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इंदौर: 160 पेड़ों और सैकड़ों पक्षियों पर हाईकोर्ट ने सुरक्षित रखा फैसला, मेट्रो के लिए होना है कटाई
Wed, 23 Sep 2026 07:46 AM IST
Arjun Richhariya
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, इंदौर
Published by: Arjun Richhariya
Updated Wed, 23 Sep 2026 07:46 AM IST
सार
इंदौर के रानी सराय में मेट्रो स्टेशन निर्माण हेतु 160 पेड़ों की कटाई और पक्षियों के आवास पर असर को लेकर मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने सुनवाई के बाद आदेश सुरक्षित रखा। द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी ने स्वतंत्र वैज्ञानिक सर्वे की मांग की है।
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इंदौर हाईकोर्ट मे लगी याचिका
विस्तार
मध्य प्रदेश हाईकोर्ट की इंदौर पीठ ने रानी सराय क्षेत्र में प्रस्तावित भूमिगत मेट्रो स्टेशन निर्माण से जुड़े एक महत्वपूर्ण पर्यावरणीय मामले में सुनवाई पूरी करने के बाद अपना फैसला सुरक्षित रख लिया है। यह मामला पेड़ों को हटाने और उनसे जुड़े पक्षियों के प्राकृतिक आवास को होने वाले नुकसान से संबंधित है।
रानी सराय परिसर में 160 पुराने पेड़ों को हटाने का मुद्दा
द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी के अध्यक्ष पद्मश्री भालू मोंढे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखा। आवेदन में संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए रानी सराय क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए लगभग 160 पुराने एवं परिपक्व पेड़ों को हटाए जाने की संभावित कार्रवाई पर चिंता जताई गई है। संस्था ने इन पेड़ों पर निर्भर पक्षियों के प्राकृतिक आवास और शहरी जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि कई पेड़ों पर रोज-रिंग्ड पैराकीट यानी हरे तोते और उनके घोंसले मौजूद हैं।
एक दिवसीय सर्वे पर आपत्ति और वैज्ञानिक मूल्यांकन की मांग
सुनवाई के दौरान पक्षियों के प्राकृतिक आवास के सही मूल्यांकन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ता संस्था का तर्क था कि केवल एक दिन के निरीक्षण के आधार पर किसी क्षेत्र के समग्र पक्षी आवास के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। संस्था ने मांग की कि पुराने पेड़ों में मौजूद प्राकृतिक खोखलों और घोंसलों के स्थलों का गहन सर्वे कराया जाए तथा इसके लिए किसी स्वतंत्र पक्षी विशेषज्ञ या एवियन इकोलॉजिस्ट की सेवाएं ली जानी चाहिए।
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परिपक्व पेड़ों का पारिस्थितिक महत्व
याचिका में पुराने और परिपक्व पेड़ों के पर्यावरणीय योगदान पर बल दिया गया। संस्था के अनुसार, ये पेड़ केवल हरियाली का साधन नहीं हैं, बल्कि पक्षियों को छाया, आश्रय, भोजन और प्रजनन के लिए प्राकृतिक स्थल प्रदान करते हैं। पेड़ों में दशकों में बनने वाली प्राकृतिक गुफाओं और खोखलों की भरपाई नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती। इसलिए किसी भी पेड़ को हटाने से पूर्व उसके पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक वैज्ञानिक आकलन अनिवार्य होना चाहिए।
दोनों पक्षों की बहस पूरी, अब आदेश का इंतजार
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले से जुड़े सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। अदालत के आने वाले फैसले से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई, पक्षियों के संरक्षण और हस्तक्षेप आवेदन में उठाए गए पर्यावरणीय प्रश्नों पर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
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रानी सराय परिसर में 160 पुराने पेड़ों को हटाने का मुद्दा
द नेचर वॉलंटियर्स सोसायटी के अध्यक्ष पद्मश्री भालू मोंढे की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता ने हस्तक्षेप आवेदन प्रस्तुत कर अपना पक्ष रखा। आवेदन में संयुक्त निरीक्षण रिपोर्ट का हवाला देते हुए रानी सराय क्षेत्र में मेट्रो स्टेशन के निर्माण के लिए लगभग 160 पुराने एवं परिपक्व पेड़ों को हटाए जाने की संभावित कार्रवाई पर चिंता जताई गई है। संस्था ने इन पेड़ों पर निर्भर पक्षियों के प्राकृतिक आवास और शहरी जैव विविधता पर पड़ने वाले प्रतिकूल प्रभावों को अदालत के समक्ष प्रस्तुत किया। विशेष रूप से यह उल्लेख किया गया कि कई पेड़ों पर रोज-रिंग्ड पैराकीट यानी हरे तोते और उनके घोंसले मौजूद हैं।
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एक दिवसीय सर्वे पर आपत्ति और वैज्ञानिक मूल्यांकन की मांग
सुनवाई के दौरान पक्षियों के प्राकृतिक आवास के सही मूल्यांकन का मुद्दा प्रमुखता से उठाया गया। याचिकाकर्ता संस्था का तर्क था कि केवल एक दिन के निरीक्षण के आधार पर किसी क्षेत्र के समग्र पक्षी आवास के संबंध में अंतिम निष्कर्ष निकालना वैज्ञानिक रूप से उचित नहीं है। संस्था ने मांग की कि पुराने पेड़ों में मौजूद प्राकृतिक खोखलों और घोंसलों के स्थलों का गहन सर्वे कराया जाए तथा इसके लिए किसी स्वतंत्र पक्षी विशेषज्ञ या एवियन इकोलॉजिस्ट की सेवाएं ली जानी चाहिए।
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परिपक्व पेड़ों का पारिस्थितिक महत्व
याचिका में पुराने और परिपक्व पेड़ों के पर्यावरणीय योगदान पर बल दिया गया। संस्था के अनुसार, ये पेड़ केवल हरियाली का साधन नहीं हैं, बल्कि पक्षियों को छाया, आश्रय, भोजन और प्रजनन के लिए प्राकृतिक स्थल प्रदान करते हैं। पेड़ों में दशकों में बनने वाली प्राकृतिक गुफाओं और खोखलों की भरपाई नए पौधे लगाकर तुरंत नहीं की जा सकती। इसलिए किसी भी पेड़ को हटाने से पूर्व उसके पर्यावरणीय प्रभाव का व्यापक वैज्ञानिक आकलन अनिवार्य होना चाहिए।
दोनों पक्षों की बहस पूरी, अब आदेश का इंतजार
हाईकोर्ट की खंडपीठ ने मामले से जुड़े सभी पक्षों की विस्तृत दलीलें सुनने के बाद अपना आदेश सुरक्षित कर लिया है। अदालत के आने वाले फैसले से यह स्पष्ट हो सकेगा कि पेड़ों की कटाई, पक्षियों के संरक्षण और हस्तक्षेप आवेदन में उठाए गए पर्यावरणीय प्रश्नों पर क्या दिशा-निर्देश जारी किए जाते हैं।
