरपीएफ के उपनिरीक्षक बृजेन्द्र सिंह जेएच अस्पताल में भर्ती हैं। उनकी तबीयत बहुत खराब है और वह कुछ बोलने की हालत में नहीं हैं। उनके बारे में पता करने के लिए जब छत्तीसगढ़ एक्सप्रेस ट्रेन के एसी कोच के टीटी से संपर्क किया गया तो उन्होंने बताया कि यात्री का नाम अरुण कुमार है। वह निजामुद्दीन से ग्वालियर एचए वन के कोच की सीट नंबर 6 पर यात्रा कर रहे थे।
अस्पताल ले जाने से पहले उन्हें वेटिंग रूम में रखा गया था। स्टेशन मैनेजर ने उनसे बात करने की बहुत कोशिश की तो टूटी फूटी भाषा में उन्होंने बताया कि उनका नाम अरुण कुमार शर्मा है, वह मुरार के रहने वाले हैं और वायु सेना से रिटायर हैं।
एडीआरएस झांसी मंडल के संजय सिंह नेगी का कहना है कि यदि कोई बीमार व्यक्ति ट्रेन में सफर करता है तो टीटी को ये सूचना कंट्रोल रूम को देनी चाहिए थी। वहीं टिकट कहां से बना और उस पर मोबाइल नंबर क्यों नहीं है, इसकी जांच रेलवे के सीनियर अधिकारी कर रहे हैं।
