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सीहोर: नसरुल्लागंज के नीलकंठ घाट पर रेत माफिया का कब्जा, नर्मदा नदी के बीच से किया जा रहा खनन
Mon, 21 Mar 2022 04:33 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सीहोर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Mon, 21 Mar 2022 04:33 PM IST
सार
सरकार के आदेश के मुताबिक नर्मदा नदी के अंदर से रेत निकाले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है, लेकिन वर्तमान में नसरुललागंज क्षेत्र में स्थिति उलट है। यहां पर रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन जोरों पर चल रहा है।
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नीलकंठ तट पर रेत माफिया के ट्रैक्टर-ट्रॉली बीच नदी से खनन कर रहे हैं।
- फोटो : अमर उजाला
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विस्तार
सीहोर क्षेत्र में नर्मदा से हो रहा रेत का खनन थमने का नाम नहीं ले रहा है। सरकार के लाख दावे इस मामले में खोखले साबित हो रहे हैं और बेखौफ तरीके से कश्तियों के माध्यम से रेत माफिया अपनी मर्जी के मुताबिक बीच नर्मदा नदी से रेत निकाल रहे हैं। सरकार के आदेश के मुताबिक नर्मदा नदी के अंदर से रेत निकाले जाने पर पूरी तरह प्रतिबंध है, लेकिन वर्तमान में नसरुललागंज क्षेत्र में स्थिति उलट है। यहां पर रेत का अवैध उत्खनन एवं परिवहन जोरों पर चल रहा है।
स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत माफियाओं के साथ ही असामाजिक तत्वों का बोलबाला नर्मदा तटों पर होने के कारण अब तट पर भी स्नान करने के लिए जगह नहीं बची है। इन स्थानों पर क्षेत्रीय रेत माफियाओं द्वारा पूरी तरह से कब्जा जमा लिया गया है। ताजा स्थिति क्षेत्र की आस्था के केंद्र नर्मदा तट नीलकंठ पर देखने को मिल रही है। नर्मदा नदी के अंदर ही ट्रैक्टर ट्रॉलियों का जमावड़ा लगा होने के कारण श्रद्धालु यहां पर स्नान करने के लिए पहुंच ही नहीं पाता है। जन सहयोग से स्नान घाट पर महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए लोहे के बने हुए चेंजिंग रूम भी रखे गए थे। लेकिन वे भी यहां से गायब हो चुके हैं। ऐसे में महिलाओं के सामने स्नान करने के बाद कपड़ों को बदलने की समस्या भी सामने आती है। कई महिलाओं का मत है कि स्नान घाट को पूरी तरह कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए। जिससे वह आसानी के साथ नर्मदा तट पर पहुंचकर स्नान कर सकें।
आखिर कैसे पहुंच जाते हैं स्नान घाट पर ट्रैक्टर-ट्रॉली
नीलकंठ में स्नान घाट पर ट्रैक्टर-ट्रॉली कैसे पहुंच जाते हैं यह प्रश्न सभी के सामने हैं। जबकि प्रशासन के द्वारा पूर्व का बना हुआ पुराना रास्ता बंद कराया जा चुका है। उसके बाद भी ट्रैक्टर-ट्रॉली अन्य रास्तों से पहुंच रहे हैं। प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं। जानकारी ऐसी भी है कि कुछ खेत मालिकों के द्वारा रास्ता देकर इन ट्रैक्टर ट्रालियों को निकाला जाता है और इसके एवज में रकम वसूली जाती है।
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जान जोखिम में डालकर नदी के अंदर से निकालते हैं ट्रैक्टर-ट्रॉली
क्षेत्रीय रेत माफिया बीच नदी से रेत निकालने के लिए अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी के अंदर ही लेकर जाते हैं। कश्तियों के माध्यम से ट्रॉलियों में रेत भरी जाती है और रेत से भरी ट्रॉली को निकालने के लिए वाहन चालक मशक्कत करते हुए अपनी जान हथेली में डालते हैं। इस दौरान स्थिति ऐसी होती है कि नदी के अंदर ही ट्रैक्टर आगे से 5 से 6 फीट ऊपर उठ जाता है। मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, पर संपर्क नहीं हो सका।
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स्थानीय लोगों का आरोप है कि रेत माफियाओं के साथ ही असामाजिक तत्वों का बोलबाला नर्मदा तटों पर होने के कारण अब तट पर भी स्नान करने के लिए जगह नहीं बची है। इन स्थानों पर क्षेत्रीय रेत माफियाओं द्वारा पूरी तरह से कब्जा जमा लिया गया है। ताजा स्थिति क्षेत्र की आस्था के केंद्र नर्मदा तट नीलकंठ पर देखने को मिल रही है। नर्मदा नदी के अंदर ही ट्रैक्टर ट्रॉलियों का जमावड़ा लगा होने के कारण श्रद्धालु यहां पर स्नान करने के लिए पहुंच ही नहीं पाता है। जन सहयोग से स्नान घाट पर महिलाओं के कपड़े बदलने के लिए लोहे के बने हुए चेंजिंग रूम भी रखे गए थे। लेकिन वे भी यहां से गायब हो चुके हैं। ऐसे में महिलाओं के सामने स्नान करने के बाद कपड़ों को बदलने की समस्या भी सामने आती है। कई महिलाओं का मत है कि स्नान घाट को पूरी तरह कब्जे से मुक्त कराया जाना चाहिए। जिससे वह आसानी के साथ नर्मदा तट पर पहुंचकर स्नान कर सकें।
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आखिर कैसे पहुंच जाते हैं स्नान घाट पर ट्रैक्टर-ट्रॉली
नीलकंठ में स्नान घाट पर ट्रैक्टर-ट्रॉली कैसे पहुंच जाते हैं यह प्रश्न सभी के सामने हैं। जबकि प्रशासन के द्वारा पूर्व का बना हुआ पुराना रास्ता बंद कराया जा चुका है। उसके बाद भी ट्रैक्टर-ट्रॉली अन्य रास्तों से पहुंच रहे हैं। प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान नहीं हैं। जानकारी ऐसी भी है कि कुछ खेत मालिकों के द्वारा रास्ता देकर इन ट्रैक्टर ट्रालियों को निकाला जाता है और इसके एवज में रकम वसूली जाती है।
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जान जोखिम में डालकर नदी के अंदर से निकालते हैं ट्रैक्टर-ट्रॉली
क्षेत्रीय रेत माफिया बीच नदी से रेत निकालने के लिए अपने ट्रैक्टर-ट्रॉली नदी के अंदर ही लेकर जाते हैं। कश्तियों के माध्यम से ट्रॉलियों में रेत भरी जाती है और रेत से भरी ट्रॉली को निकालने के लिए वाहन चालक मशक्कत करते हुए अपनी जान हथेली में डालते हैं। इस दौरान स्थिति ऐसी होती है कि नदी के अंदर ही ट्रैक्टर आगे से 5 से 6 फीट ऊपर उठ जाता है। मामले में प्रशासनिक अधिकारियों से संपर्क करने की कोशिश की गई, पर संपर्क नहीं हो सका।
