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Ujjain News: हाथ में मोदक लिए तो कहीं नृत्य करते गजानंद, त्रिवेणी संग्रहालय में हैं बप्पा की दुर्लभ प्रतिमाएं

Sat, 30 Aug 2025 11:02 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sat, 30 Aug 2025 11:02 AM IST
सार

संग्रहालय में मौजूद ये प्रतिमाएं शहडोल, पन्ना, शिवपुरी, टीकमगढ़ और रायसेन जिलों से प्राप्त हुई हैं, जिनमें 8वीं से 12वीं शताब्दी की मूर्तियां शामिल हैं। खास तौर पर उज्जैन की खुदाई से मिली प्रतिमाएं, रायसेन से लाई गई नृत्यरत गणेश प्रतिमा और शिवपुरी से प्राप्त सर्प की यज्ञोपवीत धारण किए गणेश की मूर्ति विशेष आकर्षण हैं।

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Ujjain News: Thousand year old rare statues of Bappa in Triveni Museum
गणेश जी की दुर्लभ प्रतिमाएं। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

देशभर में गणेशोत्सव का मनाया जा रहा है। उज्जैन में भी गणेश पर्व को लेकर अच्छी खासी तैयारियां की गई हैं। ऐसे में उज्जैन के देवालय के साथ त्रिवेणी संग्रहालय में मौजूद भगवान गणेश की उन दुर्लभ मूर्तियों के दर्शन कराने जा रहा हैं, जो लगभग एक हजार साल पुरानी हैं।
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श्री गणेश की दुर्लभ प्रतिमाएं
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त्रिवेणी संग्रहालय के राहुल सांखला ने बताया वर्तमान में त्रिवेणी पुरातत्व संग्रहालय में भगवान गणेश और अन्य देवी देवताओं की मूर्तियां मौजूद हैं। यहां भगवान गणेश की कई दुर्लभ और अद्भुत मूर्तियां हैं, जिसमें दो मूर्तियां उज्जैन से और शेष मूर्तियां प्रदेश के शहडोल, पन्ना, शिवपुरी, टीकमगढ़ और रायसेन जिले से लाई गई हैं। इसमें 8वीं और 10वीं शताब्दी के पहले की मूर्तियां मौजूद हैं, जो आज लगभग 1200 साल पुरानी हैं। इन मूर्तियों में भगवान गणेश की दो मूर्ति उज्जैन में 12वीं शताब्दी में खुदाई के दौरान मिली थी। इसके अलावा यहां प्रदर्शित भगवान गणेश की एक नृत्य करती प्रतिमा भी हैं, जो रायसेन से यहां लाई गई हैं। इसी प्रकार सर्प की यज्ञोपवीत धारण किए गणेश की दुर्लभ मूर्ति के दर्शन भी यहां किए जा सकते हैं। यह दुर्लभ मूर्ति शिवपुरी के केलघर में खुदाई के दौरान मिली हैं। त्रिवेणी संग्रहालय में मौजूद भगवान गणेश की सभी मूर्तियां अत्यंत ही दुर्लभ हैं। इसकी नक्काशी इतनी शानदार की गई है कि मूर्तियों को देखते ही मन प्रफुल्लित हो जाएगा।
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श्री गणेश की दुर्लभ प्रतिमाएं

हाथ में मोदक लिए गणेश
11वीं सदी की यह लंबोदर की मूर्ति पन्ना से प्राप्त हुई है। गणेश भगवान की यह सुन्दर प्रतिमा ललितासन में दिखायी गई है। जिसमें उनके ऊपरी बांये हाथ में दंत  निचले हाथ में मोदक पात्र है। गजमुख गणेश की यह प्रतिमा चन्देल कला की महत्वपूर्ण कलाकृति है। जिसमें भावपक्ष एवं कालपक्ष दोनों के समन्वय का प्रयास किया गया है।

श्री गणेश की दुर्लभ प्रतिमाएं

नृत्य करते गजानंद
आशापुरी जिला रायसेन से प्राप्त गणेश की इस प्रतिमा में उन्हें नृत्यरत दिखाया गया है। इस प्रतिमा का गुख्य आकर्षण गणेश के नृत्य में लय मिलाते तथा झांझ बजाते गणों का अंकन है इस प्रकार कलाकार ने इस प्रतिमा के माध्यम से नृत्य एवं वादन कला का नैसर्गिक सामन्जस्य स्थापित किया है। लगभग 10वीं शताब्दी की यह प्रतिमा पूर्वी मालवा में प्रतीहार-परमार संक्रमणकालीन कलाशैली की अनुपम कृति है।
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