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बढ़ती आत्महत्याएं रोकने के लिए शुरू होगी हेल्पलाइन
जयप्रकाश पाराशर/अमर उजाला, भोपाल
Updated Fri, 07 Mar 2014 01:06 PM IST
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जबलपुर के पुलिस अधीक्षक हरिनारायण चारी मिश्रा जल्दी ही हेल्पलाइन शुरू करने की योजना बना रहे हैं। यह हेल्पलाइन उन लोगों को समर्पित होगी जिनके मन में आत्महत्या का विचार आता है और वे अपनी बात अभिव्यक्त करने के लिए किसी को ढूंढते हैं। हेल्पलाइन शुरू करने के पीछे मिश्रा की सोच है कि जिन लोगों के मन में आत्महत्या का विचार आता है, उनका ध्यान यदि कुछ मिनट के लिए अन्य विषयों पर ले जाया जाए तो उनकी जान बचाई जा सकती है।
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मध्य प्रदेश में जब किसानों की आत्महत्याएं खबरों में है, तब प्रदेश का शहर जबलपुर आत्महत्याओं की राजधानी बन गया है। जबलपुर में 2012 में 572 लोगों ने आत्महत्या की और वहां आत्महत्या की दर देश के तमाम शहरों में सबसे ज्यादा 45 फीसदी थी। आत्महत्या की इतनी ऊंची दर दुनिया के प्रमुख शहरों में भी नहीं है। शहर की कुल जनसंख्या में जब हम आत्महत्याओं की संख्या का भाग देते हैं तो प्रतिलाख आत्महत्या की दर प्राप्त होती है। जबलपुर की जनसंख्या 2012 में 12.68 लाख थी और 572 लोगों ने आत्महत्या की, तब प्रतिलाख 45.1 व्यक्ति ने वहां आत्महत्या की है।
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जबलपुर के साथ ही देश में कोल्लम (केरल), पुडुच्चेरी और राजकोट (गुजरात) जैसे मझौले शहरों में चौंकाने वाली आत्महत्या की दर है। हालांकि चेन्नई देश में सबसे ज्यादा आत्महत्याओं वाला शहर हैं, जहां छात्र सबसे ज्यादा आत्महत्याएं करते हैं, लेकिन जबलपुर, कोल्लम और राजकोट जैसे शहरों में इतनी तेज दर हैरान कर देने वाली है।
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नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो के मुताबिक 2012 में जबलपुर में 572 आत्महत्याएं हुई थीं और आत्महत्याओं की दर 45.1 फीसदी थी। इसी वर्ष में केरल के कोल्लम में 450 आत्महत्याएं हुई थी और वहां आत्महत्याओं की दर 40.5 फीसदी थी। शेयर बाजार में बड़ी भूमिका अदा करने वाले राजकोट शहर में 424 आत्महत्याएं हुई और वहां दर 30.5 फीसदी थी। पुडुच्चेरी वैसे तो केंद्र शासित प्रदेश है, लेकिन वहां भी 2012 में 541 लोगों ने आत्महत्याएं कीं और आत्महत्या की दर प्रति लाख 36.8 थी।
मिश्रा का कहना है, ‘इस प्रवृत्ति का समाजशास्त्रीय अध्ययन होना चाहिए कि शिक्षा और संस्कृति के लिहाज से संपन्न इस शहर में ऐसा क्यों हो रहा है, जहां शिक्षित लोगों की बड़ी संख्या है। एक मझौले आकार के शहर में इतनी बड़ी संख्या में आत्महत्याएं सोचने पर बाध्य करती हैं। यह केवल जबलपुर की बात नहीं है। केरल का कोवलम और गुजरात का राजकोट भी ज्यादा संख्या में आत्महत्या वाले मझौले शहर हैं।’
नेशनल क्राइम रिपोर्ट ब्यूरो के 2012 के आंकड़ों को देखें तो जबलपुर मध्य प्रदेश के अन्य प्रमुख शहरों इंदौर, भोपाल और ग्वालियर से आत्महत्या के मामले में काफी आगे है। 2012 में भोपाल में 212 आत्महत्याएं हुईं और दर 14.6 फीसदी थी। यह आंकड़ा जबलपुर से आधे से भी कम है। मध्य प्रदेश के सबसे बड़े शहर से तुलना करें तो इंदौर में 434 आत्महत्याएं हुईं लेकिन वहां आत्महत्या की दर 20 फीसदी ही थी। यह जबलपुर की दर से आधे से भी कम है। प्रदेश के तीसरे बड़े शहर ग्वालियर को देखें तो वहां 208 आत्महत्याएं हुईं और दर 18.9 फीसदी थी।
चेन्नई देश मे आत्महत्याओं की राजधानी कहा जा सकता है। तमिलनाडु में देश की कुल आत्महत्याओं की 12.5 फीसदी घटनाएं होती हैं। हैरानी की बात यह है कि देश के सबसे ज्यादा आबादी वाले राज्य उत्तर प्रदेश में देश की कुल आत्महत्याओं में से केवल 3.3 फीसदी भागीदारी है। मध्य प्रदेश में यही आंकड़ा 7.2 फीसदी है।
मध्य प्रदेश में 2012 के आंकड़ों के हिसाब से आत्महत्या की दर 13.3 फीसदी थी। ब्यूरो के आंकड़ों से पता चलता है कि पारिवारिक कारणों और बीमारियों के कारण आत्महत्या करने वालों की तादाद आमतौर पर ज्यादा रहती है। जैसे 2012 में 38.7 फीसदी आत्महत्या करने वाले स्वरोजगार पृष्ठभूमि के थे और 18 फीसदी गृहणियां थीं।
