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Bharat Jodo Yatra: एमपी में 342 KM घूमेंगे राहुल गांधी, क्या इससे कांग्रेस 2023 में बना पाएगी सत्ता का रास्ता?
Fri, 26 Aug 2022 07:59 AM IST
आनंद पवार
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
Published by: आनंद पवार
Updated Fri, 26 Aug 2022 07:59 AM IST
सार
मालवा-निमाड़ में जिस पार्टी ने अधिक सीटें जीतीं सरकार उसने ही बनाई। मालवा-निमाड़ में 66 सीटें हैं। साल 2013 में बीजेपी ने 56 और कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थीं। जबकि साल 2018 में बीजेपी 29 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं, कांग्रेस ने 34 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। साल 2018 में कांग्रेस ने 15 साल का वनवास खत्म कर सत्ता में वापसी की थी।
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राहुल गांधी (फाइल फोटो)
- फोटो : पीटीआई
विस्तार
कांग्रेस के पूर्व अध्यक्ष राहुल गांधी की भारत जोड़ो यात्रा प्रदेश के मालवा-निमाड़ के सात जिलों की 25 विधानसभा सीटों से गुजरेगी। इंदौर जिले की अधिकतर विधानसभा सीटों से यात्रा निकलेगी। राहुल उज्जैन में महाकाल के दर्शन कर सभा को संबोधित करेंगे। कांग्रेस इस यात्रा को आगामी विधानसभा के पहले महत्वपूर्ण मान रही है। ऐसे में सवाल यह है कि क्या राहुल गांधी की प्रदेश में 342 किमी की यात्रा से कांग्रेस की साल 2023 विधानसभा चुनाव में किस्मत पलटेगी?
कांग्रेस 9 सीट से 34 पर पहुंची
मालवा-निमाड़ को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है। मालवा निमाड़ में 66 सीटें हैं। साल 2013 में बीजेपी ने 56 और कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थीं। जबकि साल 2018 में बीजेपी 29 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं, कांग्रेस ने 34 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। साल 2018 में कांग्रेस ने 15 साल का वनवास खत्म कर सत्ता में वापसी की थी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थित विधायकों के बीजेपी में शामिल होने पर सरकार चली गई। बता दें, मालवा निमाड़ में जिस पार्टी ने अधिक सीटें जीतीं सरकार उसने ही बनाई। साल 2003 में 47 सीटें और 2008 में 66 सीटों में 42 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। अब कांग्रेस की कोशिश 35 के अलावा ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना है, ताकि सत्ता में वापसी की जा सके।
मालवा में जीत यानी सत्ता की चाबी
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी कहते हैं, मालवा-निमाड़ में जिसने ज्यादा सीटें जीती उस पार्टी ने सरकार बनाई। अपवाद छोड़ दें तो अब तक यह ट्रेंड ही चला आ रहा है। साल 2018 में कांग्रेस ने ज्यादा सीट जीतकर सरकार बनाई थी। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थित कुछ विधायक इसी क्षेत्र से बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई। अपवाद की बात करें तो दिग्विजय सिंह के समय इंदौर की 1993 में इंदौर की सभी सीटों पर बीजेपी जीत गई थी, लेकिन मालवा निमाड़ की ग्रामीण सीटों पर कांग्रेस विजय हुई थी। और कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। उस समय छत्तीसगढ़ अलग नहीं हुआ था। बता दें मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें है।
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आदिवासी वोट बैंक पर भी नजर
तिवारी कहते हैं, इसके अलावा दोनों ही पार्टियों की आदिवासी वोट बैंक पर नजर है। वैसे तो कोई भी राजनीतिक दल किसी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन मालवा-निमाड़ के खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, झाबुआ, धार, बड़वानी जिले में आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटें हैं। दोनों ही पार्टियां आगामी चुनाव में इस आदिवासी वोट बैंक को साधने में जुटी हैं। कांग्रेस की मालवा-निमाड़ से निकल रही यात्रा को इससे भी जोड़ कर देखा जा रहा है।
भारत जोड़ो की जगह कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालें
कांग्रेस की यात्रा को लेकर बीजेपी प्रवक्ता उमेश शर्मा कहते हैं, कांग्रेस को भारत जोड़ो नहीं कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालना चाहिए। उनकी पार्टी के पदाधिकारी उनको छोड़कर जा रहे हैं। राहुल गांधी 16 दिन प्रदेश में रहकर बीजेपी को ही मजबूत करेंगे, वह बीजेपी के शुभंकर हैं।
16 दिन रहेंगे प्रदेश में
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 24 नवंबर को बुरहानपुर से यात्रा मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगी। इसके बाद खंडवा, खरगौन, बड़वानी, धार, इंदौर, उज्जैन और आगर मालवा होते हुए 10 दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश कर जाएगी। कांग्रेस सत्ता जाने के बाद से ही 2023 चुनाव की तैयारी कर रही है। पार्टी में पहले गुटबाजी हावी थी, लेकिन अभी पार्टी एकजुट दिखाई दे रही है। प्रदेश में यात्रा का प्रभारी जीतू पटवारी और पीसी शर्मा को बनाया गया है।
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कांग्रेस 9 सीट से 34 पर पहुंची
मालवा-निमाड़ को बीजेपी का गढ़ कहा जाता है। मालवा निमाड़ में 66 सीटें हैं। साल 2013 में बीजेपी ने 56 और कांग्रेस ने नौ सीटें जीती थीं। जबकि साल 2018 में बीजेपी 29 सीटों पर सिमट गई थी। वहीं, कांग्रेस ने 34 सीटें जीत कर सरकार बनाई थी। साल 2018 में कांग्रेस ने 15 साल का वनवास खत्म कर सत्ता में वापसी की थी, लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थित विधायकों के बीजेपी में शामिल होने पर सरकार चली गई। बता दें, मालवा निमाड़ में जिस पार्टी ने अधिक सीटें जीतीं सरकार उसने ही बनाई। साल 2003 में 47 सीटें और 2008 में 66 सीटों में 42 सीटों पर बीजेपी ने जीत दर्ज की थी। अब कांग्रेस की कोशिश 35 के अलावा ज्यादा से ज्यादा सीटें जीतना है, ताकि सत्ता में वापसी की जा सके।
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मालवा में जीत यानी सत्ता की चाबी
कांग्रेस की भारत जोड़ो यात्रा को लेकर वरिष्ठ पत्रकार मुकेश तिवारी कहते हैं, मालवा-निमाड़ में जिसने ज्यादा सीटें जीती उस पार्टी ने सरकार बनाई। अपवाद छोड़ दें तो अब तक यह ट्रेंड ही चला आ रहा है। साल 2018 में कांग्रेस ने ज्यादा सीट जीतकर सरकार बनाई थी। लेकिन ज्योतिरादित्य सिंधिया समर्थित कुछ विधायक इसी क्षेत्र से बीजेपी में शामिल हो गए थे, जिसके बाद कांग्रेस की सरकार गिर गई। अपवाद की बात करें तो दिग्विजय सिंह के समय इंदौर की 1993 में इंदौर की सभी सीटों पर बीजेपी जीत गई थी, लेकिन मालवा निमाड़ की ग्रामीण सीटों पर कांग्रेस विजय हुई थी। और कांग्रेस ने सरकार बनाई थी। उस समय छत्तीसगढ़ अलग नहीं हुआ था। बता दें मध्य प्रदेश में 230 विधानसभा सीटें है।
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आदिवासी वोट बैंक पर भी नजर
तिवारी कहते हैं, इसके अलावा दोनों ही पार्टियों की आदिवासी वोट बैंक पर नजर है। वैसे तो कोई भी राजनीतिक दल किसी वर्ग को नाराज नहीं करना चाहता, लेकिन मालवा-निमाड़ के खंडवा, बुरहानपुर, खरगोन, झाबुआ, धार, बड़वानी जिले में आदिवासी वर्ग की आरक्षित सीटें हैं। दोनों ही पार्टियां आगामी चुनाव में इस आदिवासी वोट बैंक को साधने में जुटी हैं। कांग्रेस की मालवा-निमाड़ से निकल रही यात्रा को इससे भी जोड़ कर देखा जा रहा है।
भारत जोड़ो की जगह कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालें
कांग्रेस की यात्रा को लेकर बीजेपी प्रवक्ता उमेश शर्मा कहते हैं, कांग्रेस को भारत जोड़ो नहीं कांग्रेस जोड़ो यात्रा निकालना चाहिए। उनकी पार्टी के पदाधिकारी उनको छोड़कर जा रहे हैं। राहुल गांधी 16 दिन प्रदेश में रहकर बीजेपी को ही मजबूत करेंगे, वह बीजेपी के शुभंकर हैं।
16 दिन रहेंगे प्रदेश में
प्रस्तावित कार्यक्रम के अनुसार 24 नवंबर को बुरहानपुर से यात्रा मध्य प्रदेश में प्रवेश करेगी। इसके बाद खंडवा, खरगौन, बड़वानी, धार, इंदौर, उज्जैन और आगर मालवा होते हुए 10 दिसंबर को राजस्थान में प्रवेश कर जाएगी। कांग्रेस सत्ता जाने के बाद से ही 2023 चुनाव की तैयारी कर रही है। पार्टी में पहले गुटबाजी हावी थी, लेकिन अभी पार्टी एकजुट दिखाई दे रही है। प्रदेश में यात्रा का प्रभारी जीतू पटवारी और पीसी शर्मा को बनाया गया है।
