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Hindi News ›   Madhya Pradesh ›   Sagar's student will become a fishery scientist

Sagar News: एक्वाटिक लाइफ परीक्षा पास कर उत्कर्ष सेन ने नाम किया रौशन, अब बनेंगे फिशरी साइंटिस्ट; जानें

Sat, 15 Feb 2025 06:34 PM IST
सागर ब्यूरो न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, सागर Published by: सागर ब्यूरो Updated Sat, 15 Feb 2025 06:34 PM IST
सार

अब उत्कर्ष एक्वाटिक साइंस, हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स के क्षेत्र में अनुसंधान करेंगे, जिससे जल जीवन और पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अध्ययन कर देश में नई तकनीकों के विकास में योगदान देंगे। अपने शोध कार्य के लिए उत्कर्ष को प्रति वर्ष 4.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति भी मिलेगी।

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Sagar's student will become a fishery scientist
छात्र उत्कर्ष सेन - फोटो : अमर उजाला

विस्तार

सागर के होनहार छात्र उत्कर्ष सेन ने भारत की सबसे कठिन एक्वाटिक लाइफ परीक्षा को उत्तीर्ण कर इतिहास रच दिया है। इस परीक्षा को पास करने के बाद कोई भी विद्यार्थी बिना ग्रेजुएशन और पोस्ट ग्रेजुएशन के सीधे पीएचडी कर सकता है। अब उत्कर्ष साउथ एरिया के समुद्रों में जलीय जीवों के जीवन पर शोध कर फिश साइंटिस्ट बनने की दिशा में आगे बढ़ेंगे।

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भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) के तहत कृषि वैज्ञानिक भर्ती बोर्ड (ASRB) द्वारा आयोजित इस परीक्षा में मध्य प्रदेश से 1690 छात्र सम्मिलित हुए थे, लेकिन उत्कर्ष प्रदेश के एकमात्र अभ्यर्थी हैं, जिन्होंने इस परीक्षा को सफलतापूर्वक उत्तीर्ण किया है। यह परीक्षा हर तीन वर्ष में केवल एक बार आयोजित की जाती है।

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अब उत्कर्ष एक्वाटिक साइंस, हाइड्रोपोनिक्स और एक्वापोनिक्स के क्षेत्र में अनुसंधान करेंगे, जिससे जल जीवन और पर्यावरण से जुड़े महत्वपूर्ण विषयों पर अध्ययन कर देश में नई तकनीकों के विकास में योगदान देंगे। अपने शोध कार्य के लिए उत्कर्ष को प्रति वर्ष 4.5 लाख रुपये की छात्रवृत्ति भी मिलेगी।

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सफलता के पीछे कठिन परिश्रम और सही मार्गदर्शन

अपनी सफलता पर उत्कर्ष सेन कहते हैं कि 2023 में आर्मी पब्लिक स्कूल से 12वीं उत्तीर्ण करने के बाद उन्होंने इस परीक्षा की तैयारी शुरू कर दी थी। दो वर्षों की कड़ी मेहनत के बल पर यह उपलब्धि हासिल की गई है। उनका मानना है कि यदि सही मार्गदर्शन और कठिन परिश्रम किया जाए तो कोई भी लक्ष्य असंभव नहीं होता।

उत्कर्ष अपनी सफलता का श्रेय अपने माता-पिता, गुरुजनों और मित्रों को देते हैं। वे कहते हैं कि जब भी वे किसी कठिनाई का सामना करते, तब उनके कोच शुभम राठौर, मिस सोनल जयशेखर और हिमांशी बोहरे ने उन्हें लगातार प्रेरित किया और उनका हौसला बढ़ाया। उनके सहयोग के बिना यह सफलता प्राप्त करना अत्यंत कठिन होता।

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