Ratlam: शिक्षक आनंद कुमार की राह पर रतलाम के ‘दोहरे सर’, बच्चों को मुफ्त में देते हैं कोचिंग; खूब कमा रहे नाम
Ratlam: सुपर 30 कोचिंग चलाने वाले बिहार के आनंद कुमार की तरह रतलाम के दोहरे सर भी गरीब और मेधावी छात्रों का बड़ा सहारा बनकर सामने आए हैं। फ्री कोचिंग, पुस्तकें और मार्गदर्शन के जरिए इन्होंने गोल्ड सिटी रतलाम से ऐसी युवा प्रतिभाओं को सफलता तक पहुंचाया, जिन्होंने आज पूरे देश में बड़ा नाम कमाया है।
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शहर के शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के रसायन विभाग में कार्यरत प्रो. मनोज दोहरे ने 26 जनवरी साल 2017 में छात्रों के लिए यह नि:शुल्क शुरू की। पहले साल 45 छात्रों ने उनकी क्लास में प्रवेश लिया, जिनमें से अलग अलग परीक्षाओं में कुल 31 छात्र शामिल है। दोहरे सर की मेहनत पहले साल से ही रंग लाने लगी और एक के बाद एक कई छात्रों को उनके सपने पूरे करने का मौका मिलने लगा। 2018 में इनके आठ में से सात छात्र राष्ट्रीय स्तर की परीक्षाओं में अव्वल आए। तब से लेकर अब तक 21 छात्रों ने सीएसआईआर नेट, MP-SET, गेट और अन्य परीक्षा में में उत्तीर्ण होने के साथ साथ ओएनजीसी जैसी भारत की नवरत्न कंपनी में नौकरी भी पाई।
दोहरे सर बताते हैं कि सात साल में 76 में से 21 बच्चों ने कड़ी मेहनत की बदौलत पूरे देश में ऊंचा मुकाम हासिल किया है। उन्होंने यह भी बताया कि रसायन विषय को लेकर वह न सिर्फ फ्री कोचिंग दे रहे हैं बल्कि जरूरत पड़ने पर 24 घंटे छात्रों के मार्गदर्शन भी कर रहे हैं। सीएसआईआर नेट परीक्षा उत्तीर्ण करने वाले दोहरे सर बताते हैं कि अभावों में जिंदगी जीने वाले अक्सर मेधावी छात्रों को खुला मंच नहीं मिल पाता। देश में बड़ी बड़ी कोचिंग कंपनियां लाखों रुपये फीस लेकर शिक्षा दे रही हैं जो इन छात्रों और उनके परिवारों की पहुंच से बहुत दूर है। ऐसे बच्चों को उड़ान भरने के लिए मजबूत पंखों की जरूरत होती है जिसके लिए वह एक जरिया बने। दरअसल बिहार के मशहूर आनंद कुमार ने सुपर 30 कोचिंग शुरू कर पूरी दुनिया में नाम कमाया। उन्होंने गणित विषय को लेकर मेधावी छात्रों को तैयार किया। वहीं रतलाम के दोहरे सर ने रसायन विषय में मेधावी छात्रों को उज्जवल भविष्य दिलाने में भूमिका निभाई है।
इन छात्रों ने पूरे रतलाम का नाम रोशन किया
दोहरे सर की कोचिंग को पहली सफलता अस्टिटेंट प्रोफेसर परीक्षा के रूप में मिली, जिसमें विजेंद्र सोलंकी का चयन हुआ एवं अन्य सभी विद्यार्थियों ने मार्गदर्शन लेकर MPPSC सहायक प्राध्यापक परीक्षा में दिव्या वर्मा, प्रियदर्शनी गहलोत, मधु सिंह शीतल जोशी और मनप्रीत ने सफलता अर्जित की। इनके बाद राहुल सोलंकी ने 2019 में सीएसआईआर नेट और गेट परीक्षा को पास की जिसके आधार पर उनका चयन भारत की नवरत्न कंपनी ओएनजीसी में ऑल इंडिया रैंक 8th के साथ 2019 में भारत के सबसे कम उम्र के युवा होने का गौरव हासिल किया।
इसी तरह साल 2020 में शैलेंद्र सिंह चौधरी ने अस्टिटेंट प्रोफेसर बनने के लिए सीएसआईआर यूजीसी नेट परीक्षा पास की। 2018 में यूजीसी की राज्य स्तरीय परीक्षा पास कर राहुल करड़े अब रसायन विषय के शिक्षक हैं। इसी परीक्षा में मीनाक्षी हरोड़ और लोकेंद्र पाटीदार भी शामिल हुए और उन्होंने दोहरे सर की क्लास में सीखे टिप्स के जरिए इस परीक्षा को बेहतर अंकों के साथ पास किया और अब एक शिक्षक के रूप में वह अपनी शिक्षा को आगे बढ़ा रहे हैं। दोहरे सर की फ्री कोचिंग की सफलता यहां तक सीमित नहीं है। साल 2021 में गेट परीक्षा में रतलाम की अदिति बैरागी ने सफलता हासिल की। साल 2022 में मध्य प्रदेश सरकार ने उनकी कोचिंग के छात्र किशोर कुमार को शासकीय उच्चतर माध्यमिक विद्यालय रानीसिंग,बाजना में नियुक्ति हुई ।
छात्र एक, सफलता अनेक
दोहरे सर बताते हैं कि साल 2017 में जब जरूरतमंद छात्रों के लिए फ्री कोचिंग को शुरू किया, उस दौरान कुछ खास योजना या टारगेट के बारे में सोचा नहीं। क्लास शुरू होने के साथ ही जैसे जैसे छात्रों की संख्या बढ़ती गई, ठीक वैसे ही उनकी प्रतिभा का आकलन होने लगा। इस फ्री कोचिंग में कई छात्र ऐसे भी रहे, जिन्होंने अपनी मेहनत से एक या दो नहीं बल्कि तीन और चार चार परीक्षाओं में उत्तीर्ण होकर रतलाम का नाम रोशन किया है।
उदाहरण के तौर पर उनके छात्र राहुल सोलंकी ने 2017-18 में जेआरएफ परीक्षा में ऑल इंडिया रैंक 47वीं हासिल की। इसके बाद 2018-19 में फिर से जेआरएफ परीक्षा में 94वीं रैंक के साथ पास की। इसी साल उन्होंने ओएनजीसी की परीक्षा में आठवीं रैंक हासिल की और कुछ ही दिन में जब गेट परीक्षा में शामिल हुए तो 11वीं रैंक हासिल की। लोकेंद्र पाटीदार ने 2018-19 में गेट और एमपी सेट के अलावा 2019-20 में सीएसआईआर नेट में 33वीं रैंक हासिल की। इनके अलावा शैलेंद्र सिंह ने 2019-20 में जेआरएफ और 2020-21 में गेट परीक्षा पास की। 2018-19 में विजेंद्र सोलंकी ने उनसे पढ़ाई करते हुए राज्य स्तरीय परीक्षा को उत्तीर्ण किया और फिर रतलाम के ही शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय के रसायन विभाग में नियुक्ति भी ली।
जिन्होंने किया नाम रोशन, उन्होंने की- अपने मन की बात
1. मैं रतलाम के शासकीय कला एवं विज्ञान महाविद्यालय से मास्टर डिग्री प्राप्त की है। मैं अभी ओएनजीसी में कार्यरत हूं। दोहरे सर और उनकी क्लास के बारे में घंटों बातचीत कर सकता हूं। पढ़ाई के दौरान मैं रसायन विषय में काफी कमजोर था।
दोहरे सर से परिचित था लेकिन जब फ्री कोचिंग के बारे में सुना तो मैं उसका हिस्सा बना। मेरा यही फैसला पूरी जिंदगी का सबसे बड़ा टर्निंग पॉइंट बना। मैंने एक या दो नहीं बल्कि चार चार परीक्षाओं को पास किया। यह सिर्फ दोहरे सर की देन है। मैं और मेरा पूरा परिवार उनका हमेशा आभारी रहेगा।
राहुल सोलंकी, ओएनजीसी
2. मैं रतलाम के प्रीतमनगर गांव से हूं। मैंने रतलाम कॉलेज से एमएससी डिग्री हासिल की है। मेरे करियर की शुरुआत बीएससी के बाद शुरू हुई। जब मैंने यहां प्रवेश लिया तो मुझे अपने सीनियर से प्रोफेसर दोहरे सर के बारे में पता चला। उसने मुझे सर के बारे में बहुत कुछ बताया। मैंने फैसला लिया और क्लास में जाना शुरू कर दिया लेकिन शुरुआती दिन मेरे लिए बड़े अजीब से थे।
मुझे कुछ खास समझ नहीं आता था। इस परेशानी को समझते हुए दोहरे सर ने हमें 11वीं और 12वीं के कोर्स से पढ़ाई शुरू कराई और फिर धीरे धीरे एमएससी तक लेकर पहुंचे। मेरे लिए दोहरे सर और कोचिंग का वह समय जिंदगी भर याद रहेगा। मैं चाहता हूं कि दोहरे सर इसी तरह मेरे जैसे और बच्चों को नई ऊंचाई तक लेकर जाएं। एक बात मैं भूल गया, सर काफी सख्त और अनुशासित भी हैं।
लोकेंद्र पाटीदार, सीएसआईआर-गेट-एमपी सेट परीक्षा उत्तीर्ण
