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हर्षा का कथावाचक अवतार: पहले प्रवचन से भक्तों को दी यह सीख, BJP नेता ही नहीं बड़ी संख्या में पहुंचे भक्त

Fri, 08 May 2026 09:58 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Fri, 08 May 2026 09:58 PM IST
सार

हर्षानंद गिरि यानी हर्षा रिछारिया ने उज्जैन के लक्ष्मीपुरा गांव में पहला सार्वजनिक प्रवचन देते हुए देवी शक्ति, माता सती और 52 शक्तिपीठों का महत्व बताया। उन्होंने कहा कि शिव और शक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु कथा सुनने पहुंचे और आरती में शामिल हुए

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Harsha Richharia's Debut as Kathavachak: Inspires Devotees with Powerful Message
प्रवचन करती स्वामी हर्षानंद गिरी

विस्तार

मॉडल और सोशल मीडिया इन्फ्लुएंसर से साध्वी बनीं हर्षा रिछारिया ने उज्जैन के लक्ष्मीपुरा गांव में शुक्रवार को पहली बार अपना पहला सार्वजनिक प्रवचन दिया। भीषण गर्मी के बावजूद बड़ी संख्या में श्रद्धालु उन्हें सुनने पहुंचे। हर्षा रिछारिया जो अब 'स्वामी हर्षानंद गिरि' कहलाती हैं, उन्होंने अपने डेढ़ घंटे के प्रवचन में देवी शक्ति, माता सती और 52 शक्तिपीठों के महत्व पर चर्चा की। उन्होंने बताया कि हिंदी वर्णमाला के 52 अक्षर शक्तिपीठों के बीज मंत्रों से निकले हैं। उन्होंने शिव और शक्ति के अटूट संबंध को समझाते हुए कहा कि दोनों एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। हालांकि शुरुआत में वे थोड़ी नर्वस नजर आईं लेकिन उसके बाद उन्होंने आसानी से कथा पूर्ण की।

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शक्ति के बिना शिव भी शून्य
हर्षानंद गिरि ने भागवत और शिव महापुराण का उल्लेख करते हुए कहा कि शक्ति के बिना शिव भी शून्य हैं। महादेव और आदिशक्ति एक-दूसरे के बिना अधूरे हैं। जैसे माता-पिता दोनों का समान महत्व है, वैसे ही शिव और शक्ति भी कभी अलग नहीं हो सकते हैं। हर शिव मंदिर में भगवती और हर देवी मंदिर में महादेव विराजमान होते हैं।
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शक्तिपीठों से ही बीज मंत्रों की उत्पत्ति
हर्षानंद गिरि ने श्रद्धालुओं से माता भगवती का स्मरण करने का आह्वान करते हुए कहा कि सच्चे मन से पुकारने पर मां स्वयं अवने भक्तों की रक्षा के लिए आती हैं। शक्तिपीठों से ही बीज मंत्रों की उत्पत्ति हुई और उनसे ही वर्णमाला बनी है। हर्षा ने शक्तिपीठों के दर्शन की मान्यता बताई और कहा कि पहले पूरी धरती सनातनी थी।
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देवी चेतना और जागृति का स्वरूप
हर्षानंद गिरि ने कहा कि बिना गुरु और माता रानी की कृपा के कथा संभव नहीं है। शुक्रवार को माता रानी का विशेष दिन बताते हुए उन्होंने मातृशक्ति को प्रणाम किया और कहा कि आप हैं तो हम हैं। इस सृष्टि में महादेव और जगत जननी आदिशक्ति ऐसी शक्तियां हैं, जिनका न आदि है और न अंत। देवी चेतना और जागृति का स्वरूप हैं जिनके प्राकट्य का वर्णन किसी शास्त्र में नहीं है। देवी कथा सुनना भी माता रानी की विशेष कृपा से ही संभव होता है।

19 अप्रैल को किया था सन्यास ग्रहण
19 अप्रैल को उज्जैन स्थित मोनी आश्रम में पंचायती निरंजनी अखाड़ा के महामंडलेश्वर स्वामी सुमनानंद गिरि महाराज के सान्निध्य में हर्षा ने विधिवत संन्यास ग्रहण किया था। संन्यास के बाद उन्होंने गृहस्थ जीवन त्यागकर स्वामी हर्षानंद गिरि नाम अपनाया। उनके संन्यास को लेकर सोशल मीडिया पर काफी चर्चा और सवाल भी उठे, लेकिन हर्षा लगातार अपने विरोधियों को जवाब देती रहीं।

तपती गर्मी में पहुंच गई भीड़
दोपहर को शुरू हुए इस देवी प्रवचन को सुनने के लिए बड़ी संख्या में भक्त यहां पहुंचे थे। जिहोंने प्रवचन सुनने और कथा के अंत तक शामिल होकर आरती भी की। इस कथा के दौरान भाजपा के कई नेता भी कथा श्रवण करने पहुंचे जो कि मंच तक भी पहुंचे।

प्रवचन करती स्वामी हर्षानंद गिरी

कथा श्रवण करने पहुंचे श्रोता
 

प्रवचन करती स्वामी हर्षानंद गिरी

प्रवचन करतीं स्वामी हर्षानंद गिरि

 

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