नेपाल आपदा: बाढ़ में फंसीं अनूपपुर की दो बहनें सुरक्षित मिलीं, एमपी के पांच परिवारों की चिंता बरकरार; गुहार
नेपाल में आई भीषण बाढ़ के बीच मध्य प्रदेश की अनूपपुर निवासी दो बहनें पलक और पल्लवी सुरक्षित मिल गईं। वहीं, रायसेन के दो भाइयों समेत पांच अन्य लोगों का अब भी पता नहीं चला है। स्वाति बागरेचा का परिवार भी चिंतित है।
खबरें लगातार पढ़ने के लिए अमर उजाला एप डाउनलोड करें
या
वेबसाइट पर पढ़ना जारी रखने के लिए वीडियो विज्ञापन देखें
अगर आपके पास प्रीमियम मेंबरशिप है तो
विस्तार
नेपाल में बाढ़ की चपेट में फंसे मध्य प्रदेश के लोगों को लेकर शनिवार को एक परिवार को बड़ी राहत मिली, जब लापता हुईं दो बहनों का पता चल गया। हालांकि, प्रदेश के पांच अन्य परिवार अब भी अपने प्रियजनों की खबर का बेसब्री से इंतजार कर रहे हैं। अधिकारियों के अनुसार, मध्य प्रदेश के कम से कम सात लोग नेपाल में लापता हैं या फंसे हुए हैं। इनमें अनूपपुर की दो बहनें पलक और पल्लवी मांझी तथा रायसेन के दो भाई विकास और हिमांशु राजपूत शामिल हैं।
वहीं, विदिशा निवासी और टोरंटो में कार्यरत इंजीनियर स्वाति बागरेचा भी लापता लोगों में शामिल हैं। वह 77 सदस्यीय ईशा फाउंडेशन के समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा पर गई थीं और नेपाल-तिब्बत सीमा के पास से लापता हो गईं। पिछले चार दिनों से उनका परिवार लगातार उनके मोबाइल पर संपर्क करने की कोशिश कर रहा है, लेकिन कोई जवाब नहीं मिल रहा है।
अनूपपुर जिले की रहने वालीं पलक और पल्लवी मांझी ग्वालियर में पढ़ाई और काम करती हैं। दोनों बहनें घूमने के लिए नेपाल गई थीं और आपदा के दौरान दो दिनों तक उनका परिवार से संपर्क नहीं हो पाया था। हालांकि, शुक्रवार को परिवार को सूचना मिली कि दोनों बहनें सुरक्षित हैं और पोखरा में हैं। कोतमा थाना प्रभारी रत्नांभर शुक्ला ने बताया कि दोनों बहनों के रविवार को घर लौटने के लिए यात्रा शुरू करने की उम्मीद है। दोनों बहनों के पिता ने भी उनसे फोन पर बात की है। बेटियों के सुरक्षित होने की खबर मिलने के बाद मांझी परिवार ने राहत की सांस ली है।
उधर, रायसेन में रहने वाले विकास और हिमांशु राजपूत के परिवार की चिंता अब भी बनी हुई है। दोनों भाई एक जलविद्युत परियोजना में काम करते थे और उनके बारे में अभी तक कोई ठोस जानकारी नहीं मिल सकी है।
देवास के शाहजहां अंसारी और इंदौर के शिबा प्रसाद मुखर्जी के परिजनों ने भी दिल्ली में बनाए गए कंट्रोल रूम से संपर्क किया है। यह कंट्रोल रूम नेपाल में लापता या फंसे मध्य प्रदेश के लोगों की मदद के लिए बनाया गया है। विदिशा निवासी 50 वर्षीय स्वाति बागरेचा के परिवार के लिए पिछले चार दिन बेहद चिंताजनक रहे हैं। उनका मोबाइल फोन लगातार बज रहा है, लेकिन वह किसी का फोन नहीं उठा रही हैं।
पढे़ं: निलंबित CSP नेहा पच्चीसिया की अग्रिम जमानत खारिज, गिरफ्तारी का खतरा बढ़ा
स्वाति टोरंटो में इंजीनियर हैं। वह 8 अगस्त को दिल्ली से 77 सदस्यीय ईशा फाउंडेशन के समूह के साथ कैलाश मानसरोवर यात्रा के लिए रवाना हुई थीं। उनके भाई डॉ. प्रशांत बागरेचा के अनुसार, परिवार की उनसे आखिरी बार 26 अगस्त को सुबह करीब 9 बजे बात हुई थी। उस समय वह इमिग्रेशन औपचारिकताओं के लिए नेपाल-तिब्बत सीमा पर पहुंची थीं। डॉ. प्रशांत ने बताया कि स्वाति का मोबाइल अभी भी बज रहा है, लेकिन वह फोन नहीं उठा रही हैं। इससे परिवार उनकी सुरक्षा को लेकर बेहद चिंतित है।
परिवार के अनुसार, स्वाति की 14 वर्षीय बेटी अनुष्का मुंबई में अपनी बड़ी बहन के साथ रुकी हुई है। डॉ. प्रशांत ने बताया कि लोकेशन लॉग से पता चला है कि स्वाति का मोबाइल फोन चीन सीमा के आसपास किसी स्थान पर सक्रिय है, लेकिन नंबर टोरंटो में पंजीकृत होने के कारण उसे ट्रैक करने में दिक्कत आ रही है।
परिवार ने स्वाति की तलाश के लिए नेपाल स्थित भारतीय और कनाडाई दूतावासों से भी संपर्क कर मदद मांगी है। स्थानीय विधायक मुकेश टंडन के हस्तक्षेप के बाद केंद्रीय कृषि मंत्री शिवराज सिंह चौहान ने भी परिवार से बात की और स्वाति का पता लगाने तथा उनकी सुरक्षित वापसी के प्रयास शुरू किए।
नेपाल के रसुवा क्षेत्र में 26 अगस्त को भोटेकोशी नदी में अचानक जलस्तर बढ़ने के बाद फ्लैश फ्लड की स्थिति बनी थी। इसके बाद बाढ़ का पानी त्रिशूली और गंडक नदी तंत्र में पहुंच गया, जिससे निचले इलाकों में भी असर पड़ा। जहां अनूपपुर की दोनों बहनों के सुरक्षित मिलने से उनके परिवार में खुशी है, वहीं नेपाल में फंसे या लापता अन्य लोगों के परिवार अब भी हर फोन कॉल के साथ किसी अच्छी खबर का इंतजार कर रहे हैं।
