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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain: Mahant Vikramnath termed appointment of priest at Pir Matsyendranath Samadhi as illegal.

Ujjain: पीर मत्स्येंद्रनाथ समाधि पर पुजारी नियुक्ति का विरोध, महंत विक्रमनाथ ने बताया अवैधानिक, जानें वजह

Sun, 10 Nov 2024 06:20 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sun, 10 Nov 2024 06:20 PM IST
सार

नाथ संप्रदाय की परंपरा के अनुसार पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर सेवा-पूजा का अधिकार केवल नाथ संप्रदाय के महंतों का रहा है। परंपरा का पालन करते हुए महंत योगी विक्रमनाथ ने यहां की सेवा-पूजा की जिम्मेदारी निभाई है। हाल ही में योगी विक्रमनाथ ने एक बाहरी व्यक्ति को समाधि स्थल पर पुजारी नियुक्त किए जाने को अवैधानिक बताते हुए इस पर आपत्ति जताई है। उन्होंने प्रशासन से इस नियुक्ति को निरस्त करने की मांग की है।

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Ujjain: Mahant Vikramnath termed appointment of priest at Pir Matsyendranath Samadhi as illegal.
महंत विक्रमनाथ ने पुजारी की नियुक्ति पर ऐतराज जताया है। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

उज्जैन में स्थित पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर पुजारी की नियुक्ति का मामला विवादों में घिरता नजर आ रहा है। इसका विरोध सामने आने लगा है। मामले में शासन की ओर से कोई जवाब नहीं आया है। 

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बताया जा रहा है कि पीर मत्स्येंद्रनाथ की समाधि पर वर्षों से नाथ संप्रदाय के साधु-संत और महंत सेवा-पूजा करते आ रहे हैं। वर्तमान में इस समाधि की सेवा-पूजा महंत योगी विक्रमनाथ, जो गुरु योगी पीर महंत रामनाथ महाराज भर्तृहरि गुफा के पीठाधीश्वर हैं, के मार्गदर्शन में हो रही है। योगी विक्रमनाथ ने हाल ही में शासन-प्रशासन द्वारा इस स्थल पर अनुराग शुक्ला नामक व्यक्ति को पुजारी नियुक्त किए जाने पर आपत्ति जताई है, इसे अवैधानिक बताया है।
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महंत विक्रमनाथ का कहना है कि नाथ संप्रदाय के नियमों के अनुसार, यहां केवल उसी संप्रदाय के व्यक्ति ही सेवा-पूजा कर सकते हैं। उन्होंने दावा किया कि शुक्ला न तो नाथ संप्रदाय से हैं और न ही उन्होंने इसकी दीक्षा ली है। बताया जा रहा है कि शुक्ला ने अपनी नियुक्ति के लिए सरकारी अधिकारियों को भ्रमित करते हुए गलत दस्तावेज प्रस्तुत किए। उन्होंने यह दावा किया कि उनके दादा रामप्रसाद शुक्ला इस समाधि पर पूजा करते थे, जबकि वास्तव में उनके दादा 1992 में जीवाजीगंज पुलिस थाने के तहत यहां सुरक्षा में तैनात थे और सरकारी नौकरी में थे। हालांकि, बाद में वे समाधि पर भक्ति-भाव से आते रहे, लेकिन इससे उन्हें पुजारी नियुक्ति का अधिकार नहीं मिलता।
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योगी विक्रमनाथ ने इस नियुक्ति को रद्द करने के लिए प्रशासन को लिखित आपत्ति पत्र सौंपा है और निष्पक्ष जांच की मांग की है। उन्होंने शासन से अपील की है कि इस विवादास्पद नियुक्ति के सभी तथ्यों और पुराने रिकॉर्डों की जांच कर सही तथ्यों को सामने लाया जाए। फिलहाल, मामले में शासन-प्रशासन से उचित कार्रवाई की प्रतीक्षा की जा रही है। 

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