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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Ujjain News ›   In the Mahasammelan Yatra, the National President raised questions on the subsidy of Haj pilgrimage

Ujjain News: महासंगम यात्रा पहुंची उज्जैन, राष्ट्रीय अध्यक्ष ने हज यात्रा के सब्सिडी पर उठाए सवाल; जानें

Sat, 15 Feb 2025 04:26 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Sat, 15 Feb 2025 04:26 PM IST
सार

12 ज्योतिर्लिंग और 4 धामों का पवित्र सफर यह यात्रा 23 जनवरी 2025 को दिल्ली से शुरू होकर 24 फरवरी 2025 को दिल्ली में समाप्त होगी। महाकुंभ में 108 त्रिशूलों के जलाभिषेक से यात्रा की शुरुआत हुई, जिन्हें 108 शिव मंदिरों में स्थापित किया जाएगा।

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In the Mahasammelan Yatra, the National President raised questions on the subsidy of Haj pilgrimage
राष्ट्रीय अध्यक्ष - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

25 जनवरी को प्रयागराज महाकुंभ से महासंगम यात्रा की शुरुआत महामंडलेश्वर, साधु संत और प्रबुद्धजनों की उपस्थिति में 108 त्रिशूल के साथ की गई थी। यह यात्रा 12 ज्योतिर्लिंग और चार धाम होते हुए 21 फरवरी को दिल्ली पहुंचेगी। जहां इस यात्रा का समापन होगा। यात्रा के समापन के पहले आज यात्रा में शामिल लगभग 80 श्रद्धालु विश्व प्रसिद्ध श्री महाकालेश्वर मंदिर पहुंचे। जहां भगवान के पूजन अर्चन के बाद उन्होंने अपनी यात्रा का उद्देश्य बताया और फिर अपने अगले गंतव्य की ओर चल पड़े।
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अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद एवं भगवा एप के द्वारा 21 दिनों से महासंगम यात्रा निकाली जा रही है। इस यात्रा का मुख्य उद्देश्य 181 संस्कृत विद्यालय को अधिग्रहित कर यहां पुजारियों को कौशल विकास से जोड़कर सभी भाषाओं का ज्ञान करवाना है। इसके साथ ही देश के 108 मंदिरों के पुनरउत्थान का कार्य भी इस यात्रा के माध्यम से किया जाएगा। जिन शिवालयों की वर्तमान में उपेक्षा की जा रही है। यात्रा में शामिल अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव ने बताया कि इस यात्रा के साथ ही हमारा मुख्य उद्देश्य 100 हिंदू तीर्थ को सरकारीकरण से मुक्त करना है।
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वर्तमान में इन मंदिरों का संचालन सरकार के एसडीएम और तहसीलदार करते हैं, जबकि इनके संचालन का जिम्मा साधु संतों और प्रबुद्ध वर्ग पर होना चाहिए। राजेश यादव ने आगे बताया कि हिंदू मंदिरों का सरकारी करण होने से यहां श्रद्धालुओं से दर्शन और व्यवस्थाओं के नाम पर 1100 से हजारों रुपए तक का अनुदान ले लिया जाता है। जबकि अन्य धर्म के धार्मिक स्थलों पर न तो सरकार का नियंत्रण है और ना ही यहां किसी प्रकार की राशि भक्तों से ली जाती है। अगर सनातनी अमरनाथ यात्रा भी करना चाहता है तो उनसे रजिस्ट्रेशन की कार्यवाही करवाई जाती है, लेकिन इसके उलट हज यात्रा के लिए सरकार खुद अनुदान की सुविधा देती है। आखिर हिंदूवादी और देशभक्तों की सरकार ऐसा क्यों कर रही है। हम चाहते हैं कि हमारे तीर्थ स्थल भी इस सरकारी करण से मुक्त हो जाए।

प्रधानमंत्री और राष्ट्रपति से मिलेंगे
अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद के राष्ट्रीय अध्यक्ष राजेश यादव ने बताया कि देश के 100 तीर्थ स्थलों को कार्यक्रम से मुक्त करने की मांग को लेकर हमने प्रधानमंत्री से समय मांगा है, अगर वह समय नहीं देते हैं तो फिर हम राष्ट्रपति से मिलने का प्रयास करेंगे।

महासंगम यात्रा का 21 फरवरी को दिल्ली में होगा समापन
महासंगम यात्रा भारतीय सनातन परंपराओं के पुनर्जागरण और मंदिरों को आधुनिकीकरण से जोड़ने के उद्देश्य से आयोजित की जा रही है। इस यात्रा के माध्यम से न केवल धार्मिक स्थलों की महिमा को पुनर्स्थापित किया जा रहा है, बल्कि युवाओं को भारतीय संस्कृति से जोड़ने, आध्यात्मिकता को प्रोत्साहित करने और धर्मपरायण समाज के निर्माण की दिशा में भी कदम उठाए जा रहे हैं। इस यात्रा में अब तक 9374 किलोमीटर से अधिक की दूरी तय की जा चुकी है, और सैकड़ों मंदिरों और तीर्थस्थलों पर श्रद्धालु भगवान के दर्शन कर चुके हैं। उज्जैन के बाद यह यात्रा ओंकारेश्वर, मथुरा-वृंदावन, हरिद्वार, ऋषिकेश, उखीमठ होते हुए 21 फरवरी 2025 को दिल्ली में संपन्न होगी।


जानिए क्या है महासंगम यात्रा
12 ज्योतिर्लिंग और 4 धामों का पवित्र सफर यह यात्रा 23 जनवरी 2025 को दिल्ली से शुरू होकर 24 फरवरी 2025 को दिल्ली में समाप्त होगी। महाकुंभ में 108 त्रिशूलों के जलाभिषेक से यात्रा की शुरुआत हुई, जिन्हें 108 शिव मंदिरों में स्थापित किया जाएगा। 12 ज्योतिर्लिंगों और 4 धामों में शिवलिंग और त्रिशूल प्रतिष्ठा, मंदिरों के सौंदर्यीकरण, सफेदी, लाइटिंग, पानी और वाई-फाई जैसी सुविधाओं को जोड़ा जाएगा। 26 फरवरी 2025, महाशिवरात्रि को 108 त्रिशूल शक्तिकेंद्र के रूप में स्थापित किए जाएंगे। इस यात्रा का उद्देश्य मंदिरों की महिमा पुनः स्थापित करना और पर्यटन को बढ़ावा देना है।

यह है यात्रा का उद्देश्य
मंदिरों के पुनर्जागरण की दिशा में एक कदम अंतरराष्ट्रीय मंदिर प्रबंधक परिषद (IMPC) मंदिरों के पुनर्निर्माण और उन्हें समृद्ध आध्यात्मिक केंद्रों में बदलने के लिए कार्यरत है। हम धरोहर संरक्षण, सामाजिक उत्थान और पर्यावरणीय स्थिरता पर ध्यान केंद्रित कर रहे हैं, जो संयुक्त राष्ट्र के सतत विकास लक्ष्यों से मेल खाता है। मंदिरों में पानी, सफाई और नवीकरणीय ऊर्जा समाधानों को लागू किया जा रहा है, साथ ही महिला सशक्तिकरण, कौशल विकास और बच्चों के कल्याण से जुड़े कार्यक्रम भी चलाए जा रहे हैं। IMPC का उद्देश्य भारतीय संस्कृति, एकता और सामाजिक समृद्धि को बढ़ावा देना है।
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