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Ujjain News: राम नाम के बेलपत्र से सजे महाकाल, भस्म आरती में उमड़ी भक्तों की भीड़

Wed, 08 Jul 2026 07:35 AM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Wed, 08 Jul 2026 07:35 AM IST
सार

आषाढ़ कृष्ण पक्ष की नवमी पर उज्जैन के महाकालेश्वर मंदिर में बुधवार सुबह आयोजित विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में हजारों श्रद्धालु शामिल हुए। सुबह चार बजे मंदिर के पट खुलने के बाद भगवान महाकाल का पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया गया।

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Mahakal in Ram Naam & Serpent Decoration, Bhasma Darshan Today
भस्म आरती - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

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आषाढ़ कृष्ण पक्ष की नवमी तिथि पर बुधवार तड़के उज्जैन स्थित महाकालेश्वर मंदिर में आयोजित विश्व प्रसिद्ध भस्म आरती में आस्था का अद्भुत दृश्य देखने को मिला। सुबह चार बजे से शुरू हुई भस्म आरती के दौरान हजारों श्रद्धालु बाबा महाकाल के दिव्य दर्शन के लिए मंदिर पहुंचे। देर रात से ही भक्तों की लंबी कतारें लग गई थीं और पूरा मंदिर परिसर "जय श्री महाकाल" के जयघोष से गूंज उठा।



सुबह चार बजे खुले मंदिर के पट, पंचामृत से हुआ जलाभिषेक
महाकालेश्वर मंदिर के पुजारी पंडित महेश शर्मा ने बताया कि आषाढ़ कृष्ण पक्ष की नवमी पर बुधवार सुबह चार बजे वीरभद्र से आज्ञा लेने के बाद मंदिर के पट खोले गए। इसके बाद पंडे-पुजारियों ने गर्भगृह में विराजमान सभी देवी-देवताओं का विधि-विधान से पूजन-अर्चन किया। पूजन के बाद भगवान महाकाल का जल, दूध, दही, घी, शक्कर, पंचामृत और फलों के रस से अभिषेक किया गया। इस दौरान प्रथम घंटाल बजाकर "हरि ओम" का जल अर्पित किया गया।
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राम नाम के बेलपत्र और सर्प से हुआ विशेष श्रृंगार
अभिषेक के बाद पुजारियों और पुरोहितों ने बाबा महाकाल का भव्य श्रृंगार किया। कपूर आरती के पश्चात भगवान को नवीन मुकुट धारण कराया गया। इसके बाद महानिर्वाणी अखाड़े की ओर से शिवलिंग पर भस्म अर्पित की गई। आज के श्रृंगार की विशेषता यह रही कि बाबा महाकाल का अलौकिक श्रृंगार राम नाम अंकित बेलपत्र और सर्प से किया गया। झांझ-मंजीरे, ढोल-नगाड़ों और शंखनाद के बीच भस्म आरती संपन्न हुई, जिसका हजारों श्रद्धालुओं ने दिव्य दर्शन किया।
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भस्म अर्पित होने के बाद साकार स्वरूप में देते हैं दर्शन
धार्मिक मान्यता है कि भस्म अर्पित होने के बाद भगवान महाकाल निराकार से साकार स्वरूप में भक्तों को दर्शन देते हैं। इसी कारण प्रतिदिन होने वाली भस्म आरती का विशेष धार्मिक महत्व माना जाता है और देश-विदेश से श्रद्धालु इस आरती में शामिल होने के लिए उज्जैन पहुंचते हैं।

शरद पूर्णिमा तक बदले हुए समय पर होंगी आरतियां
महाकालेश्वर मंदिर प्रशासन के अनुसार आश्विन मास की पूर्णिमा (शरद पूर्णिमा) तक आरतियां बदले हुए समय पर आयोजित की जाएंगी।

महाकालेश्वर मंदिर में आरतियों का समय

  • भस्म आरती : सुबह 4:00 बजे से 6:00 बजे तक
  • दध्योदक आरती : सुबह 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • भोग आरती : सुबह 10:00 बजे से 10:45 बजे तक
  • संध्या पूजन : शाम 5:00 बजे से 5:45 बजे तक
  • संध्या आरती : शाम 7:00 बजे से 7:45 बजे तक
  • शयन आरती : रात 10:30 बजे से 11:00 बजे तक

मंदिर प्रशासन ने बताया कि शरद पूर्णिमा तक इन्हीं निर्धारित समयों के अनुसार सभी आरतियां संपन्न कराई जाएंगी।

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