‘खड़े हनुमान जी यहीं विराजित रहेंगे’: मंदिर विस्थापन पर पुजारी महेश बैरागी का तीखा बयान, निगम पर लगाए आरोप
सिंहस्थ 2028 के लिए मार्ग चौड़ीकरण के बीच उज्जैन के 170 साल पुराने खड़े हनुमान मंदिर के विस्थापन पर विवाद बढ़ गया है। पुजारी महेश बैरागी ने विरोध जताया, जबकि प्रशासन ने IIT विशेषज्ञों से प्रतिमा की जांच कराने की बात कही।
विस्तार
सिंहस्थ 2028 की तैयारियों के तहत कंठाल चौराहे से छत्रीचौक और सराफा बाजार मार्ग के चौड़ीकरण को लेकर विवाद लगातार गहराता जा रहा है। करीब 170 साल पुराने प्रसिद्ध श्री खड़े हनुमान मंदिर को विस्थापित करने की प्रशासनिक कवायद के बीच मंदिर के पुजारी पंडित महेश बैरागी ने बड़ा और तीखा बयान दिया है।
पुजारी पंडित महेश बैरागी ने स्पष्ट कहा कि भगवान श्री खड़े हनुमान जी के मुख को उत्तर या दक्षिण दिशा में करने का सवाल ही नहीं उठता। प्रभु यहीं विराजित रहेंगे। उन्होंने कहा कि जब तक प्रशासन हिंदूवादी संगठनों, साधु-संतों और उन्हें साथ लेकर मंदिर पर किए जाने वाले कार्य की जानकारी नहीं देता, तब तक श्री खड़े हनुमान जी का विस्थापन नहीं होगा।
नगर निगम के दावों पर सवाल, वीडियो जारी
पुजारी महेश बैरागी ने प्रशासन की कार्यप्रणाली पर गंभीर सवाल उठाते हुए मंदिर परिसर में हुई खुदाई और तोड़फोड़ से संबंधित एक वीडियो भी जारी किया है। बैरागी का कहना है कि प्रशासन भले ही यह कह रहा हो कि प्रतिमा को हटाने का कोई प्रयास नहीं किया गया, लेकिन उनके द्वारा जारी वीडियो में नगर निगम के बड़े इंजीनियर साफ दिखाई दे रहे हैं। वीडियो देखकर कोई भी समझ सकता है कि वहां क्या हुआ।
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पुजारी ने कहा कि प्रशासन को शायद लग रहा था कि खड़े हनुमान जी हलवे की तरह बैठे हैं और उन्हें आसानी से हटा दिया जाएगा। उन्होंने बताया कि 14 अगस्त को ही उन्होंने नगर निगम के जिम्मेदार अधिकारियों को पत्र लिखकर अनुरोध किया था कि अत्याधुनिक स्कैनिंग मशीनों के माध्यम से प्रतिमा की आंतरिक स्थिति की जांच कराने के बाद ही कोई कदम उठाया जाए। इसके बावजूद प्रशासन ने उनके अनुरोध को अनदेखा करते हुए मंदिर का हिस्सा तोड़ दिया और प्रतिमा को हटाने का प्रयास किया।
चार पीढ़ियों से मंदिर में सेवा, सिंधिया स्टेट कालीन दस्तावेज सुरक्षित
प्रसिद्ध श्री खड़े हनुमान मंदिर का इतिहास सिंधिया स्टेट के समय से जुड़ा हुआ है। पुजारी परिवार के पास आज भी स्टेट कालीन राजस्व रजिस्ट्री के ऐतिहासिक दस्तावेज सुरक्षित हैं। पंडित महेश बैरागी मंदिर में सेवा-पूजा करने वाली चौथी पीढ़ी के प्रतिनिधि हैं। वहीं, नगर निगम प्रशासन ने मंदिर के विस्थापन के एवज में प्यास की पानी की टंकी के पास 200 वर्ग फीट से अधिक जमीन देने का मौखिक प्रस्ताव दिया है। हालांकि, इस प्रस्ताव पर अभी लिखित सहमति का इंतजार है।
एसडीएम बोले- प्रतिमा हटाने का प्रयास नहीं हुआ, IIT विशेषज्ञ करेंगे जांच
मामले में प्रशासनिक पक्ष रखते हुए एसडीएम एल.एन. गर्ग ने कहा कि प्रतिमा को विस्थापित करने या हटाने के लिए किसी मशीन या मानवीय तरीके का इस्तेमाल नहीं किया गया है। चौड़ीकरण की जद में आ रहे मंदिर के केवल बाहरी हिस्से को हटाया गया है और प्रतिमा को कैनोपी में पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है।
एसडीएम ने कहा कि प्रशासन धार्मिक आस्था और विरासत के संरक्षण को लेकर संवेदनशील है। अब IIT (भारतीय प्रौद्योगिकी संस्थान) के विशेषज्ञों से प्रतिमा की संरचना और स्थिति की वैज्ञानिक एवं तकनीकी जांच कराई जाएगी। जांच रिपोर्ट के आधार पर ही आगे की कोई कार्रवाई की जाएगी।
