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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain News ›   Ujjain In ride of Mahakal God has two identical masks one is seated in a palanquin and other on an elephant

Ujjain: महाकाल की सवारी में भगवान के एक जैसे होते हैं दो मुखौटे, एक पालकी में दूसरा हाथी पर होता है विराजित

Sun, 10 Sep 2023 10:06 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: अरविंद कुमार Updated Sun, 10 Sep 2023 10:06 PM IST
सार

बाबा महाकाल की सवारी में श्रद्धालुओं की संख्या लगातार बढ़ती जा रही है। बार-बार महाकाल की पालकी को ऊंचा किए जाने की बात होती है, जिससे पालकी में सवार बाबा महाकाल के दर्शन सुगमता से हो सके। लेकिन यह बात बहुत कम लोग या श्रद्धालु जानते हैं कि बाबा महाकाल के एक समान दो मुखारविंद एक साथ सवारी में चलते हैं।

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Ujjain In ride of Mahakal God has two identical masks one is seated in a palanquin and other on an elephant
बाबा महाकाल की सवारी - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

बाबा महाकाल के एक मुखारविंद पालकी में और दूसरा हाथी पर होता है। दोनों ही एक समान मुखारविंद होते हैं। दोनों में से किसी का भी दर्शन हो जाए तो बराबर का पुण्य लाभ मिलता है। बाबा महाकाल अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए राजा की तरह निकलते हैं। उनका राजसी ठाट-बाट और वैभव हर श्रद्धालु का मनमोह लेता है।

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बाबा महाकाल जब अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकलते हैं तो उनके आगे कड़ाबीन के धमाकों से नगर की जनता को यह संदेश दिया जाता है कि राजा पधार रहे हैं। पुलिस का बैंड स्वर लहरियों के साथ आगे चलता है। पुलिस के सशस्त्र जवान सवारी मार्ग पर कदमताल के साथ चलते और जब महाकाल राजा मंदिर से बाहर आते हैं तो मुख्य द्वार पर उन्हें पुलिस विभाग की और से सशस्त्र बल गार्ड ऑफ ऑनर देता है और फिर एक राजा की तरह पालकी में सवार बाबा महाकाल अपनी जनता का हाल जानने के लिए नगर भ्रमण पर निकल पड़ते हैं। 
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महाकाल मंदिर के पुजारी पंडित महेश गुरु ने बताया कि पूर्व के समय में जो राजा होते थे वह या तो पालकी में सवार होकर निकलते थे या हाथी पर सवार होकर निकलते थे। इसलिए अनादिकाल से जब से महाकाल की सवारी निकल रही है। उसी समय हमारे पूर्वजों ने भक्तों की सुविधा के लिए यह व्यवस्था की थी कि भगवान के एक जैसे दो मुखारविंद बनवाए गए और तभी से एक मुखारविंद पालकी में विराजित किया जाता है और दूसरा उसी तरह का मुखारविंद हाथी पर बैठाया जाता है। महाकाल राजा इस तरह पालकी में भी सवार होकर नगर भ्रमण पर निकलते हैं और हाथी पर सवार होकर भी अपनी प्रजा का हाल जानने के लिए निकलते हैं। 
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पुजारी महेश गुरु बताते हैं कि दोनों मुखारविंद एक समान रहते हैं, जिन भक्तों को पालकी में बैठे महाकाल राजा के दर्शन नहीं हो पाते हैं, वह श्रद्धालु हाथी पर सवार महाकाल राजा के दर्शन कर सकता है। श्रद्धालुओं को इस बात की जानकारी नहीं है, इसलिए श्रद्धालु सिर्फ पालकी की ओर ही ध्यान देते हैं। आवश्यकता है कि मंदिर प्रबंध समिति इस बात का बड़े स्तर पर प्रचार प्रसार करें, ताकि आम लोगों और श्रद्धालुओं को पता चल सके कि नगर भ्रमण पर बाबा महाकाल पालकी और हाथी दोनों पर सवार होकर निकल रहे हैं।

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