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भाजपा के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष का तंज, पार्टी और पूर्व राष्ट्रीय संगठन महामंत्री रामलाल पर साधा निशाना

Mon, 15 Jul 2019 09:07 AM IST
Priyesh Mishra न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, भोपाल Published by: Priyesh Mishra Updated Mon, 15 Jul 2019 09:07 AM IST
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Prabhat Jha Tweets on Ramlal and BJP
प्रभात झा - फोटो : सोशल मीडिया
भारतीय जनता पार्टी के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष प्रभात झा ने पूर्व संगठन महामंत्री रामलाल के पद से इस्तीफा देते ही ट्वीट कर परोक्ष रूप से हमला बोला। उन्होंने तंज कसते हुए लिखा कि कुछ लोग इंसान होते हुए भी खुद को भगवान मानने लगते हैं। दायित्व का मतलब 'मैं ही हूं' का भाव नहीं होना चाहिए। हालांकि अपने ट्वीट्स में उन्होंने रामलाल या पार्टी का नाम नहीं लिखा है।
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प्रभात झा ने रविवार को एक के बाद एक कई ट्वीट किए। राजनीतिक विश्लेषक इन सभी ट्वीट्स को पार्टी और रामलाल के इस्तीफे से जोड़कर देख रहे हैं। दरअसल विधानसभा और लोकसभा चुनावों के दौरान रामलाल मध्यप्रदेश के प्रभारी थे जिसके कारण प्रभात झा को कुछ खास तवज्जो नहीं दी गई थी। 
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सूत्रों के अनुसार, उनको तो एक बार पार्टी मुख्यालय में बैठने के लिए कह दिया गया था। जिस कारण वह नाराज चल रहे थे। उस दौरान उनको केंद्रीय नेतृत्व का भी साथ नहीं मिला था।
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ट्वीट में उन्होंने पार्टी नेतृत्व पर निशाना साधते हुए लिखा, "जब व्यक्ति का नाम होता है, तभी बदनाम होने की संभावनाएं बढ़ जाती है। जिसे डाल पर जरूरत से ज्यादा फल आ जाते हैं तो वह डाल टूट जाती है।"संतुलन" शब्द को जीवन में सदैव समझते रहना चाहिए। कार्य में संतुलन ही जीवन की सफलता है।
 

पूर्व संगठन महामंत्री रामलाल पर निशाना

उन्होंने पूर्व संगठन महामंत्री रामलाल पर परोक्ष रूप से हमला करते हुए लिखा, 'अवसर को बांटो पर चाटो नहीं। कुछ लोग इंसान होते हुए भी अपने को भगवान मानने लगते हैं। अपने मन में कभी यह भाव नहीं आना चाहिए कि मैं ही समझदार हूं।आप भी समझदार हैं, पर आपके अलावा भी लोग समझदार हैं। आपको अवसर मिल गया और उन्हें अवसर नहीं मिला। अगर आपको अवसर मिला है तो सभी की योग्यता का लाभ लेना चाहिए।'
 
"कम बोलना" अच्छा है। कम बोलने से यह भी बात आती है कि इन्हें बोलना ही नहीं है और बोलना आता ही नहीं है। ज्यादा नहीं बोले पर यह तो सोचे कि नहीं बोलने के चक्कर में सच का गला तो नहीं घोटें। आप जो आज हैं, कल नहीं थे। साथ ही कल भी नहीं रहेंगे, अतः आपका व्यवहार ही आपका जीवन भर साथ देगा।
 


"नाटक" का पटाक्षेप अवश्य होता है। जीवन नाटक नहीं यथार्थ है। सभी को जीना है। जो नाटक करता है वह यह नहीं समझता है कि समय आने पर नाटक की पोल खुल जाएगी। तब क्या होगा? "आप" और "हम", "मैं" और "तू" में अंतर है। एक में विनम्रता है तो दूसरे में अपनत्व है। वहीं यह राग बिगड़ता  है तो मानवीय संबंध बिगड़ जाते हैं।
 
सामान्य तौर पर आप जब किसी निर्णायक पद पर आएं तो राजा हरिश्चंद्र के चरित्र को अवश्य अपने सामने रखें। "अपने काम पर विश्वास रखें"। वे लोग सदैव असफल होते हैं, जो खुद भी काम नहीं करते और किसी को करने नहीं देते।
 
अच्छा व्यक्ति "संगठक" वह है जो हर व्यक्ति को काम मे जुटा ले। दूसरों को हार्दिक कष्ट देने वालों को जब खुद हार्दिक कष्ट होता है, तभी उसे अपनी गलती समझ में आती है। किसी के सम्मान के साथ खिलवाड़ नहीं करना चाहिए। कल आपके साथ भी हो सकता है।
 
कल क्या होगा, वह कोई नहीं जानता। पर आज हम क्या करें इसकी समझ तो हमें रखनी होगी। हमारे आज में ही कल छुपा हुआ है। आप जो नहीं हैं, उसे बनने के लिए प्रयास तो करें पर नाटक नहीं। "दायित्व" का मतलब "मैं ही हूं" का भाव नहीं होना चाहिए। "जाही विधि राखे राम, ताहि विधि रहिए" के भाव को समझकर अपना कार्य करना चाहिए।
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