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भाजपा के गढ़ भोपाल में हिंदू राष्ट्रवाद पर जनमत संग्रह, देशभर में अब यही सियासी बहस का केंद्र

Wed, 24 Apr 2019 04:17 AM IST
Avdhesh Kumar शरद गुप्ता, भोपाल
शरद गुप्ता, भोपाल Published by: Avdhesh Kumar Updated Wed, 24 Apr 2019 04:17 AM IST
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Referendum on Hindu nationalism BJP in Bhopal Bhopal
Sadhvi Pragya thakur
कम लंबाई, लड़कों की तरह कटे बाल, भगवा वस्त्र, तीखे तेवर। भाजपा प्रदेश कार्यालय में मीडिया से बात करती साध्वी प्रज्ञा ठाकुर के तेवर साध्वी उमा भारती की याद दिलाते हैं। उमा बीस वर्ष पहले भोपाल से लोकसभा चुनाव लड़ीं और जीती थीं। भाजपा से प्रज्ञा की उम्मीदवारी के बाद 1999 की ही तरह फिर भोपाल के चुनाव पर सबकी निगाहें हैं।
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30 साल से इस सीट पर भाजपा का कब्जा है। यही वजह है कि सीएम कमलनाथ ने इस सीट को कांग्रेस के लिए सबसे बड़ी चुनौती के तौर पर लिया। इस अभेद्य किले को फतह करने की उनकी चुनौती को पूर्व सीएम दिग्विजय सिंह ने स्वीकार किया। एक महीने से भोपाल में प्रचार कर रहे दिग्विजय ने जनमानस प्रभावित करने की काफी कोशिश की। इस प्रयास में लोग भूल ही गए थे कि 2003 के विस चुनाव में उमा ने दिग्विजय को ‘मिस्टर बंटाधार' के नारे से हराया था। मगर, प्रज्ञा के बाद दिग्गी की मुश्किलें बढ़ी नजर आ रही हैं।
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दिग्गी ने किया था दावा- हिंदू आतंकियों से करकरे को मिल रही धमकी 

ये दिग्विजय सिंह ही थे जिन्होंने मालेगांव बम धमाके, समझौता एक्सप्रेस बम धमाके जैसी घटनाओं को ‘हिंदू आतंकवाद’ या भगवा आतंकवाद की कार्यवाही करार दिया था। महाराष्ट्र एटीएस प्रमुख हेमंत करकरे की 26 नवंबर 2008 को पाकिस्तानी आतंकी अजमल कसाब द्वारा हत्या के बाद उन्होंने दावा किया था कि करकरे ने उन्हें बताया था कि उन्हें मालेगांव मामले की छानबीन के लिए हिंदू आतंकियों की ओर से धमकियां मिल रही थीं। 
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राष्ट्रवाद बनाम हिंदू आतंकवाद

यही वजह है कि भोपाल का चुनाव राष्ट्रवाद बनाम हिंदू आतंकवाद पर जनमत संग्रह बन गया है। इसका असर केवल भोपाल या मध्य प्रदेश पर ही नहीं बल्कि देश भर की उन दो तिहाई लोकसभा सीटों पर पड़ रहा है, जिनके लिए मतदान होना बाकी है। आज पूरे देश में बहस इसी विषय पर हो रही है, बाकी मुद्दे गौण हो गए हैं। 

साध्वी बताती हैं पुलिस के अत्याचार 

प्रज्ञा का दावा है कि उन पर लगे सभी आरोप झूठे हैं। केंद्र की कांग्रेस सरकार के दबाव में एनआईए ने हिंदू आतंकवाद की झूठी कहानी गढ़ी। यही वजह है कि सरकार बदलने के बाद एनआईए ने सभी आरोपियों को निर्दोष करार दिया। वे हर सभा में उन पर पुलिस कस्टडी में हुए अत्याचारों का ब्योरा देती हैं। आग्रह करती हैं कि दिग्विजय और सुशील कुमार शिंदे जैसे कांग्रेसियों के हाथों हुए अपमान का बदला जरूर लेना चाहिए। 

नाखुशी के बावजूद मोदी के नाम पर वोट 

भोपाल की जनता प्रज्ञा को लेकर बहुत खुश नहीं हैं, लेकिन मोदी को देखकर वोट करने की बात कह रही है। पुरानी विस के व्यापारी देवकृष्ण शिवहरे कहते हैं कि भाजपा को विवादित व्यक्ति की जगह मौजूदा सांसद आलोक संजर या मेयर आलोक शर्मा को ही लड़ाना था। तो क्या भाजपा को वोट नहीं देंगे? वे कहते हैं- ऐसा नहीं है।

मैं महिला उत्पीड़न की प्रत्यक्ष प्रमाणः प्रज्ञा

प्रज्ञा ने मंगलवार को नामांकन किया। उन्होंने कहा कि वे महिला उत्पीड़न की प्रत्यक्ष प्रमाण हैं। कांग्रेस पर निशाना साधते हुए कहा कि उन्हें अलग-अलग तरह से प्रताड़ित किया गया। 

काला झंडा दिखाने पर हंगामा: रोड शो के दौरान उस वक्त हंगामा हो गया, जब एनसीपी कार्यकर्ता ने उन्हें काला झंडा दिखाया। भाजपा कार्यकर्ताओं ने उसकी पिटाई कर दी।

आलोक संजर ने भी भरा पर्चाः प्रज्ञा के नामांकन के बाद भोपाल से मौजूदा सांसद आलोक संजर ने डमी प्रत्याशी के रूप में नामांकन भरा है। 

दिग्विजय बोले- शहीद अगर संघ को पसंद नहीं तो वो शैतान

कांग्रेस उम्मीदवार दिग्विजय सिंह ने संघ पर हमला बोला। मंगलवार को कहा कि जो संघ की मर्जी के खिलाफ बोले वो देशद्रोही है। भारत के शहीद भी अगर संघ को पसंद नहीं तो वो शैतान हैं।

सियासी गणित

इंदौर मध्य प्रदेश की व्यापारिक राजधानी है तो भोपाल प्रशासनिक। यहां अधिकतर लोग नौकरीपेशा हैं और शहरी क्षेत्रों में रहते हैं। महज 20% आबादी मुसलमानों की है, जबकि 45% ब्राह्मण, राजपूत, कायस्थ और वैश्य जैसी उच्च जातियां हैं। इसीलिए 1984 के बाद से कांग्रेस को यहां सफलता नहीं मिली है। 

सुर्खियों में रहने का हुनर

प्रज्ञा को मालूम है कि मीडिया की सुर्खियां कैसे बटोरी जाती हैं। उनकी उम्मीदवारी का ऐलान होते ही उन्होंने शहीद हेमंत करकरे की मृत्यु की वजह उनका दिया श्राप बताया। जब तक चुनाव आयोग का नोटिस आता, उन्होंने बाबरी मस्जिद गिराने में भागीदारी का दावा कर दिया।

दिग्गी दिखा रहे सावधानी

अब दिग्विजय सावधानी से कदम रख रहे हैं। चुनाव को भगवा आतंकवाद के मुद्दे के बजाय विकास के मुद्दों पर लाने की कोशिश में हैं। भगवा आतंकवाद पर इतना ही बोलते हैं कि जो कहना था, दस साल पहले कह दिया और अपने किसी बयान से आज भी पीछे नहीं हट रहे हैं। 
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