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विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के एप का 30 मार्च को लोकार्पण, हिंदी-अंग्रेजी समेत 189 भाषाओं में बताएगा पंचांग
Wed, 05 Mar 2025 02:37 PM IST
उज्जैन ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
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Published by: उज्जैन ब्यूरो
Updated Wed, 05 Mar 2025 02:37 PM IST
सार
विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह वैदिक घड़ियां विशेष तरीके से तैयार की जा रही है जिसमें हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही लगभग 189 भाषाएं रहेंगी। घड़ी की विशेषता की बात की जाए तो इसे विशेष चिप के माध्यम से तैयार किया जा रहा है जिससे बिजली चले जाने पर भी यह घड़ी बंद नहीं होगी और इसका समय अपने आप चलता रहेगा।
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विक्रमादित्य वैदिक घड़ी - 30 मार्च को होगा एप का लोकार्पण, हिंदी अंग्रेजी ही नहीं 189 भाषाओं को
विस्तार
विक्रमादित्य वैदिक घड़ी विश्व की पहली ऐसी घड़ी है, जो कि भारतीय काल गणना पर आधारित है। घड़ी के लोकार्पण के एक वर्ष बाद आगामी 30 मार्च 2025 को विक्रमादित्य वैदिक घड़ी के एप का लोकार्पण होने वाला है। साथ ही वैदिक घड़ी के छोटे स्वरूप की लगभग 100 से अधिक घड़ियों का भी निर्माण किया जा रहा है, जो देश ही नहीं बल्कि विदेशों में भी ऐसे प्रमुख स्थानों पर लगाई जाएंगी, जिससे हमारे देश का मान बढ़ेगा। याद रहे कि 29 फरवरी 2024 को प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी ने विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का लोकार्पण किया था।
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विक्रम विश्वविद्यालय के पुरातत्वविद रमण सोलंकी ने बताया कि विक्रमादित्य वैदिक घड़ी का एप तैयार किया जा चुका है। यह एप जीपीएस द्वारा संचालित है। इससे यह किसी भी स्थान पर सूर्योदय के समय को सटीकता से जान पाता है और उसके अनुसार वैदिक समय की गणना करता है। यह एप 189 से अधिक भारतीय एवं वैश्विक भाषाओं में देखा जा सकता है। यह घड़ी सूर्योदय से परिचालित है। अतः जिस स्थान पर जो सूर्योदय का समय होगा, उस स्थान की कालगणना तदनुसार होगी। स्टेंडर्ड टाइम भी उसी से जुड़ा रहेगा। इस एप के माध्यम से वैदिक समय, लोकेशन, भारतीय स्टैंडर्ड टाइम, ग्रीन विच मीन टाइम, तापमान, वायु गति, आर्द्रता, भारतीय पंचांग, विक्रम संवत, मास, ग्रह स्थिति, योग, भद्रा स्थिति, चंद्र स्थिति, पर्व, शुभाशुभ मुहूर्त, घटी, नक्षत्र, जयंती, व्रत, त्यौहार, चौघडिया, सूर्य ग्रहण, चंद्र ग्रहण, ग्रह, नक्षत्र, ग्रहों का परिभ्रमण आदि की जानकारी समाहित है।
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प्रधानमंत्री को भेंट की जा चुकी है वैदिक घड़ी
कुछ दिनों पूर्व भोपाल में आयोजित ग्लोबल समिट के दौरान मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी को इस वैदिक घड़ी का छोटा स्वरूप भेंट किया था। इसे प्रधानमंत्री ने सराहा भी था। वर्तमान में इस प्रकार की वैदिक घड़ी विक्रमादित्य शोधपीठ कार्यालय में लगी हुई है, लेकिन जल्द ही इस प्रकार की 100 से अधिक वैदिक घड़ियां अब देश-विदेश में भी भेजी जाएंगी। शुरुआती दौर में प्रधानमंत्री कार्यालय और नए संसद भवन में इसे लगाया जाएगा।
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बिजली चले जाने पर भी यह घड़ी बंद नहीं होगी
विक्रमादित्य शोधपीठ के निदेशक श्रीराम तिवारी ने बताया कि यह वैदिक घड़ियां विशेष तरीके से तैयार की जा रही है जिसमें हिंदी और अंग्रेजी के साथ ही लगभग 189 भाषाएं रहेंगी। घड़ी की विशेषता की बात की जाए तो इसे विशेष चिप के माध्यम से तैयार किया जा रहा है, जिससे बिजली चली जाने पर भी यह घड़ी बंद नहीं होगी और इसका समय अपने आप चलता रहेगा।

विक्रमादित्य वैदिक घड़ी - 30 मार्च को होगा एप का लोकार्पण
