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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   The father-in-law sent off the widowed daughter-in-law as a daughter

MP News: ऐसे सास-ससुर, जिन्होंने तलाशा विधवा बहू के लिए पति तो विधुर दामाद का फिर से बसाया घर

Sun, 27 Nov 2022 10:27 PM IST
दिनेश शर्मा न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, खंडवा Published by: दिनेश शर्मा Updated Sun, 27 Nov 2022 10:27 PM IST
सार

मध्य प्रदेश के निमाड़ क्षेत्र में सास-ससुर ने समाज को नया संदेश दिया है। एक सास-ससुर ने विधवा बहू को बेटी बनाकर विदा किया तो दूसरे सास-ससुर ने अपने विधुर दामाद का घर फिर से बसा दिया। 

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The father-in-law sent off the widowed daughter-in-law as a daughter
खंडवा में हुआ पुनर्विवाह समाज को अलग संदेश दे गया। - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

मध्य प्रदेश के खंडवा जिले में पुनर्विवाह का अलग मामला सामने आया है। सास-ससुर ने विधवा बहू के लिए पति तलाशा तो विधुर दामाद की भी शादी कराई। बहू को सास-ससुर ने बेटी मानकर और दामाद के सास-ससुर ने बेटा मानकर दोनों की आपस में शादी करवाई। इस जोड़े ने शादी के कुछ साल बाद ही अपने-अपने जीवनसाथी को खो दिया था।
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जानकारी के अनुसार मामला खंडवा जिले का है। बता दें कि खरगोन जिले में रहने वाले रामचंद्र राठौर और गायत्री राठौर के बेटे अभिषेक का पांच साल पहले हार्टअटैक से निधन हो गया था। बहू मोनिका अकेली हो गई। उसकी सात साल की बेटी दिव्यांशी भी उदास रहने लगी। सास-ससुर ने बहू का सूनापन खत्म करने और उसका जीवन फिर से संवारने का मन बनाया। तमाम सामाजिक बंधनों को तोड़ बहू का पुनर्विवाह कराने का मन बनाया। उन्होंने बहू के बेटी मानकर रिश्ता तलाशा और पांच साल बाद बहू के लिए वर तलाश लिया। खंडवा के रहने वाले दिनेश से शादी तय की। 
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बता दें कि दिनेश की पत्नी समिता का कोरोना में निधन हो गया था। दिनेश की दो बेटियां हैं। इसलिए इन बेटियों के भविष्य की खातिर दिनेश की सास शकुंतला राठौर और ससुर मोहनलाल राठौर ने दामाद के लिए बहू ढूंढ ली। शनिवार को खंडवा के गायत्री मंदिर में गायत्री पद्धति से जिला न्यायालय में स्टेनो दिनेश और मोनिका का पुनर्विवाह संपन्न कराया गया।
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ससुर से पिता बने रामचंद्र राठौर कहते हैं कि कन्यादान के समय मेरे समधी ने मुझसे कहा था कि मेरी बेटी की जिम्मेदारी अब आपकी है। जब शादी के तीन साल बाद मेरे बेटे अभिषेक का निधन हुआ तो बहू मोनिका की हालत मुझसे देखी न जाती थी। पांच साल की मशक्कत के बाद योग्य वर ढूंढने में कामयाब रहा। अब मोनिका इस घर में बहू की तरह नहीं बेटी की तरह आएगी।
 
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