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Ujjain Kaal Bhairav: सिंधिया स्टेट की पगड़ी पहनकर बाल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले बाबा कालभैरव
Wed, 06 Dec 2023 09:17 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Wed, 06 Dec 2023 09:17 PM IST
सार
भगवान काल भैरव की सवारी भैरव अष्टमी के बाद नवमी पर नगर भ्रमण पर निकली, जिसके पहले ग्वालियर के सिंधिया घराने से लाई गई पगड़ी भगवान काल भैरव को पहनाई गई।
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काल भैरव नगर भ्रमण पर निकले। सवारी में सैकड़ों लोग शामिल हुए।
- फोटो : सोशल मीडिया
विस्तार
उज्जैन के कालभैरव मंदिर की पहचान भगवान महाकाल के नगर कोतवाल के रूप में होती है। भगवान महाकाल की तरह ही नगर कोतवाल कालभैरव भी भ्रमण कर प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए निकलते हैं। मार्गशीर्ष मास की नवमी पर प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए कालभैरव नगर भ्रमण पर निकले। इसके लिए देशभर से श्रद्धालु काल भैरव के दर्शन करने उमड़े।
नगर कोतवाल के रूप में विराजित काल भैरव की महिमा अपरंपार है। मान्यता है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने से पहले नगर कोतवाल का आशीर्वाद लेना जरूरी है। श्रद्धालु भगवान महाकाल का दर्शन करने के बाद कालभैरव के दरबार में पहुंचते हैं। भगवान काल भैरव की सवारी भैरव अष्टमी के बाद नवमी पर नगर भ्रमण पर निकली, जिसके पहले ग्वालियर के सिंधिया घराने से लाई गई पगड़ी भगवान काल भैरव को पहनाई गई। मार्गशीर्ष मास की नवमी पर प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए कालभैरव बाल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। इसके लिए देशभर से श्रद्धालु भगवान काल भैरव के दर्शन करने उमड़े शाम को कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम द्वारा पूजन के बाद सवारी शुरू हुई। सवारी भैरवगढ़ भ्रमण करते हुए सिद्धवट पहुंची, जहां पूजन-आरती की गई।
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नगर कोतवाल के रूप में विराजित काल भैरव की महिमा अपरंपार है। मान्यता है कि भगवान महाकाल का आशीर्वाद लेने से पहले नगर कोतवाल का आशीर्वाद लेना जरूरी है। श्रद्धालु भगवान महाकाल का दर्शन करने के बाद कालभैरव के दरबार में पहुंचते हैं। भगवान काल भैरव की सवारी भैरव अष्टमी के बाद नवमी पर नगर भ्रमण पर निकली, जिसके पहले ग्वालियर के सिंधिया घराने से लाई गई पगड़ी भगवान काल भैरव को पहनाई गई। मार्गशीर्ष मास की नवमी पर प्रजा का हाल-चाल जानने के लिए कालभैरव बाल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले। इसके लिए देशभर से श्रद्धालु भगवान काल भैरव के दर्शन करने उमड़े शाम को कलेक्टर कुमार पुरुषोत्तम द्वारा पूजन के बाद सवारी शुरू हुई। सवारी भैरवगढ़ भ्रमण करते हुए सिद्धवट पहुंची, जहां पूजन-आरती की गई।
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काल भैरव को महाकाल का कोतवाल कहा जाता है। उनके दर्शन के बाद ही बाबा महाकाल के दर्शन की मान्यता है।
- फोटो : सोशल मीडिया
कालभैरव मंदिर के पुजारी पंडित पुष्कर चतुर्वेदी ने बताया कि भगवान के जन्मोत्सव को लेकर मंदिर में फूलों की सजावट की गई है तो रंगीन विद्युत रोशनी से पूरा मंदिर परिसर जगमगा उठा है। सवारी में भगवान कालभैरव की पालकी, बैंड, ढोल, ध्वज, घोड़े, बग्घी के साथ झांकियां शामिल रही। भैरवगढ़ का भ्रमण करते हुए सवारी पुन: कालभैरव मंदिर पहुंचकर समाप्त हुई। इसके बाद आरती-पूजा कर उत्सव का समापन किया गया।
जेल में कैदियों को दर्शन देने पहुंचे भगवान कालभैरव
बाल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले भगवान कालभैरव की सवारी जैसे ही केंद्रीय जेल भैरवगढ़ पहुंची, वैसे ही कैदियों ने जय कालभैरव की गूंज से पूरे परिसर को गुंजायमान कर दिया। इस दौरान जेल अधीक्षक ने बाबा की कालभैरव की पालकी का पूजन किया।
जेल में कैदियों को दर्शन देने पहुंचे भगवान कालभैरव
बाल स्वरूप में नगर भ्रमण पर निकले भगवान कालभैरव की सवारी जैसे ही केंद्रीय जेल भैरवगढ़ पहुंची, वैसे ही कैदियों ने जय कालभैरव की गूंज से पूरे परिसर को गुंजायमान कर दिया। इस दौरान जेल अधीक्षक ने बाबा की कालभैरव की पालकी का पूजन किया।
