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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Grandfather dies as he shoulders grandson's bier; the elderly man's heart could not bear the shock.

एमपी: पोते की अर्थी उठी तो दादा को आया चक्कर, अस्पताल पहुंचने से पहले मौत; एक साथ उठीं दो अर्थियां

Mon, 07 Sep 2026 06:42 PM IST
शिवपुरी ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, शिवपुरी Published by: शिवपुरी ब्यूरो Updated Mon, 07 Sep 2026 06:42 PM IST
सार

शिवपुरी के सिकरावदा गांव में पोते छोटू रावत की पानी में बहने से मौत के बाद अंतिम संस्कार के दौरान दादा छप्पनलाल की भी मौत हो गई। अर्थी के साथ चलते समय चक्कर खाकर गिरे। सोमवार को दोनों का एक साथ अंतिम संस्कार हुआ।

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Grandfather dies as he shoulders grandson's bier; the elderly man's heart could not bear the shock.
पोते की मौत का सदमा नहीं सह पाए दादा - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

कहते हैं कि पोते के गम में दादा का कलेजा फट जाता है। ऐसा ही दिल दहला देने वाला मामला जिले के सिकरावदा गांव से सामने आया है। यहां रविवार शाम 21 वर्षीय युवक छोटू रावत की अर्थी अंतिम संस्कार के लिए ले जाई जा रही थी। इसी दौरान उसके 65 वर्षीय दादा छप्पनलाल रावत अचानक चक्कर खाकर जमीन पर गिर पड़े। परिजन उन्हें तुरंत अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने उन्हें मृत घोषित कर दिया। डॉक्टरों ने प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटैक की आशंका जताई है। पोते की मौत के सदमे के बीच दादा की भी मौत से परिवार में कोहराम मच गया। 

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जानकारी के मुताबिक सिकरावदा गांव निवासी राजू रावत का 21 वर्षीय बेटा छोटू रावत दो दिन पहले तेज बारिश के दौरान पानी के तेज बहाव में बह गया था। बहाव इतना तेज था कि परिजन उसे बचा नहीं सके। घटना के बाद से ही परिवार और ग्रामीण उसकी तलाश में जुटे थे। नदी-नालों और आसपास के इलाकों में लगातार खोजबीन की जा रही थी।

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रविवार सुबह गहलोनी के पास पानी में छोटू का शव उतराता हुआ मिला। दो दिन की तलाश के बाद शव मिलने की सूचना से परिवार में कोहराम मच गया। पुलिस को सूचना दी गई। इसके बाद शव का पोस्टमार्टम कराया गया और अंतिम संस्कार की तैयारी शुरू हुई।

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रविवार शाम छोटू की अर्थी अंतिम संस्कार के लिए श्मशान घाट ले जाई जा रही थी। परिवार के लोग और ग्रामीण अर्थी के साथ चल रहे थे। इसी दौरान 65 वर्षीय छप्पनलाल रावत भी अपने पोते को अंतिम विदाई देने जा रहे थे। परिजनों के मुताबिक, पोते की मौत के बाद से वह बेहद दुखी थे। उन्होंने ठीक से खाना-पीना और सोना भी छोड़ दिया था।

अर्थी गांव से कुछ दूर पहुंची ही थी कि अचानक छप्पनलाल को चक्कर आया और वह जमीन पर गिर पड़े। उन्हें गिरता देख अर्थी के साथ चल रहे लोगों में अफरा-तफरी मच गई। परिजन तुरंत उन्हें अस्पताल लेकर पहुंचे, लेकिन डॉक्टरों ने जांच के बाद मृत घोषित कर दिया। प्रारंभिक तौर पर हार्ट अटैक से मौत की आशंका जताई गई है।

परिजनों का कहना है कि छप्पनलाल अपने पोते छोटू से बेहद प्यार करते थे। उसकी असमय मौत का सदमा वह सह नहीं पाए। पोते की अर्थी के साथ चलते-चलते उनकी भी सांसें थम गईं। इस हृदयविदारक घटना के बाद सिकरावदा गांव में मातम पसर गया। एक ही परिवार में कुछ ही घंटों के अंतराल में दो मौतों से हर कोई स्तब्ध है। सोमवार को गांव के श्मशान घाट पर दादा और पोते का एक साथ अंतिम संस्कार किया गया। दोनों की चिताएं एक साथ जलती देख वहां मौजूद लोगों की आंखें नम हो गईं।

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