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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Surging Waves of Faith on Sarvapitri Amavasya: Thousands Perform Tarpan at Nilganga Sarovar

उज्जैन में आस्था का संगम: शिप्रा में स्नान, सिद्धवट पर पिंडदान, नीलगंगा में 11वें साल निःशुल्क तर्पण

Sat, 10 Oct 2026 10:58 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sat, 10 Oct 2026 10:58 AM IST
सार

उज्जैन में सर्वपितृ और शनिश्चरी अमावस्या पर सिद्धवट, रामघाट और नीलगंगा सरोवर सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ी। लोगों ने पितृ तर्पण, पिंडदान और शिप्रा स्नान किया। नीलगंगा में 11वें वर्ष निःशुल्क तर्पण आयोजन हुआ।

 

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Surging Waves of Faith on Sarvapitri Amavasya: Thousands Perform Tarpan at Nilganga Sarovar
ऐसे हुआ पूजन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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मोक्षदायिनी नगरी उज्जैन में शनिवार को सर्वपितृ अमावस्या और शनिश्चरी अमावस्या के संयोग पर श्रद्धा और आस्था का अनूठा संगम देखने को मिला। पितृ पक्ष के अंतिम दिन सुबह से ही सिद्धवट, रामघाट, नीलगंगा सरोवर और केडी पैलेस घाट सहित प्रमुख तीर्थ स्थलों पर श्रद्धालुओं की भीड़ उमड़ पड़ी। लोगों ने अपने पितरों की शांति और मोक्ष की कामना से तर्पण, पिंडदान और स्नान किया। शनिश्चरी अमावस्या के अवसर पर श्रद्धालुओं ने शिप्रा नदी में आस्था की डुबकी लगाने के साथ शनि मंदिरों में दर्शन-पूजन भी किया।

सिद्धवट और रामघाट पर पितृ तर्पण
सर्वपितृ अमावस्या के अवसर पर उज्जैन के प्रसिद्ध सिद्धवट घाट और रामघाट पर सुबह से ही श्रद्धालुओं का तांता लगा रहा। दूर-दराज से पहुंचे लोगों ने विधि-विधान से तर्पण और पिंडदान कर अपने पूर्वजों का स्मरण किया। केडी पैलेस घाट और अन्य तटीय क्षेत्रों में भी बड़ी संख्या में श्रद्धालु पितरों की शांति के लिए धार्मिक अनुष्ठान करते नजर आए। धार्मिक मान्यता के अनुसार, सिद्धवट पर पितृ कर्म करने से पूर्वजों को तृप्ति और मुक्ति मिलती है।

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नीलगंगा सरोवर पर 11वें वर्ष हुआ निःशुल्क तर्पण आयोजन
नीलगंगा सरोवर पर संस्था 'तेरा तुझको अर्पण' की ओर से लगातार 11वें वर्ष विशाल पितृ तर्पण एवं श्राद्ध कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम संयोजक दिलीप शर्मा के मार्गदर्शन और आचार्य पं. नलिन शर्मा के आचार्यत्व में श्रद्धालुओं ने विधि-विधान से पितरों का तर्पण किया।
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आयोजन की खास बात यह रही कि श्रद्धालुओं को तर्पण के लिए जल, तिल, कुशा और पुष्प सहित सभी आवश्यक सामग्री निःशुल्क उपलब्ध कराई गई। संस्था की ओर से किसी प्रकार का दान-पात्र भी नहीं रखा गया। पदाधिकारियों ने बताया कि यह सेवा केवल श्राद्ध पक्ष तक सीमित नहीं है, बल्कि प्रत्येक माह की अमावस्या पर भी नीलगंगा सरोवर में तर्पण और पूजन कराया जाता है।

संस्था के अनुसार, स्कंद पुराण और गरुड़ पुराण में नीलगंगा सरोवर पर तर्पण का विशेष महत्व बताया गया है। धार्मिक मान्यता के अनुसार, यहां तर्पण करने से पितरों को शांति मिलती है। आयोजन को सफल बनाने में धनंजय शर्मा, मुकेश खंडेलवाल, देवेंद्र पुरोहित, मनोहर राठौर और हरीश शर्मा सहित संस्था की पूरी टीम जुटी रही।



शनिश्चरी अमावस्या पर शिप्रा में स्नान
शनिवार को अमावस्या होने के कारण श्रद्धालुओं ने इसे शनिश्चरी अमावस्या के रूप में भी मनाया। शिप्रा नदी के विभिन्न घाटों पर सुबह से ही स्नान के लिए बड़ी संख्या में लोग पहुंचे। श्रद्धालुओं की सुविधा के लिए प्रशासन ने नदी में पर्याप्त जल स्तर बनाए रखने की व्यवस्था की। इसके तहत पाइपलाइन के माध्यम से नर्मदा का पानी भी शिप्रा में प्रवाहित किया गया। त्रिवेणी शनि मंदिर सहित अन्य शनि मंदिरों में भी सुबह से भक्तों की कतारें लगी रहीं। श्रद्धालुओं ने शनि देव के दर्शन कर तेल, तिल, काले उड़द और पुष्प अर्पित किए।

गजछाया योग को लेकर भी रही विशेष आस्था
ज्योतिषाचार्यों के अनुसार, इस बार सर्वपितृ अमावस्या पर शनिवार के साथ गजछाया योग का संयोग भी बना। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस योग में तर्पण, दान-पुण्य और नदी में स्नान करने का विशेष महत्व है। इसी मान्यता के चलते उज्जैन के प्रमुख घाटों और धार्मिक स्थलों पर सुबह से ही श्रद्धालुओं की भीड़ और आध्यात्मिक उत्साह देखने को मिला।

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