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MP News: वारंट निकला तो धनुष-बाण और फरसा लेकर उतरे आदिवासी, महिलाओं ने फॉरेस्ट टीम से की झूमा-झटकी

Mon, 31 Oct 2022 05:02 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, बुरहानपुर Published by: अरविंद कुमार Updated Mon, 31 Oct 2022 05:02 PM IST
सार

मध्यप्रदेश के बुरहानपुर जिले में फॉरेस्ट टीम के खिलाफ आदिवासी धनुष-बाण, कुल्हाड़ी और फरसा लेकर सड़क पर उतर आए। फॉरेस्ट टीम जंगल में पेड़ काटे जाने पर सर्च वारंट लेकर पहुंची थी। महिलाओं ने टीम से झूमा-झटकी की और पथराव भी किया।

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When the warrant came out the tribals landed with bow and arrow and ax in Burhanpur
धनुष-बाण और फरसा लेकर उतरे आदिवासी - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

फॉरेस्ट टीम के खिलाफ धनुष-बाण और फरसा लेकर उतरने की घटना बुरहानपुर जिले के सीवल की है। टीम पर इस एरिया में पहले भी हमले हो चुके हैं। नावरा रेंजर पुष्पेंद्र जाधव ने बताया, नेपानगर आरओ और टीम सर्च वारंट लेकर सीवल पहुंची थी। हमें खबर मिली थी कि सीवल में एक महीने से लगातार सागौन के जंगल की अवैध कटाई हो रही है। कुछ आदिवासियों ने अतिक्रमण कर रखा है। टीम के यहां पहुंचते ही महिलाएं जमा हो गईं और विवाद करने लगीं। महिलाओं ने टीम पर पथराव कर दिया।

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फॉरेस्ट टीम मौके से वापस लौट आई और सीधा नेपानगर थाने जाकर इसकी शिकायत की। बताया जा रहा है कि टीम के नेपानगर जाते ही सुबह 10 बजे जंगल में छिपे बैठे अतिक्रमणकारियों ने सीवल में धनुष-बाण, फरसे और कुल्हाड़ी लेकर जुलूस निकाला। बुरहानपुर एसपी राहुल कुमार लोढ़ा ने कहा, सीवल में आदिवासियों के मुख्य नेता सूड़िया, उसकी वाइफ, भाई प्रताप और 25 से 30 महिलाओं ने पथराव किया। जो लोग जंगल काट रहे थे, वे इकट्ठा होकर बाहर आए और वापस जंगल में चले गए। इस पर भी पुलिस संज्ञान ले रही है।
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सागौन के जंगल में क्यों छिपे बैठे हैं 200 से ज्यादा अतिक्रमणकारी?
एक महीने से भी ज्यादा समय से 200 से अधिक अतिक्रमणकारी नावरा रेंज के सांईखेड़ा गांव से सटी वन विभाग की बीट-266 में छिपे हुए हैं। यहां रहकर वे लगातार जंगल की कटाई कर रहे हैं। इस एरिया में सागौन के पेड़ बड़े पैमाने पर हैं। सागौन के पेड़ में दीमक नहीं लगती। लकड़ी मजबूत होती है और ये फिनिशिंग भी अच्छी देती है। इसकी इसी खासियत की वजह से इसे फर्नीचर बनाने में ज्यादा उपयोग किया जाता है। सागौन की लकड़ी की बाजार में अच्छी कीमत भी मिल जाती है।

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When the warrant came out the tribals landed with bow and arrow and ax in Burhanpur
बुरहानपुर में जंगल - फोटो : सोशल मीडिया

तीन साल में 10 से ज्यादा हमले
तीन साल में फॉरेस्ट और पुलिस टीम पर 10 से ज्यादा हमले हो चुके हैं। इन हमलों में कई बार ग्रामीण भी घायल हुए हैं। इसी महीने 11 अक्टूबर को जामुन नाला, 19 अक्टूबर को बाकड़ी में वनकर्मियों पर हमला हो चुका है। बुरहानपुर में खरगोन और बड़वानी से भी अतिक्रमणकारी आकर बस गए हैं।

क्यों हो रहा विवाद?
साल 2006 में वनाधिकार अधिनियम लागू हुआ है। इसके तहत आदिवासियों को वनाधिकार के पत्र यानी जमीन के पट्टे दिए जाते हैं। जनजातीय विभाग के अनुसार, वनाधिकार अधिनियम 2006 लागू होने के बाद से पट्टा वितरण प्रोसेस चालू कर दी गई थी। तब से लेकर अब तक जिले में 8 हजार 005 वनाधिकार पत्र ऐसे पात्र दावेदारों को दिए गए हैं, जो साल 2005 से पहले वन क्षेत्र में काबिज थे। लेकिन यहां धीरे-धीरे बाहरी अतिक्रमणकारी आकर बसते गए और कई फर्जी दावे भी लगा दिए गए।

ऐसे में खास बात यह है कि जिले में सबसे अधिक नेपानगर क्षेत्र में करीब तीन हजार से ज्यादा पट्टे बंटे हैं। इसमें नेपानगर, सीवल, मांडवा, सागफाटा, नावरा, सांईखेड़ा, गोलखेड़ा सहित अन्य वन क्षेत्र शामिल हैं। जबकि, अन्य पट्टे बुरहानपुर और खकनार क्षेत्र में बंटे हैं। 5 हजार 944 पेंडिंग हैं, लेकिन इस पेंडेंसी की मुख्य वजह यह है कि इसमें कई दावेदार साल 2005 के बाद आकर जिले में बसे हैं या फिर किसी के परिवार ने एक बार लाभ ले लिया है, उसी परिवार का दूसरा सदस्य लाभ लेने के चक्कर में है।

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