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Ujjain News: दुप्पटा, मुकुट, मुंड-माला और छत्र से सजे बाबा महाकाल, शिव नवरात्रि के दूसरे दिन हुआ ऐसा श्रृंगार

Tue, 18 Feb 2025 08:27 PM IST
उज्जैन ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, उज्जैन Published by: उज्जैन ब्यूरो Updated Tue, 18 Feb 2025 08:27 PM IST
सार

श्री महाकालेश्वर मंदिर में शिवनवरात्रि का उत्सव बड़ी धूमधाम व उल्हास के साथ मनाया जाता है। इस दौरान श्री महाकालेश्वर भगवान प्रतिदिन दिव्य श्रृंगार में भक्तों को 26 फरवरी 2025 शिव नवरात्रि तक अलग-अलग रूपों में श्रद्धालुओं को दर्शन देंगे।

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Baba Mahakal adorned with new clothes, dupatta, crown, head garland and umbrella was adorned
बाबा महाकाल - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

शिव नवरात्रि महोत्सव के दूसरे दिवस मंगलवार को श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रांगण स्थित कोटितीर्थ के तट पर श्री गणेश पूजन एवं श्री कोटेश्वर महादेव भगवान का पूजन, अभिषेक एवं आरती विधिपूर्वक संपन्न हुई। श्री महाकालेश्वर मंदिर के मुख्य पुजारी घनश्याम शर्मा के आचार्यत्व में 11 ब्राह्मणों द्वारा एकादश-एकादशनी रुद्रपाठ के साथ भगवान श्री महाकालेश्वर का अभिषेक किया गया।
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यह पूजन 26 फरवरी 2025 तक प्रतिदिन इसी प्रकार चलता रहेगा। अपराह्न में सांध्य पंचामृत पूजन के पश्चात पुजारी भारत शर्मा द्वारा भगवान श्री महाकालेश्वर का दिव्य श्रृंगार किया गया। शिव नवरात्रि के दूसरे दिन संध्या पूजन के उपरांत भगवान श्री महाकालेश्वर ने भक्तों को अपने दिव्य स्वरूप में दर्शन दिए।
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भगवान श्री महाकालेश्वर को नवीन वस्त्रों सहित मेखला, दुपट्टा, मुकुट, मुंड-माला एवं छत्र से सुशोभित किया गया। साथ ही, भगवान का श्रृंगार भांग, चंदन एवं सूखे मेवों से किया गया। भगवान श्री महाकालेश्वर को मुकुट, मुंड माला, नागकुंडल एवं फलों की माला के साथ दिव्य रूप में श्रृंगारित किया गया।
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कल शेषनाग धारण करेंगे महाकाल
फाल्गुन कृष्ण सप्तमी, बुधवार, 19 फरवरी 2025 को भगवान श्री महाकालेश्वर का चंदन एवं भांग से विशेष श्रृंगार कर उन्हें शेषनाग धारण कराया जाएगा।

कीर्तनकार डॉ. अजय अपामार्जने द्वारा कीर्तन
श्री महाकालेश्वर मंदिर प्रबंध समिति द्वारा इस वर्ष नौ दिवसीय नारदीय कीर्तन हेतु पुणे से राष्ट्रीय कीर्तनकार एवं आयुर्वेदाचार्य डॉ. अजय अपामार्जने को आमंत्रित किया गया है। देवर्षि नारदजी खड़े होकर करतल ध्वनि एवं वीणा के साथ हरि नाम संकीर्तन करते हैं, इसलिए इस विधि को "नारदीय कीर्तन" कहा जाता है।


श्री महाकालेश्वर मंदिर में यह परंपरा विगत 115 वर्षों से भी अधिक समय से अनवरत चली आ रही है। आज से डॉ. अजय अपामार्जने द्वारा नौ दिवसीय कथा का शुभारंभ हुआ। शिव कथा एवं हरि कीर्तन का आयोजन सायं 4:30 बजे से 6:00 बजे तक मंदिर परिसर स्थित नवग्रह मंदिर के पास संगमरमर के चबूतरे पर किया गया। हरिकीर्तन के प्रथम दिवस डॉ. अपामार्जने ने राम-कृष्ण-हरि कीर्तन के पश्चात श्री गणपति भगवान की कथाओं का वर्णन किया। तबले पर श्रीधर व्यास ने संगत की।
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