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Ujjain: रामचरित मानस विवाद में महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी की एंट्री, कहा- वोट की राजनीति है विवाद का उद्देश्य
Sat, 04 Feb 2023 07:48 PM IST
रवींद्र भजनी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: रवींद्र भजनी
Updated Sat, 04 Feb 2023 07:48 PM IST
सार
श्रीरामचरितमानस को लेकर उठे देशव्यापी विवाद पर उज्जैन में महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरी ने कहा कि यह सब वोट की खातिर हो रहा है। अगर वह लोग रामचरितमानस जलाएंगे तो हम इसके प्रति आस्था जगाने का काम करेंगे।
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उज्जैन में महामंडलेश्वर सुमनानंद गिरी।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
श्रीरामचरितमानस को लेकर उठे देशव्यापी विवाद पर मौनतीर्थ पीठ उज्जैन के पीठाधीश्वर एवं निरंजनी अखाड़े के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद महाराज ने कहा कि अगर वो श्रीरामचरितमानस को जलाएंगे तो हम जन-जन में इस पवित्र ग्रंथ के प्रति आस्था को और बढ़ाएंगे। श्रीरामचरितमानस में किसी का अपमान नहीं किया गया, बल्कि यह उत्कृष्ट जीवन जीने का मार्ग बताता है।
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महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद महाराज ने कहा कि जिस बात को लेकर यह उपद्रव उठा है, उसका मर्म समझने की आवश्यकता है। ताड़न का अर्थ किसी को प्रताड़ित करना नहीं अपितु उसके बारे मे पता लगाने से है। किसी के बारे में भांप लेना ही ताड़ लेना भी कहा जाता है। विवाद की पहली जड़ चौपाई के शब्द का अर्थ गलत समझ लेना है। दूसरी बात यह कि इस शब्द को जाति विशेष से जोड़कर ले लिया गया है। श्रीरामचरितमानस मे किसी जाति विशेष के बारे में कोई बात नहीं कही गई है। इस वजह से श्रीरामकथा के आयोजन में कभी किसी वर्ग के श्रोता ने आपत्ति नहीं उठाई। आम व्यक्ति में इतनी समझ है तो राजनीति करने वालों को यह बात आसानी से समझ लेना चाहिए था। हां, इसके माध्यम से वोट की राजनीति करने का उद्देश्य सभी को साफ दिखाई दे रहा है। इस वजह से अगर वो श्रीरामचरितमानस जलाएंगे तो हम जन-जन में इसके प्रति और अधिक आस्था जगाएंगे।
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श्रीरामचरितमानस की प्रतियों का करेंगे नि:शुल्क वितरण
धार्मिक नगरी उज्जैन में 26 फरवरी को वृहद स्तर पर तुलसी मानस स्वाध्याय का संकल्प दिलवाया जाएगा। इसमें प्रत्येक व्यक्ति प्रतिदिन श्रीरामचरितमानस की कम से कम एक चौपाई का पाठ नियमित करेगा। साथ ही मानस की प्रतियों का नि:शुल्क वितरण किया जाएगा।
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तो आरक्षण का लाभ भी न ले
महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरी ने कहा किसी शब्द से आपत्ति है तो उसे लिखकर आरक्षण का लाभ लेना भी राजनीतिज्ञों को छोड़ देना चाहिए। प्रत्येक व्यक्ति जरूरत पड़ने पर अपनी जाति लिखता ही है। जाति प्रमाणपत्र भी स्वीकार किया जाता है। राजनेता तो इसका अत्यधिक लाभ लेते हैं। इसी आधार पर उन्हें टिकट मिलते हैं। वे इस कारण ही राजनीतिक पद पर बैठ पाते हैं। अत: विरोध करने वाले नेताओं को पहले ये पद छोड़ना चहिए। यह साहस क्यों नहीं दिखाया जाता। यह प्रश्न भी इस विवाद के बीच विचारणीय है।
