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Gupt Navratri 2026: सिद्धियों की गुप्त नवरात्रि 19 से, दस महाविद्याओं की साधना से बदल सकती है किस्मत
Sat, 17 Jan 2026 07:40 PM IST
सीहोर ब्यूरो
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: सीहोर ब्यूरो
Updated Sat, 17 Jan 2026 07:40 PM IST
सार
Gupt Navratri 2026: ज्योतिष आचार्य पंडित गणेश शर्मा के अनुसार, सनातन परंपरा में साल में चार बार नवरात्रि आती है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि जहां सार्वजनिक रूप से देवी के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए जानी जाती हैं, वहीं माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त रखी जाती हैं।
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शक्ति साधना का पावन पर्व, गुप्त नवरात्रि का आगमन
विस्तार
अध्यात्म, तंत्र और शक्ति उपासना में आस्था रखने वाले साधकों के लिए माघ मास की गुप्त नवरात्रि एक दुर्लभ आध्यात्मिक अवसर लेकर आ रही है। यह पावन पर्व 19 जनवरी 2026 से प्रारंभ होकर 27 जनवरी तक चलेगा। नौ दिनों तक चलने वाली इस साधना में साधक बाहरी दुनिया से दूरी बनाकर एकांत में शक्ति उपासना करते हैं। मान्यता है कि गुप्त रूप से की गई साधना शीघ्र फलदायी होती है और साधक को अलौकिक अनुभूतियां प्रदान करती है।
साल में चार नवरात्रि, पर गुप्त नवरात्रि सबसे रहस्यमयी
स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिष आचार्य पंडित गणेश शर्मा के अनुसार, सनातन परंपरा में साल में चार बार नवरात्रि आती है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि जहां सार्वजनिक रूप से देवी के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए जानी जाती हैं, वहीं माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त रखी जाती हैं। इन नवरात्रियों में साधक मानसिक, आध्यात्मिक और तांत्रिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए कठिन तप और जप करते हैं।
दस महाविद्याएं, सिद्धियों का प्रमुख द्वार
माघ गुप्त नवरात्रि की सबसे बड़ी विशेषता दस महाविद्याओं की उपासना मानी जाती है। साधक अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इन शक्तियों की आराधना करते हैं। इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी शामिल हैं। मान्यता है कि इन दस शक्तियों की साधना से जीवन के रोग, भय, दोष, आर्थिक संकट और मानसिक कष्ट समाप्त होते हैं।
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दुर्लभ योग बना रहे इस बार नवरात्रि को खास
इस वर्ष की गुप्त नवरात्रि और भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इस दौरान सर्वार्थसिद्धि योग और द्विपुष्कर योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई साधना कई गुना फल प्रदान करती है। ऐसे में यह समय तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जा रहा है।
घटस्थापना और पूजा की विधि
हिंदी पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी को रात 01 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण उसी दिन गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 07:14 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक रहेगा। साधक कलश स्थापना कर अखंड ज्योत प्रज्वलित करें और संकल्प लें।
ये भी पढ़ें: आरटीई एक्ट के तहत दाखिला देने में घोटाला, ईओडब्ल्यू ने दर्ज किया प्रकरण
साधना की दिनचर्या और समापन विधि
गुप्त नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम शिव परिवार और भैरव महाराज की पूजा अनिवार्य मानी गई है। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और विशेष मंत्रों का जप किया जाता है। तांत्रिक और अघोरी साधक रात्रि में विशेष साधना करते हैं। नवमी तिथि को कन्या पूजन, हवन और भोज के साथ नवरात्रि व्रत का विधिवत समापन किया जाता है। मान्यता है कि इस प्रकार की गई साधना साधक के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।
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साल में चार नवरात्रि, पर गुप्त नवरात्रि सबसे रहस्यमयी
स्वर्ण पदक प्राप्त ज्योतिष आचार्य पंडित गणेश शर्मा के अनुसार, सनातन परंपरा में साल में चार बार नवरात्रि आती है। चैत्र और अश्विन नवरात्रि जहां सार्वजनिक रूप से देवी के नौ स्वरूपों की आराधना के लिए जानी जाती हैं, वहीं माघ और आषाढ़ मास की नवरात्रि गुप्त रखी जाती हैं। इन नवरात्रियों में साधक मानसिक, आध्यात्मिक और तांत्रिक शक्तियों की प्राप्ति के लिए कठिन तप और जप करते हैं।
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दस महाविद्याएं, सिद्धियों का प्रमुख द्वार
माघ गुप्त नवरात्रि की सबसे बड़ी विशेषता दस महाविद्याओं की उपासना मानी जाती है। साधक अपनी विशेष मनोकामनाओं की पूर्ति के लिए इन शक्तियों की आराधना करते हैं। इनमें मां काली, मां तारा, मां त्रिपुर सुंदरी, मां भुवनेश्वरी, मां छिन्नमस्ता, मां त्रिपुर भैरवी, मां धूमावती, मां बगलामुखी, मां मातंगी और मां कमला देवी शामिल हैं। मान्यता है कि इन दस शक्तियों की साधना से जीवन के रोग, भय, दोष, आर्थिक संकट और मानसिक कष्ट समाप्त होते हैं।
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दुर्लभ योग बना रहे इस बार नवरात्रि को खास
इस वर्ष की गुप्त नवरात्रि और भी विशेष मानी जा रही है क्योंकि इस दौरान सर्वार्थसिद्धि योग और द्विपुष्कर योग जैसे दुर्लभ संयोग बन रहे हैं। ज्योतिषीय मान्यताओं के अनुसार इन योगों में की गई साधना कई गुना फल प्रदान करती है। ऐसे में यह समय तंत्र साधना, मंत्र सिद्धि और आध्यात्मिक उन्नति के लिए अत्यंत श्रेष्ठ माना जा रहा है।
घटस्थापना और पूजा की विधि
हिंदी पंचांग के अनुसार, माघ शुक्ल प्रतिपदा तिथि 19 जनवरी को रात 01 बजकर 21 मिनट से प्रारंभ होगी। उदया तिथि मान्य होने के कारण उसी दिन गुप्त नवरात्रि की शुरुआत होगी। घटस्थापना का शुभ मुहूर्त प्रातः 07:14 बजे से 10:46 बजे तक रहेगा। इसके अलावा अभिजीत मुहूर्त दोपहर 12:11 से 12:53 बजे तक रहेगा। साधक कलश स्थापना कर अखंड ज्योत प्रज्वलित करें और संकल्प लें।
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साधना की दिनचर्या और समापन विधि
गुप्त नवरात्रि के दौरान सुबह-शाम शिव परिवार और भैरव महाराज की पूजा अनिवार्य मानी गई है। दुर्गा सप्तशती, दुर्गा चालीसा और विशेष मंत्रों का जप किया जाता है। तांत्रिक और अघोरी साधक रात्रि में विशेष साधना करते हैं। नवमी तिथि को कन्या पूजन, हवन और भोज के साथ नवरात्रि व्रत का विधिवत समापन किया जाता है। मान्यता है कि इस प्रकार की गई साधना साधक के जीवन की दिशा और दशा दोनों बदल सकती है।
