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MP News: रीवा राजघराने ने बांधवगढ़ किले को लेकर दायर की याचिका,हाईकोर्ट ने केंद्र और राज्य सरकार से मांगा जवाब
Thu, 10 Nov 2022 02:03 PM IST
अंकिता विश्वकर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, रीवा
Published by: अंकिता विश्वकर्मा
Updated Thu, 10 Nov 2022 02:03 PM IST
सार
रीवा राजघराने ने मध्यप्रदेश हाईकोर्ट में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में बने किले के अधिग्रहण और मुआवजा राशि के लिए याचिका दायर की है।
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मध्यप्रदेश हाईकोर्ट
- फोटो : सोशल मीडिया
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विस्तार
रीवा राजघराने ने हाईकोर्ट में बांधवगढ़ नेशनल पार्क में बने बांधवगढ़ किले को अधिग्रहित कर मुआवजा राशि देने के मामले में जवाब तलब किया है। पूर्व महाराजा मार्तंड सिंह के पुत्र पुष्पराज सिंह ने अपने अधिवक्ता अभिजीत अवस्थी की ओर से आवेदन दिया है कि स्वाधीनता के पूर्व 1954 में रीवा स्टेट का विलय भारत में हुआ। इस दौरान ट्रीटी ऑफ स्टेट के तहत रीवा राजघराने की पूरी संपत्ति का वीडियो बनाया गया। इस शेड्यूल में बांधवगढ़ का किला भी शामिल था। राजघराने के सदस्य 565 एकड़ में फैले इस किले मे पहले आते जाते थे। लेकिन बांधवगढ़ नेशनल पार्क स्थापित हो जाने के बाद आवागमन प्रतिबंधित कर दिया गया।
याचिकाकर्ता पुष्पराज सिंह के अधिवक्ता का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 363 के तहत राजघराने की संपत्तियों को विशेष दर्जा प्राप्त है। सरकार संपत्ति के उत्तराधिकारी को उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। साथ ही अधिवक्ता का कहना है कि वर्तमान समय में उक्त संपत्ति का उपयोग राज्य सरकार और वन विभाग कर रही है। ऐसे में इस संपत्ति का अधिग्रहण कर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। लेकिन इस ओर न तो वन विभाग का ध्यान जा रहा है और न ही सरकार का। हाईकोर्ट की एकल पीठ न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने तर्क सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव, केंद्र सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन विभाग के संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान वन संरक्षक शहडोल, बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर, कलेक्टर उमरिया को नोटिस जारी किया गया है।
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याचिकाकर्ता पुष्पराज सिंह के अधिवक्ता का कहना है कि संविधान के अनुच्छेद 363 के तहत राजघराने की संपत्तियों को विशेष दर्जा प्राप्त है। सरकार संपत्ति के उत्तराधिकारी को उसके अधिकार से वंचित नहीं कर सकती। साथ ही अधिवक्ता का कहना है कि वर्तमान समय में उक्त संपत्ति का उपयोग राज्य सरकार और वन विभाग कर रही है। ऐसे में इस संपत्ति का अधिग्रहण कर उचित मुआवजा दिया जाना चाहिए। लेकिन इस ओर न तो वन विभाग का ध्यान जा रहा है और न ही सरकार का। हाईकोर्ट की एकल पीठ न्यायमूर्ति संजय द्विवेदी ने तर्क सुनने के बाद केंद्रीय गृह मंत्रालय के सचिव, केंद्र सरकार के कैबिनेट सेक्रेटरी, केंद्रीय पर्यावरण एवं वन विभाग के संयुक्त सचिव, सामान्य प्रशासन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, वन विभाग के अतिरिक्त मुख्य सचिव, प्रधान वन संरक्षक शहडोल, बांधवगढ़ नेशनल पार्क के डायरेक्टर, कलेक्टर उमरिया को नोटिस जारी किया गया है।
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