{"_id":"63cbeb6848a15c59950fe853","slug":"mahakal-ujjain-administration-will-auction-shoes-and-slippers-left-by-devotees-on-shanishchari-amavasya-in-ujj-2023-01-21","type":"story","status":"publish","title_hn":"Mahakal Ujjain: शनिश्चरी अमावस्या पर पनौती छोड़ गए लाखों श्रद्धालु, प्रशासन करेगा जूते-चप्पल और कपड़ों की नीलामी","category":{"title":"City & states","title_hn":"शहर और राज्य","slug":"city-and-states"}}
Mahakal Ujjain: शनिश्चरी अमावस्या पर पनौती छोड़ गए लाखों श्रद्धालु, प्रशासन करेगा जूते-चप्पल और कपड़ों की नीलामी
Sat, 21 Jan 2023 07:11 PM IST
अरविंद कुमार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
Published by: अरविंद कुमार
Updated Sat, 21 Jan 2023 07:11 PM IST
सार
धार्मिक नगरी उज्जैन अजब-गजब है। शनिश्चरी अमावस्या पर इंदौर रोड स्थित त्रिवेणी संगम मुख्य घाट पर श्रद्धालुओं ने आस्था का स्नान किया था, जिसके बाद शनिदेव के दर्शन कर श्रद्धालुओं ने घाटों पर ही अपनी पनौती छोड़ दी।
विज्ञापन
जूते-चप्पल और कपड़े की नीलामी
- फोटो : अमर उजाला
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
शनिश्चरी अमावस्या पर वैसे तो स्नान और दान का विशेष महत्व होता है। लेकिन यह भी मान्यता है कि शनिश्चरी अमावस्या पर पनौती छोड़ने से शनि की साढ़े साती और शनि की ढैय्या के कारण आ रही कठिनाई भी समाप्त होती है। इसलिए अमावस्या पर स्नान-दान और दर्शन लाभ लेने आने वाले लाखों श्रद्धालु कपड़े, जूते-चप्पल पनौती उतारने के महत्व को मानते हुए यहीं छोड़ जाते हैं, जिससे उनके शरीर के हर कष्ट का निवारण हो। जब कपड़े, जूते-चप्पल यहां ढेर हो जाते हैं तो प्रशासन उसकी नीलामी करता है। ये परंपरा कई साल से चली आ रही है।
विज्ञापन
शनिश्चरी अमावस्या के दिन श्रद्धालुओं द्वारा छोड़े गए कपड़े और जूतों की प्रशासन नीलामी करता है। पुजारी राकेश बैरागी ने बताया कि अमावस्या के दिन शनि महाराज का जन्म हुआ और आज शनिवार के दिन जो अमावस्या होती है, उसे शनिचरी अमावस्या कहा गया है। राजा विक्रमादित्य के शासन काल के इस मंदिर में दर्शन पूजन का महत्व रहा है।
विज्ञापन
यहां के अलावा किसी मंदिर में दर्शन पूजन नहीं की जाती है। यहां गणेश जी, हनुमान जी साढ़े साती और ढैय्या की दशा एक साथ विरजामन है। यहां राजा को भगवान से आशीर्वाद और वरदान मिला था कि जो भी भक्त मंदिर में आएगा उसका हर कष्ट निवारण होगा। इसलिए यहां बड़े हर्ष उल्लास के साथ भक्त पहुंचते हैं और आशीर्वाद लेते हैं।
विज्ञापन
