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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Shahdol News ›   Aditi Kumar Sharma MP Woman Judge Resigns Alleging Harassment on HC  Judge Says Judiciary Failed Itself

MP: 'मैं जा रही हूं', जिस पर लगाए उत्पीड़न के आरोप, वो HC का जज बना तो महिला जज ने दिया इस्तीफा; भावुक कर देगा

Wed, 30 Jul 2025 10:20 AM IST
उदित दीक्षित न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल/शहडोल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल/शहडोल Published by: उदित दीक्षित Updated Wed, 30 Jul 2025 10:20 AM IST
सार

'मैं बदला नहीं चाहती थी, मैं न्याय मांग रही थी। सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उस संस्था के लिए जिसमें मैंने विश्वास किया। अब मैं जा रही हूं, ऐसे जख्मों के साथ जिन्हें न तो बहाली, न मुआवजा और न ही कोई माफी भर सकेगी। यह पत्र जिन फाइलों में दर्ज होगा, उन्हें ताउम्र परेशान करता रहे'। जज अदिति कुमार शर्मा के पत्र के अंश..।

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Aditi Kumar Sharma MP Woman Judge Resigns Alleging Harassment on HC  Judge Says Judiciary Failed Itself
शहडोल में पदस्थ जूनियर डिवीजन सिविल जज ने हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजा इस्तीफा। - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

MP Woman Judge Resigns: मध्य प्रदेश हाईकोर्ट में एक सीनियर जज की नियुक्ति के बाद शहडोल जिले में पदस्थ जूनियर डिवीजन सिविल जज अदिति कुमार शर्मा ने अपने पद से इस्तीफा दे दिया है। इस सीनियर जज पर अदिति ने उत्पीड़न और दुर्व्यवहार के आरोप लगाए थे। उनका कहना है कि मामले की जांच करने के बजाय उस जज को पुरस्कृत किया गया, जिसके चलते वे संस्थान छोड़ रहीं हैं।    

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28 जुलाई को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट के मुख्य न्यायाधीश को भेजे अपने इस्तीफे में जूनियर डिवीजन सिविल जज अदिति कुमार शर्मा ने लिखा-मैं न्यायिक सेवा से इस्तीफा दे रही हूं, क्योंकि मैंने संस्था को नहीं किया, संस्था ने मुझे विफल किया है। अदिति ने कहा कि उन्हें कई साल तक लगातार उत्पीड़न का सामना करना पड़ा। इसके बाद उन्होंने इस उम्मीद में हर कानूनी मार्ग अपनाया कि अगर, उन्हें न्याय न भी मिले तो कम से कम उनकी बात तो सुनी जाएगी।

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न्यायमूर्ति शब्द के साथ क्रूर मजाक  
अपने पत्र में अदिति ने लिखा- जिस व्यक्ति ने मुझे पीड़ा दी, उससे कोई सवाल नहीं किया गया, बल्कि उसे पुरस्कृत किया गया, सिफारिश की गई और पदोन्नत किया गया। समन देने की बजाय उसे सम्मान का मंच दे दिया गया। अदिति ने यह भी कहा कि उन्होंने उक्त न्यायाधीश के खिलाफ सबूतों के साथ शिकायत की थी, लेकिन फिर भी न कोई जांच हुई, न कोई नोटिस दिया गया और न ही कोई स्पष्टीकरण मांगा गया। अब उसे 'न्यायमूर्ति' कहा जा रहा है, जो इस शब्द के साथ एक क्रूर मजाक है।


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यह पत्र ताउम्र परेशान करता रहे
जज अदिति शर्मा ने लिखा - मैं बदला नहीं चाहती थी, मैं न्याय मांग रही थी। सिर्फ अपने लिए नहीं, बल्कि उस संस्था के लिए जिसमें मैंने विश्वास किया, भले ही उसने मुझ पर विश्वास नहीं किया। अब मैं जा रही हूं, ऐसे जख्मों के साथ जिन्हें न तो बहाली, न मुआवजा और न ही कोई माफी भर सकेगी। यह पत्र जिन फाइलों में दर्ज होगा, उन्हें ताउम्र परेशान करता रहे। मैं एक कोर्ट अधिकारी के रूप में नहीं, बल्कि संस्था की चुप्पी की शिकार के रूप में अपना इस्तीफा सौंप रही हैं। न कोई तमगा है, न कोई उत्सव और न कोई कड़वाहट, सिर्फ एक कड़वी सच्चाई कि न्यायपालिका ने मुझे विफल किया। लेकिन, इससे भी बुरा यह है कि उसने खुद को विफल कर दिया।
 

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सुप्रीम कोर्ट ने बर्खास्तगी को  बताया था गैरकानूनी
बता दें कि 2023 में अदिति कुमार शर्मा सहित छह महिला न्यायिक अधिकारियों को 'असंतोषजनक प्रदर्शन' के आरोप में सेवा से बर्खास्त कर दिया गया था। इसके बाद सुप्रीम कोर्ट ने मामले में स्वतः संज्ञान लिया था। 1 अगस्त 2024 को मध्य प्रदेश हाईकोर्ट ने  ज्योति वरकड़े, सोनाक्षी जोशी, प्रिया शर्मा और रचना अतुलकर जोशी को कुछ शर्तों के साथ बहाल कर दिया था, लेकिन अदिति कुमार शर्मा और सरिता चौधरी को राहत नहीं दी गई थी। हालांकि, 28 फरवरी को सुप्रीम कोर्ट ने अपने सख्त फैसले में अदिति शर्मा की बर्खास्तगी को "मनमाना और अवैध" करार देते हुए उन्हें बहाल करने का आदेश दिया था। 

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