भोपाल: निगम परिषद में कमीशन के बयान पर घमासान, भाजपा ने शबिस्ता जकी से मांगी माफी; कांग्रेस ने भी घेरी आसंदी
भोपाल नगर निगम परिषद की बैठक में नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के कमीशन संबंधी बयान पर भाजपा ने हंगामा करते हुए माफी की मांग की। विवाद के कारण कार्यवाही 15 मिनट स्थगित रही। पार्किंग, लीज, दूषित पानी और सफाई व्यवस्था के मुद्दे भी उठे।
विस्तार
नगर निगम परिषद की बैठक में शनिवार को ‘कमीशन’ शब्द पर भाजपा और कांग्रेस पार्षदों के बीच तीखी बहस हुई। नेता प्रतिपक्ष शबिस्ता जकी के यह कहने पर कि मैं कमीशन नहीं लेती, भाजपा पार्षदों ने विरोध जताते हुए अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी की आसंदी घेर ली और उनसे माफी मांगने को कहा। जकी ने किसी पर आरोप लगाने से इनकार करते हुए माफी मांगने से भी इनकार कर दिया। हंगामे के कारण सदन की कार्यवाही 15 मिनट के लिए स्थगित करनी पड़ी। बैठक में कैफेटेरिया और निगम मुख्यालय के हिस्सों को किराए पर देने, अमृत 2.0 के लिए 493.49 करोड़ रुपये के ऋण, ऑडिट आपत्तियों, स्ट्रीट लाइटों की गुणवत्ता और शहर के तालाबों से जुड़े मुद्दे भी उठे। अंत में सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर का प्रस्ताव संशोधनों के लिए वापस लिया गया और अध्यक्ष ने बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। आईएसबीटी स्थित बैठक हॉल में कार्यवाही शुरू होने पर अध्यक्ष ने सरकार द्वारा नियुक्त 12 एल्डरमैन और नए निगम आयुक्त रामप्रकाश अहिरवार का परिचय कराया। बैठक की शुरुआत में ही जकी ने छुट्टी के दिन परिषद का सम्मेलन बुलाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने निगम अधिनियम का हवाला देते हुए कहा कि छुट्टी के दिन सदन की बैठक नहीं हो सकती। अध्यक्ष ने उन्हें समझाइश दी, जिसके बाद कार्यवाही आगे बढ़ी।
मैं कमीशन नहीं लेती बयान पर भाजपा ने घेरा
प्रश्नकाल में जकी ने वर्ष 2024-25 और 2026-27 की ऑडिट आपत्तियों के बावजूद किए गए भुगतानों पर सवाल उठाए। इसके बाद न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के चौथे फ्लोर पर बने हॉल को किराए पर देने के प्रस्ताव पर चर्चा के दौरान उन्होंने कहा, मैं कमीशन नहीं लेती। इस बयान पर एमआईसी सदस्य रविंद्र यती, मनोज राठौर, सुषमा बवीसा, अशोक वाणी, आनंद अग्रवाल, जितेंद्र शुक्ला और जगदीश यादव ने आपत्ति जताई। रविंद्र यती ने कहा कि सदन में इस तरह के आरोप नहीं लगाए जाने चाहिए और जकी को माफी मांगनी चाहिए। अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने भी बयान को आपत्तिजनक बताते हुए शब्द कार्यवाही से विलोपित करने और उन्हें वापस लेने को कहा। उन्होंने चेतावनी दी कि बिना तथ्य और प्रमाण के गंभीर आरोप लगाने पर आगे कठोर कार्रवाई की जा सकती है। जकी ने जवाब दिया, मैं डंके की चोट पर बोल रही हूं। मैंने किसी का नाम नहीं लिया। मैंने कहा था कि मैं कमीशन नहीं लेती। वन-टू-वन बता दीजिए, वीडियोग्राफी भी देख सकते हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि वह माफी नहीं मांगेंगी। कांग्रेस पार्षद भी उनके समर्थन में उतर आए और भाजपा पर बात का बतंगड़ बनाने का आरोप लगाया। इसके बाद दोनों पक्षों में नारेबाजी हुई। अध्यक्ष ने बहुमत के आधार पर प्रस्ताव पारित किया, जिसका विपक्ष ने विरोध किया। हंगामे के चलते सदन 15 मिनट के लिए स्थगित हुआ और फिर दोबारा शुरू हुआ।
कैफेटेरिया और निगम मुख्यालय के प्रस्ताव पर सवाल
नए निगम मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक और कैफेटेरिया को किराए पर देने के प्रस्ताव पर कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और अजीजउद्दीन ने आपत्ति जताई। जकी ने एजेंडे को स्पष्ट नहीं बताते हुए प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। प्रस्ताव के मुताबिक, सर्विस ब्लॉक को 10 साल के लिए किराए पर देने और आगे 10 साल के नवीनीकरण का प्रावधान रखा गया है। इससे अधिकतम 20 साल तक किराए पर दिया जा सकेगा। महापौर मालती राय ने बताया कि कैफेटेरिया किराए पर दिया जाएगा, जबकि नीचे के हिस्से को बैंक आदि के लिए लीज पर देने की योजना है। भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने इसे निगम की आय बढ़ाने वाला प्रस्ताव बताया। जकी ने कैफेटेरिया के पुराने प्रस्ताव पर भी सवाल उठाए। उनका कहना था कि 19 अगस्त की पिछली परिषद बैठक में इंडियन कॉफी हाउस को दो साल के लिए कैफेटेरिया किराए पर देने का प्रस्ताव आया था। उनके मुताबिक, इसे औपचारिक रूप से निरस्त करने और वापस लेने के कारण दर्ज करने की प्रक्रिया स्पष्ट नहीं की गई। उन्होंने पूछा कि प्रस्ताव वापस लेने के पीछे क्या वजह थी और नियम-प्रक्रिया का पालन क्यों नहीं किया गया। जकी ने कहा कि विपक्ष जब ऐसे मामलों पर सवाल उठाता है, तो उस पर विकास कार्यों में बाधा डालने का आरोप लगा दिया जाता है। उन्होंने कहा कि सत्ता और निगम की जिम्मेदारी सत्तापक्ष के पास है, इसलिए कामकाज में कमी होने पर जवाबदेही भी तय होनी चाहिए।
जकी ने लगाए भ्रष्टाचार के आरोप, लाइटों के वर्क ऑर्डर मांगे
नेता प्रतिपक्ष ने निगम में भ्रष्टाचार का आरोप लगाते हुए कहा कि सदन में पूछे गए सवालों के सही जवाब नहीं दिए जाते। उन्होंने ऑडिट आपत्तियों में सामने आए बिलों और भुगतानों का हवाला देते हुए दावा किया कि करोड़ों रुपये से जुड़े मामलों में अनियमितताएं हुई हैं और कई भुगतान लंबित हैं। उन्होंने बजट की स्थिति पर भी सवाल उठाया और कहा कि खर्च का पूरा ब्योरा सामने आना चाहिए, ताकि शहर के विकास कार्यों की वास्तविक स्थिति स्पष्ट हो सके। जकी ने जीआईएस के दौरान लगाई गई स्ट्रीट लाइटों और फाउंटेन की गुणवत्ता पर भी सवाल उठाए। उन्होंने आरोप लगाया कि कुछ पुराने फाउंटेन पर रंग-रोगन कर उन्हें लगाया गया, जो कुछ समय बाद बंद हो गए। उन्होंने लाइटों के चोरी होने और कुछ का स्टोर रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने का भी दावा किया। जकी ने इस मामले में आर्थिक अपराध अन्वेषण शाखा (ईओडब्ल्यू) में केस दर्ज होने का हवाला देते हुए अनियमितताओं की जांच की मांग की। उन्होंने कहा कि उनके वार्ड में करीब छह लाख रुपये की लाइटें लगाई गई हैं, लेकिन बार-बार मांगने के बावजूद उन्हें लाइटों की कंपनी, गुणवत्ता और वर्क ऑर्डर से संबंधित दस्तावेज नहीं मिले। उनका आरोप था कि लाइटें हेवेल्स कंपनी की बताई जाती हैं, लेकिन संबंधित वर्क ऑर्डर उपलब्ध नहीं कराया गया। उन्होंने दावा किया कि शहर के कई वार्डों में लाइटें बंद पड़ी हैं और उनकी गुणवत्ता पर सवाल हैं। इन आरोपों पर अध्यक्ष सूर्यवंशी ने पलटवार करते हुए कहा कि कांग्रेस बिना तथ्यों और सबूतों के आरोप लगाने की आदत से बाज नहीं आती। उन्होंने कहा कि सदन में गंभीर आरोप लगाने वालों को प्रमाण प्रस्तुत करने चाहिए। जकी के आरोपों की स्वतंत्र पुष्टि बैठक में सामने नहीं आई।
अमृत 2.0 के 493.49 करोड़ के ऋण पर कांग्रेस की आपत्ति
बैठक के एजेंडे में अमृत 2.0 योजना के लिए 493.49 करोड़ रुपये के ऋण का प्रस्ताव भी शामिल था। एमआईसी सदस्य जितेंद्र शुक्ला ने योजना के पक्ष में जानकारी दी और भाजपा पार्षदों ने इसका समर्थन किया। कांग्रेस पार्षदों ने बड़े तालाब में गंदगी मिलने और उसे रोकने में नाकामी पर सवाल उठाए। पार्षद अजीजउद्दीन ने पुराने शहर के तालाबों की अनदेखी का मुद्दा उठाते हुए योजना दूसरे विभाग को सौंपने का सुझाव दिया। पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान, अशोक मारण और देवांशु कंसाना ने भी आपत्तियां जताईं। उन्होंने ठेका कंपनी अंकिता कंस्ट्रक्शन की फाइल की जांच कराने की मांग की। विरोध के बावजूद प्रस्ताव बहुमत के आधार पर पारित कर दिया गया।
दूषित पानी के चार नमूने फेल, 901 शिकायतों के निराकरण का दावा
प्रश्नकाल में कांग्रेस पार्षद देवांशु कंसाना ने दूषित पानी की जांच और पाइपलाइन का मुद्दा उठाया। एमआईसी सदस्य रविंद्र यती ने बताया कि पानी के चार नमूने जांच में फेल हुए थे और ये निजी ट्यूबवेल के थे। उन्होंने गंदे पानी से संबंधित 901 शिकायतों का निराकरण किए जाने की जानकारी दी। कंसाना ने अपने वार्ड में चार इंच की जगह छह से आठ इंच की पाइपलाइन बिछाने की मांग की। भाजपा के वरिष्ठ पार्षद सुरेंद्र बाडिका और एमआईसी सदस्य मनोज राठौर ने भी इस मांग का समर्थन किया। वार्ड-46 के कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने शिक्षा उपकर से मिलने वाली राशि और सरकारी स्कूलों में हुए खर्च पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता से उपकर वसूला जाता है, लेकिन अब तक केवल 12 लाख रुपये खर्च हुए हैं। उन्होंने स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए राशि जारी करने की मांग की। अध्यक्ष ने निगम आयुक्त को शिक्षा उपकर की राशि सरकारी स्कूलों के विकास कार्यों में खर्च करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। कांग्रेस पार्षद मो. सरवर ने सभी 85 वार्डों में सफाई कर्मचारियों की कमी का आकलन कर जरूरत के अनुसार भर्ती करने की मांग की। वहीं, वार्ड-5 के पार्षद अशोक मारण ने संत नगर में नए विसर्जन घाट का काम शुरू नहीं होने पर सवाल उठाया। उन्होंने कहा कि महापौर की घोषणा के बावजूद निर्माण शुरू नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है।
दिशा सूचक बोर्डों से अवैध होर्डिंग हटाने के निर्देश
कांग्रेस पार्षद नसीम गफूर ने प्रमुख मार्गों पर लगे दिशा सूचक बोर्डों पर मंत्री, विधायक और महापौर की तस्वीरें लगाने पर आपत्ति जताई। उन्होंने कहा कि रास्ता बताने वाले बोर्डों पर राजनीतिक विज्ञापन नहीं होने चाहिए और भाजपा-कांग्रेस सहित किसी भी दल के नेताओं को ऐसी अनुमति नहीं दी जानी चाहिए। एमआईसी सदस्य जगदीश यादव ने बताया कि शहर के 85 वार्डों में 95 दिशा सूचक बोर्ड लगे हैं। इनके आधे हिस्से में एजेंसी के माध्यम से विज्ञापन की अनुमति दी जाती है। निगम के अनुसार, इनसे वित्तीय वर्ष 2025-26 में 9.14 करोड़ रुपये और चालू वित्तीय वर्ष में अब तक 6.79 करोड़ रुपये की आय हुई है। अध्यक्ष सूर्यवंशी ने निगम आयुक्त को निर्देश दिए कि एक तरफ अनुमति लेकर दूसरी तरफ लगाए गए होर्डिंग सहित सभी अवैध विज्ञापनों की जांच कर कार्रवाई की जाए। उन्होंने कहा कि क्षेत्र और मार्ग की पहचान बताने वाले गेट व साइन बोर्डों पर प्रचार सामग्री नहीं लगनी चाहिए। उन्होंने स्पष्ट किया कि मंत्री-विधायक सहित कोई भी व्यक्ति अवैध होर्डिंग लगाएगा, तो उसे हटाया जाएगा। एमआईसी सदस्य जगदीश यादव ने सुलभ कॉम्प्लेक्स पर लगे अवैध होर्डिंग हटाने की मांग भी उठाई।
सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर का प्रस्ताव वापस
गर्ल्स कॉलेज के पास सोन चिरैया हॉकर्स कॉर्नर को किराए पर देने के प्रस्ताव पर भी चर्चा हुई। अगस्त में छात्राओं की सुरक्षा को लेकर आपत्ति सामने आई थी। नए प्रस्ताव में एजेंसी के लिए परिसर और आसपास 24 घंटे सीसीटीवी चालू रखने तथा सुरक्षा गार्ड तैनात करने की शर्त रखी गई थी। इसके अलावा तीन साल के किराए और अगले तीन साल के नवीनीकरण का प्रावधान था। एमआईसी सदस्य जगदीश यादव ने कुछ संशोधन करने की बात कहते हुए प्रस्ताव वापस ले लिया। इसके बाद अध्यक्ष किशन सूर्यवंशी ने बैठक अनिश्चितकाल के लिए स्थगित कर दी। इस तरह बैठक में कमीशन के बयान से शुरू हुआ विवाद भ्रष्टाचार के आरोपों, ठेकों, लाइटों की गुणवत्ता, तालाबों, पेयजल और निगम की आय से जुड़े कई मुद्दों तक पहुंचा। एक ओर कांग्रेस ने निगम के कामकाज पर सवाल उठाए, वहीं अध्यक्ष ने आरोपों के समर्थन में प्रमाण देने पर जोर दिया और अवैध होर्डिंग हटाने के निर्देश दिए।
निगम मुख्यालय के हिस्से 20 साल तक किराए पर देने की तैयारी
बैठक में नए निगम मुख्यालय के सर्विस ब्लॉक और कैफेटेरिया को किराए पर देने का प्रस्ताव भी विवाद का विषय बना। पहले सर्विस ब्लॉक को दो साल के लिए देने का निर्णय था, लेकिन अब इसे 10 साल के लिए देने और आगे 10 साल के नवीनीकरण का प्रावधान रखा गया है। इस तरह इसे अधिकतम 20 साल तक किराए पर दिया जा सकेगा। कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान और अजीजउद्दीन ने प्रस्ताव पर आपत्ति जताई। शबिस्ता जकी ने एजेंडे को स्पष्ट नहीं बताते हुए प्रस्ताव वापस लेने की मांग की। वहीं, भाजपा पार्षद देवेंद्र भार्गव ने इसे निगम की आय बढ़ाने वाला प्रस्ताव बताया। महापौर मालती राय ने स्पष्ट किया कि कैफेटेरिया किराए पर दिया जाएगा, जबकि नीचे के हिस्से को बैंक आदि के लिए लीज पर देने की योजना है। एमआईसी सदस्य जगदीश यादव ने न्यू मार्केट मल्टीलेवल पार्किंग के नीचे अवैध कब्जे का मुद्दा भी उठाया। इस पर अध्यक्ष ने निगम आयुक्त को कार्रवाई करने के निर्देश दिए।
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स्कूलों के विकास और सफाई कर्मचारियों की भर्ती की मांग
वार्ड-46 के कांग्रेस पार्षद योगेंद्र सिंह गुड्डू चौहान ने शिक्षा उपकर से मिलने वाली राशि और सरकारी स्कूलों में हुए विकास कार्यों पर सवाल उठाए। उन्होंने कहा कि जनता से उपकर वसूला जाता है, लेकिन अब तक केवल 12 लाख रुपये ही खर्च हुए हैं। उन्होंने अपने वार्ड के सरकारी स्कूलों के जीर्णोद्धार के लिए राशि जारी करने की मांग की। इस पर अध्यक्ष ने निगम आयुक्त को शिक्षा उपकर की राशि स्कूलों के विकास कार्यों में खर्च करने की व्यवस्था बनाने के निर्देश दिए। कांग्रेस पार्षद मो. सरवर ने सभी 85 वार्डों में सफाई कर्मचारियों की कमी का आकलन कर जरूरत के मुताबिक भर्ती करने की मांग उठाई। वहीं, वार्ड-5 के पार्षद अशोक मारण ने संत नगर में नए विसर्जन घाट का निर्माण शुरू नहीं होने का मुद्दा उठाया। उन्होंने कहा कि महापौर की घोषणा के बावजूद काम शुरू नहीं हुआ है, जिससे स्थानीय लोगों को परेशानी हो रही है।
