बड़नगर विस्फोट मामला हाईकोर्ट पहुंचा, NIA-CBI जांच की मांग; धार्मिक जुलूसों के लिए SOP बनाने की भी उठी मांग
उज्जैन के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से लटकाई गई वैन में हुए कथित विस्फोट का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। जनहित याचिका में NIA या CBI जांच, दोषियों पर कड़ी कार्रवाई और भविष्य में धार्मिक जुलूसों के लिए सुरक्षा संबंधी SOP लागू करने की मांग की गई है।
विस्तार
उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस के दौरान क्रेन से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाई गई वैन में हुए कथित विस्फोट का मामला अब मध्यप्रदेश हाईकोर्ट पहुंच गया है। घटना का वीडियो वायरल होने के बाद पूरे प्रदेश में चर्चा छिड़ गई थी। अब इस मामले में जनहित याचिका दायर कर राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) या केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) से जांच कराने की मांग की गई है। साथ ही भविष्य में धार्मिक जुलूसों के दौरान सुरक्षा सुनिश्चित करने के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) लागू करने की मांग भी उठाई गई है।
हाईकोर्ट में दायर हुई जनहित याचिका
मोहर्रम जुलूस के दौरान हुए कथित विस्फोट मामले को लेकर हिंदू जागरण मंच के जिला संयोजक सुमित हार्डिया ने इंदौर स्थित मध्यप्रदेश हाईकोर्ट की खंडपीठ में जनहित याचिका दायर की है। याचिकाकर्ता की ओर से अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने अदालत में पक्ष रखते हुए मामले की स्वतंत्र, निष्पक्ष और उच्च स्तरीय जांच कराने की मांग की।
NIA या CBI से जांच कराने की मांग
याचिका में कहा गया है कि यदि यह मामला विस्फोटक पदार्थ अधिनियम के तहत अनुसूचित अपराध की श्रेणी में आता है तो इसकी जांच राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) से कराई जानी चाहिए। वैकल्पिक रूप से मामले की जांच केंद्रीय जांच ब्यूरो (CBI) को सौंपने की भी मांग की गई है। याचिकाकर्ता का कहना है कि घटना की गंभीरता को देखते हुए निष्पक्ष जांच के लिए केंद्रीय एजेंसी की जरूरत है।
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धार्मिक जुलूसों के लिए SOP बनाने की मांग
जनहित याचिका में केवल जांच की मांग ही नहीं की गई है, बल्कि भविष्य में ऐसी घटनाओं की पुनरावृत्ति रोकने के लिए राज्य सरकार से धार्मिक जुलूसों के लिए विस्तृत मानक संचालन प्रक्रिया (SOP) तैयार करने का आग्रह भी किया गया है। याचिका में सुरक्षा मानकों, अनुमति प्रक्रिया, जोखिम प्रबंधन और भीड़ नियंत्रण को लेकर स्पष्ट दिशा-निर्देश तय करने की मांग की गई है।
'मॉक ड्रिल' एंगल की भी जांच कराने की मांग
याचिकाकर्ता ने अदालत से यह भी आग्रह किया है कि जांच एजेंसियां यह पता लगाएं कि कहीं यह पूरा घटनाक्रम किसी कथित मॉक ड्रिल का हिस्सा तो नहीं था। उनका कहना है कि इस पहलू की भी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए, ताकि घटना से जुड़े सभी तथ्य सामने आ सकें।
राज्य सरकार को हाईकोर्ट ने दिया एक सप्ताह का समय
मामले की प्रारंभिक सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को जवाब दाखिल करने और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए एक सप्ताह का समय दिया है। अब अदालत अगले सप्ताह इस जनहित याचिका पर सुनवाई करेगी। सभी पक्षों की दलीलें सुनने के बाद आगे की कार्रवाई तय की जाएगी।
क्या है पूरा मामला?
दरअसल, 23-24 जून की दरम्यानी रात उज्जैन जिले के बड़नगर में मोहर्रम जुलूस निकाला जा रहा था। इसी दौरान एक वैन को क्रेन की मदद से करीब 40 फीट ऊंचाई पर लटकाया गया और उसमें विस्फोट किया गया। विस्फोट के बाद वैन के कांच और लोहे के टुकड़े नीचे मौजूद भीड़ की ओर गिरे, जहां बड़ी संख्या में लोग मौजूद थे। घटना का वीडियो सोशल मीडिया पर वायरल होने के बाद मामला सुर्खियों में आ गया था।
तीन आरोपी गिरफ्तार, NSA के तहत भी हुई कार्रवाई
घटना के बाद पुलिस ने जांच शुरू करते हुए शोएब, जाहिद और तपसील उर्फ तस्लीम को गिरफ्तार किया था। जांच के दौरान मामले को गंभीर मानते हुए तीनों आरोपियों के खिलाफ राष्ट्रीय सुरक्षा अधिनियम (NSA) के तहत भी कार्रवाई की गई। बाद में उन्हें केंद्रीय जेल भेरूगढ़ भेज दिया गया।
याचिका में क्या कहा गया?
याचिकाकर्ता सुमित हार्डिया की ओर से अधिवक्ता जायेश गुरनानी ने अदालत में तर्क दिया कि यदि यह मामला विस्फोटक पदार्थ अधिनियम, 1908 के तहत अपराध की श्रेणी में आता है, तो राष्ट्रीय जांच एजेंसी अधिनियम, 2008 के अनुसार यह अनुसूचित अपराध माना जाएगा। ऐसी स्थिति में इसकी जांच NIA द्वारा कराई जानी चाहिए। वैकल्पिक रूप से CBI जांच की मांग भी की गई है।
याचिका में दोषियों के खिलाफ कड़ी वैधानिक कार्रवाई करने तथा भविष्य में धार्मिक जुलूसों के दौरान ऐसी घटनाएं रोकने के लिए शासन स्तर पर व्यापक SOP तैयार करने की भी मांग की गई है। सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अतिरिक्त महाधिवक्ता राहुल सेठी उपस्थित हुए और आवश्यक निर्देश प्राप्त करने के लिए समय मांगा। हाईकोर्ट ने राज्य सरकार को एक सप्ताह का समय देते हुए मामले को अगले सप्ताह सुनवाई के लिए सूचीबद्ध
