MP News: विशाल मिश्रा की प्रस्तुति, ड्रोन-लेजर शो के संग आतिशबाजी, CM बोले-अब दुनिया देखेगी संस्कृति का वैभव
उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के तहत गुड़ी पड़वा पर सृष्टि आरम्भ उत्सव आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रम संवत 2083 के स्वागत, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और शहर के धार्मिक व औद्योगिक विकास पर जोर दिया। कार्यक्रम में ड्रोन शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पुस्तकों का विमोचन हुआ।
उज्जैन में विक्रमोत्सव 2026 के तहत गुड़ी पड़वा पर सृष्टि आरम्भ उत्सव आयोजित हुआ। मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रम संवत 2083 के स्वागत, सिंहस्थ 2028 की तैयारियों और शहर के धार्मिक व औद्योगिक विकास पर जोर दिया। कार्यक्रम में ड्रोन शो, सांस्कृतिक प्रस्तुतियां और पुस्तकों का विमोचन हुआ।
विस्तार
धार्मिक नगरी उज्जैन को परमात्मा ने विशेष रूप से धन्य बनाया है। जो भी व्यक्ति यहां आता है, उसका जीवन संवर जाता है। मां शिप्रा के पावन तट पर बसी यह नगरी अनादिकाल से अस्तित्व में है और हर युग में इसकी महिमा अक्षुण्ण रही है। उज्जैन, जिसे प्राचीन काल में अवंतिका और उज्जयिनी कहा जाता था, 12 ज्योतिर्लिंगों में से एक श्री महाकालेश्वर का धाम है। वर्ष प्रतिपदा के इस विशेष दिन विक्रम संवत 2083 के आगमन का उल्लास पूरे शहर में देखने को मिला।
यह उद्बोधन मुख्यमंत्री डॉ. मोहन यादव ने विक्रमोत्सव 2026 के अंतर्गत रामघाट पर आयोजित सृष्टि आरम्भ उत्सव में दिया। उन्होंने कहा कि आज जब दुनिया आधुनिक तकनीकों जैसे ड्रोन का उपयोग युद्ध में कर रही है, वहीं उज्जैन में ड्रोन तकनीक के माध्यम से देवी-देवताओं की झलक प्रस्तुत कर आस्था और संस्कृति का अनूठा संगम दिखाया जा रहा है। यह सनातन संस्कृति की वैश्विक स्वीकृति का प्रतीक है। मुख्यमंत्री ने कहा कि करीब दो हजार वर्ष पूर्व उज्जैन के महान सम्राट विक्रमादित्य ने विदेशी आक्रांताओं को परास्त कर राष्ट्र की रक्षा की और सुशासन की मिसाल कायम की। उनका 32 पुतलियों वाला सिंहासन, नवरत्नों की विद्वता, वीरता और दानशीलता आज भी प्रेरणा का स्रोत है। इसी गौरवगाथा को पुनर्जीवित करते हुए पूरे प्रदेश में विक्रमोत्सव 2026 का आयोजन किया जा रहा है। यह उत्सव न केवल संस्कृति का उत्सव है, बल्कि सुशासन और प्रशासनिक आदर्शों की पुनर्स्थापना का प्रतीक भी है। उन्होंने बताया कि आगामी सिंहस्थ 2028 की तैयारियां भी जोर-शोर से चल रही हैं। उज्जैन को जोड़ने वाले मार्गों को फोरलेन और सिक्सलेन बनाया जा रहा है, वहीं मां शिप्रा के तट पर लगभग 30 किलोमीटर लंबे नए घाट विकसित किए जा रहे हैं।
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मुख्यमंत्री ने कहा कि उज्जैन को व्यापार और उद्योग की दृष्टि से भी विकसित किया जा रहा है। विक्रम उद्योगपुरी और मेडिकल डिवाइस पार्क जैसे प्रोजेक्ट तेजी से आगे बढ़ रहे हैं। 12,500 एकड़ का औद्योगिक क्षेत्र विकसित हो चुका है और अतिरिक्त 5,000 एकड़ में नया पार्क तैयार किया जा रहा है। साथ ही नए एयरपोर्ट और हेलीकॉप्टर सेवाओं की योजना तीर्थाटन को नई ऊंचाई देगी। आने वाले समय में उज्जैन धार्मिक ही नहीं, बल्कि सांस्कृतिक, औद्योगिक और वैश्विक पहचान का केंद्र बनेगा। मुख्यमंत्री के मुख्य आतिथ्य में 19 मार्च को गुड़ी पड़वा एवं सृष्टि आरम्भ उत्सव के अवसर पर रामघाट और दत्त अखाड़ा घाट पर भव्य कार्यक्रम आयोजित किया गया। कार्यक्रम की शुरुआत सांस्कृतिक प्रस्तुतियों से हुई, जिसके बाद प्रसिद्ध पार्श्वगायक विशाल मिश्रा ने अपनी प्रस्तुति से श्रद्धालुओं को मंत्रमुग्ध कर दिया। हजारों की संख्या में उपस्थित लोगों ने नववर्ष का उत्साहपूर्वक स्वागत किया।
कार्यक्रम का मुख्य आकर्षण ड्रोन शो, लेजर शो और आतिशबाजी रही, जिसने शिप्रा तट के आकाश को रोशनी और रंगों से भर दिया। ड्रोन शो के माध्यम से धार्मिक एवं सांस्कृतिक संदेशों का आकर्षक प्रदर्शन किया गया। इस अवसर पर मुख्यमंत्री ने महाराजा विक्रमादित्य शोधपीठ का विक्रम पंचांग 2083, संस्कृति संचालनालय का कला पंचांग, बिमल कृष्ण दास की ‘84 महादेव’, रामस्वरूप दास की ‘ओरछाधीश’, वीर भारत न्यास के महर्षि अत्रि, महर्षि अंगिरा, धनवंतरी, महर्षि अगस्त्य और भरतमुनि पर आधारित ‘भारत निधि’ मोनोग्राफ, साथ ही अष्टावक्र गीता, नारद गीता, ब्राह्मण गीता, गर्भ गीता और उत्तर गीता का विमोचन किया।

मुख्यमंत्री मोहन यादव

मुख्यमंत्री ने नौका विहार भी किया

ड्रोन और लेजर शो के दौरान उकेरी गई आकृति
