उज्जैन में आज से पितृपक्ष शुरू: गया कोठा से सिद्धवट तक उमड़े श्रद्धालु, 20 साल बाद बना दुर्लभ संयोग
उज्जैन को उत्तर भारत का गया माना जाता है, जहाँ गया कोठा, पवित्र शिप्रा तट स्थित रामघाट और वटवृक्ष की छत्रछाया वाले सिद्धवट पर पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म का विशेष धार्मिक महत्व है।
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मोक्षदायिनी अवंतिका नगरी उज्जैन में शनिवार से 16 दिवसीय पितृपक्ष (श्राद्ध पक्ष) शुरू हो गया है। पूर्वजों की आत्मा की शांति, तृप्ति और आशीर्वाद की कामना को लेकर देश-विदेश से श्रद्धालु उज्जैन पहुंच रहे हैं। उज्जैन को उत्तर भारत का गया माना जाता है। यहां गया कोठा, पवित्र शिप्रा तट स्थित रामघाट और वटवृक्ष की छत्रछाया वाले सिद्धवट पर पिंडदान, तर्पण और श्राद्ध कर्म का विशेष धार्मिक महत्व है।
इन पवित्र स्थलों का है विशेष धार्मिक महत्व
गया कोठा: पौराणिक मान्यताओं के अनुसार, गया जी की तरह ही उज्जैन के गया कोठा क्षेत्र में पिंडदान करने से पितरों को मोक्ष की प्राप्ति होती है और पितृदोष से मुक्ति मिलती है।
रामघाट: मान्यता है कि भगवान श्रीराम ने अपने पिता राजा दशरथ का तर्पण और श्राद्ध इसी पवित्र घाट पर किया था। यहां शिप्रा नदी के जल से तर्पण करने का विशेष महत्व माना जाता है।
सिद्धवट: अमर वटवृक्ष के रूप में पूजित सिद्धवट पर पूर्वजों के निमित्त पिंडदान और जलांजलि देने से अक्षय पुण्य की प्राप्ति की मान्यता है।
20 साल बाद दुर्लभ संयोग, इस बार 16 नहीं 15 दिन का होगा पितृपक्ष
बाबा गुमानदेव हनुमान गढ़ी के प्रसिद्ध ज्योतिषाचार्य पं. चंदन श्यामनारायण व्यास के अनुसार, इस वर्ष पितृपक्ष में दुर्लभ संयोग बन रहा है। तिथियों के क्षय के कारण इस बार पितृपक्ष 16 की जगह 15 दिनों का होगा। 1 अक्टूबर को पंचमी और षष्ठी तिथि का श्राद्ध एक ही दिन किया जाएगा। पंचमी तिथि दोपहर 12:36 बजे तक रहेगी, इसके बाद षष्ठी तिथि शुरू हो जाएगी। ऐसे में इस दिन दोनों तिथियों के श्राद्ध किए जाएंगे।
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ज्योतिषाचार्य के अनुसार, करीब 20 वर्षों बाद ऐसा संयोग बना है, जब पितृपक्ष की शुरुआत शनिवार, 26 सितंबर से हो रही है और इसका समापन भी शनिवार, 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ होगा। धार्मिक मान्यता के अनुसार, इस अवधि में पितरों के तर्पण के साथ शनिदेव के निमित्त काले तिल और तेल का दान करने से शनि की साढ़ेसाती, ढैया और पितृदोष से जुड़ी बाधाओं से मुक्ति मिलती है।
पितृपक्ष 2026: श्राद्ध तिथियों की सूची
| तारीख | दिन | श्राद्ध |
|---|---|---|
| 26 सितंबर | शनिवार | पूर्णिमा श्राद्ध |
| 27 सितंबर | रविवार | प्रतिपदा श्राद्ध |
| 28 सितंबर | सोमवार | द्वितीया श्राद्ध |
| 29 सितंबर | मंगलवार | तृतीया श्राद्ध |
| 30 सितंबर | बुधवार | चतुर्थी श्राद्ध |
| 1 अक्टूबर | गुरुवार | पंचमी + षष्ठी श्राद्ध |
| 2 अक्टूबर | शुक्रवार | सप्तमी श्राद्ध |
| 3 अक्टूबर | शनिवार | अष्टमी श्राद्ध |
| 4 अक्टूबर | रविवार | मातृ नवमी |
| 5 अक्टूबर | सोमवार | दशमी श्राद्ध |
| 6 अक्टूबर | मंगलवार | एकादशी श्राद्ध |
| 7 अक्टूबर | बुधवार | द्वादशी श्राद्ध |
| 8 अक्टूबर | गुरुवार | त्रयोदशी श्राद्ध |
| 9 अक्टूबर | शुक्रवार | चतुर्दशी श्राद्ध |
| 10 अक्टूबर | शनिवार | सर्वपितृ अमावस्या |
4 अक्टूबर को मातृ नवमी पर माता, दादी और नानी के निमित्त विशेष श्राद्ध किया जाता है। 7 अक्टूबर को साधु-संतों और संन्यासियों का श्राद्ध, 8 अक्टूबर को अल्पायु या बच्चों का श्राद्ध तथा 9 अक्टूबर को दुर्घटना, अकाल मृत्यु या शस्त्र से मृत व्यक्तियों का श्राद्ध किया जाता है। 10 अक्टूबर को सर्वपितृ अमावस्या के साथ पितृपक्ष का समापन होगा। शास्त्रीय मान्यता के अनुसार, जिन लोगों को अपने पूर्वजों की मृत्यु तिथि ज्ञात नहीं है, वे सर्वपितृ अमावस्या के दिन पिंडदान और तर्पण कर सकते हैं।
