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Umaria: फिर बढ़ा हाथियों का उत्पात, गांवों और खेतों में कर रहे नुकसान, ग्रामीण पटाखे फोड़कर भगा रहे
Sun, 04 Sep 2022 03:24 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उमरिया
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sun, 04 Sep 2022 03:24 PM IST
सार
पतौर, खितौली और पनपथा परिक्षेत्रों के लोग परेशान हैं। ये हाथी गांवों में मकानों को तो खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण पटाखे फोड़कर, शोर मचाकर इन्हें आए दिन भगा रहे हैं।
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जंगली हाथियों का झुंड खड़ी फसलों को तबाह कर देते हैंं।
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
उमरिया जिले में स्थित बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व के क्षेत्रों में जंगली हाथियों का उत्पात एक बार फिर बढ़ गया है। इलाके के पतौर, खितौली और पनपथा परिक्षेत्रों के लोग परेशान हैं। ये हाथी गांवों में मकानों को तो खेतों में फसलों को नुकसान पहुंचा रहे हैं। ग्रामीण पटाखे फोड़कर, शोर मचाकर इन्हें आए दिन भगा रहे हैं। वन विभाग और टाइगर रिजर्व के लिए भी ये हाथी चुनौती बनते जा रहे हैं।
जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पहुंचे हाथी गांवों के नजदीक खेतों में पहुंचकर धान सहित अन्य फसल नष्ट कर रहे हैं। रविवार को भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के कर्मचारी पटाखे फोड़ कर और ग्रामीणों की मदद से शोर मचाकर जंगली हाथियों को खेत से खदेड़ा गया।
ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के फसल नुकसान के बाद राजस्व विभाग द्वारा मुआवजा में देरी की जाती है। जिसके कारण ग्रामीणो को परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि जंगली हाथी झुंड के रूप में आते हैं, वे खेतों से गुजरते हैं, जिससे खड़ी फसल तबाह हो जाती है। हाथी खेत में बने मकानों की दीवारें भी गिरा देते हैं। हाथी का झुंड कब आ जाए कुछ पता नहीं रहता। ग्रामीण इनसे काफी परेशान है। उधर वन विभाग और टाइगर रिजर्व के लिए भी ये हाथी चुनौती बनते जा रहे हैं। ये पालतू हाथियों के बाड़े में घुस जाते हैं, हालांकि हाथियों में अब सामान्य व्यवहार ही रहता है पर ये हाथी कब क्या कर दें, पता नहीं रहता।
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जानकारी के अनुसार बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व क्षेत्र में पहुंचे हाथी गांवों के नजदीक खेतों में पहुंचकर धान सहित अन्य फसल नष्ट कर रहे हैं। रविवार को भी बांधवगढ़ टाइगर रिजर्व प्रबंधन के कर्मचारी पटाखे फोड़ कर और ग्रामीणों की मदद से शोर मचाकर जंगली हाथियों को खेत से खदेड़ा गया।
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ग्रामीणों ने बताया कि हाथियों के फसल नुकसान के बाद राजस्व विभाग द्वारा मुआवजा में देरी की जाती है। जिसके कारण ग्रामीणो को परेशानी होती है।
ग्रामीणों ने बताया कि जंगली हाथी झुंड के रूप में आते हैं, वे खेतों से गुजरते हैं, जिससे खड़ी फसल तबाह हो जाती है। हाथी खेत में बने मकानों की दीवारें भी गिरा देते हैं। हाथी का झुंड कब आ जाए कुछ पता नहीं रहता। ग्रामीण इनसे काफी परेशान है। उधर वन विभाग और टाइगर रिजर्व के लिए भी ये हाथी चुनौती बनते जा रहे हैं। ये पालतू हाथियों के बाड़े में घुस जाते हैं, हालांकि हाथियों में अब सामान्य व्यवहार ही रहता है पर ये हाथी कब क्या कर दें, पता नहीं रहता।
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