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उमरिया: बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व की प्रसिद्ध बाघिन डॉटी की मौत, मां से बिछड़े दो शावक, वन विभाग ने बढ़ाई निगरानी
Sat, 10 Oct 2026 04:18 PM IST
उमरिया ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: उमरिया ब्यूरो
Updated Sat, 10 Oct 2026 04:18 PM IST
सार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व में प्रसिद्ध बाघिन ‘डॉटी’ का शव मिलने के बाद पोस्टमार्टम में प्रथम दृष्टया मौत प्राकृतिक बताई गई है। डॉटी के 15–16 माह के दो शावकों की सुरक्षा को लेकर वन विभाग ने निगरानी बढ़ा दी है।
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बांधवगढ़ की मशहूर बाघिन ‘डॉटी’’ की मौत
विस्तार
बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के जंगल से वन्यजीव प्रेमियों को मायूस करने वाली खबर सामने आई है। यहां की प्रसिद्ध बाघिन ‘डॉटी’ की मौत हो गई है। मानपुर बफर रेंज के मझखेता बीट में गश्त के दौरान डॉटी का शव मिलने से वन विभाग में हलचल मच गई। सबसे भावुक करने वाली बात यह है कि डॉटी के लगभग 15 से 16 माह के दो शावक अब अपनी मां से बिछड़ गए हैं। दोनों शावकों को क्षेत्र में अलग-अलग विचरण करते हुए देखा गया है। वन विभाग ने उनकी गतिविधियों पर निगरानी बढ़ा दी है।
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बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के अनुसार 9 अक्टूबर को हाथियों की मदद से गश्त के दौरान मानपुर बफर रेंज के मझखेता बीट में दोपहर बाद एक मादा बाघ का शव दिखाई दिया। सूचना मिलते ही वन विभाग के अधिकारियों ने तत्काल कार्रवाई करते हुए राष्ट्रीय बाघ संरक्षण प्राधिकरण (NTCA) के निर्धारित मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) का पालन किया। घटनास्थल को घेरकर सुरक्षित किया गया और वरिष्ठ अधिकारियों को सूचना दी गई। शाम को डॉग स्क्वाड की मदद से मृत बाघिन और आसपास के इलाके की सघन जांच कराई गई। इस दौरान कोई संदिग्ध गतिविधि या वस्तु सामने नहीं आई। इसके बाद वन विभाग ने निर्धारित प्रक्रिया के तहत आगे की कार्रवाई की।
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10 अक्टूबर को सक्षम वन्यजीव स्वास्थ्य अधिकारी और विकासखंड पशु चिकित्सा अधिकारी के दल ने वरिष्ठ अधिकारियों की मौजूदगी में बाघिन के शव का पोस्टमार्टम किया। पूरी प्रक्रिया की फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी भी कराई गई। आगे की जांच के लिए आवश्यक नमूने एकत्र किए गए हैं, जिन्हें विभिन्न प्रयोगशालाओं में भेजा जा रहा है। वन विभाग के अनुसार पोस्टमार्टम के दौरान प्रथम दृष्टया मौत का कारण प्राकृतिक पाया गया है। हालांकि मौत के कारणों की विस्तृत जांच के लिए नमूनों की प्रयोगशाला रिपोर्ट महत्वपूर्ण होगी। NTCA के SOP के अनुसार समिति की मौजूदगी में शव परीक्षण के बाद बाघिन के शव के अंतिम निस्तारण की कार्रवाई की जा रही है।
अब दो शावकों पर टिकी निगरानी
डॉटी की मौत के बाद उसके दोनों शावकों की सुरक्षा वन विभाग के लिए महत्वपूर्ण हो गई है। करीब 15 से 16 माह की उम्र में दोनों शावक मां से अलग होकर जंगल में विचरण कर रहे हैं। इस उम्र में वे अपनी प्राकृतिक गतिविधियों के जरिए स्वतंत्र जीवन की ओर बढ़ रहे होते हैं लेकिन मां के न रहने से उनकी स्थिति पर विशेष नजर रखना जरूरी है। बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन दोनों शावकों की गतिविधियों पर लगातार निगरानी बनाए हुए है। उनकी लोकेशन, विचरण क्षेत्र और स्थिति पर नजर रखी जा रही है, ताकि जरूरत पड़ने पर समय रहते आवश्यक कदम उठाए जा सकें।
डॉटी की मौत बांधवगढ़ के वन्यजीव संसार के लिए एक दुखद घटना है। जंगल में उसकी मौजूदगी अब अतीत बन गई है लेकिन उसके दोनों शावकों के रूप में उसकी विरासत आगे बढ़ने की उम्मीद कायम है। अब वन्यजीव प्रेमियों की नजरें इन दोनों शावकों पर टिकी हैं कि वे जंगल में सुरक्षित रहते हुए स्वतंत्र जीवन की राह कैसे तय करते हैं। क्षेत्र संचालक अनुपम सहाय के नेतृत्व में बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन दोनों शावकों की निगरानी कर रहा है।
