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Rajgarh: निर्दोष लोगों को दोषी साबित करने में लगी पुलिस, अधिकारी की फटकार के बाद घटनास्थल पहुंचे थाना प्रभारी

Wed, 22 Nov 2023 04:09 PM IST
अरविंद कुमार न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, राजगढ़ Published by: अरविंद कुमार Updated Wed, 22 Nov 2023 04:09 PM IST
सार

राजगढ़ जिले में निर्दोष लोगों को दोषी साबित करने में कोतवाली पुलिस लगी रही। ऐसे में भोपाल के वरिष्ठ पुलिस अधिकारी की फटकार के बाद स्वयं जांच करने थाना प्रभारी घटनास्थल पहुंचे।

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Rajgarh News Police busy in proving innocent people guilty
सांकेतिक तस्वीर - फोटो : सोशल मीडिया

विस्तार

लचीली कानून व्यवस्था कहें या लापरवाही, दोनों ही शब्दों में ये उन निर्दोष लोगों के लिए हानिकारक और घातक है, जिनका किसी वाद-विवाद से दूर-दूर तक नाता नहीं होता। ऐसे में वे पीड़ित लोग शारीरिक, मानसिक और आर्थिक रूप से कई परेशानियों का सामना करते हैं। जैसा कि राजगढ़ जिला मुख्यालय में निवास करने वाले इन तीन लोगों के साथ हो रहा है, जिनके निर्दोष होते हुए भी पहले तो उन पर प्रकरण दर्ज कर दिया गया, जिसकी शिकायत वे राजगढ़ एसपी वा IG, DIG से कर चुके थे और उन्हें उचित निराकरण के लिए आश्वस्त भी किया गया था। लेकिन दोबारा से इन पर पर अब गिरफ्तारी देने का दबाव बनाया जा रहा है, जिसकी शिकायत 20 नवंबर को पीड़ितों ने भोपाल में पुलिस के वरिष्ठ से की है। इस पर उन्होंने राजगढ़ कोतवाली के संबंधित जांच अधिकारी को फटकार लगाई है, जिसके बाद अब कोतवाली थाना प्रभारी स्वयं ही घटनास्थल पर पहुंचकर मामले की जांच कर रहे हैं।

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पीड़ितों ने बताया कि लगभग एक से डेढ़ महीने पहले देवलीजागीर गांव के सुरेंद्र सिंह और इंदर सिंह के बीच विवाद हुआ, जो मारपीट तक जा पहुंचा। इसमें इंदर सिंह को सिर, आंख और पेट मे चोटें आई थीं, जिसकी शिकायत लेकर वह कोतवाली थाने पहुंचा और अपने आरोपी पुत्र की शिकायत करने के बजाय उसने प्रेम सिंह पिता हरनाथ, बबलू पिता तंवरलाल और पिंटू पिता जगन्नाथ का नाम एफआईआर में लिखवा दिया। जबकि हम दो लोग राजगढ़ में ही निवास करते हैं और यहीं मेहनत मजदूरी करके अपने परिवार का पालन-पोषण करते हैं। एक अन्य पिंटू पिता जगन्नाथ कॉलेज का छात्र है और हमारे उक्त विवाद से दूर-दूर तक भी कोई नाता नहीं है।
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पुलिस ने अपराध दर्ज होने के कुछ दिनों पश्चात ही जब हमें गिरफ्तारी देने के लिए फोन किया तो हमारे पैरों तले जमीन खिसक गई। क्योंकि हमें गांव गए हुए ही कई महीने हो चुके हैं। पुलिस उस समय न तो हमें एफआईआर देने के लिए तैयार थी और न ही धारा की जानकारी देने के लिए तैयार थी। हमने निर्णय किया और एसपी साहब के पास और भोपाल IG व DIG साहब से मामले की लिखित शिकायत दर्ज कराई है, जिस पर उन्होंने हमें उचित निराकरण के लिए आश्वस्त किया था।
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लेकिन समय बीता और कोतवाली पुलिस के जांच अधिकारी जांच करने के बजाय हमे दोषी साबित करते हुए हम पर गिरफ्तारी देने के लिए दबाव बनाने लगे,और हमे थाने पर भी बुलाया गया,और खाली कागज़ पर हमारी उंगलियों के निशान वा दस्तखत भी कराए,लेकिन हमने न तो किसी से मारपीट की और न ही घटना के समय हम गांव में मौजूद थे,ऐसे में हम जबरन ही अपने ऊपर लगाए गए आरोप क्यों स्वीकारे,हमने 20 नवंबर को दूसरी मर्तबा फिर से भोपाल का रुख किया और पुलिस के वरिष्ठ अधिकारी से मुलाकात की और उन्होंने फोन पर ही सबंधित कोतवाली थाने के जांच अधिकारी को फटकार लगाई और पूरे मामले की निष्पक्ष जांच करने के लिए कहा है।


वहीं जब उक्त  मामले को लेकर अमर उजाला प्रतिनिधि ने राजगढ़ कोतवाली थाना प्रभारी वीर सिंह ठाकुर से बात की तो उन्होंने कहा कि,उक्त प्रकरण से संबंधित ही जांच पढ़ताल करने के लिए में देवली जागीर गांव में घटनास्थल पर ही आया हु,जांच के पश्चात जो भी तथ्य सामने आएंगे उसके आधार पर  वैधानिक कार्रवाई की जाएगी।

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