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निभाई इंसानियत: छतरपुर में मुस्लिम महिला ने दिया बुजुर्ग की अर्थी को कांधा, अन्य महिला उठा रही सभी रस्म-रिवाज का खर्च
Sat, 01 Jan 2022 07:31 PM IST
दिनेश शर्मा
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
न्यूज डेस्क, अमर उजाला, छतरपुर
Published by: दिनेश शर्मा
Updated Sat, 01 Jan 2022 07:31 PM IST
सार
छतरपुर के एक वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद मानवता की नई मिसाल देखने को मिली। बुजुर्ग की कोई संतान नहीं होने पर महिलाओं ने अर्थी को कांधा दिया। इसमें मुस्लिम महिला भी शामिल हुई।
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Chhatarpur: बुजुर्ग की अर्थी को कांधा देती महिलाएं।
- फोटो : अमर उजाला
विस्तार
छतरपुर के एक वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय बुजुर्ग की मौत के बाद मानवता की नई मिसाल देखने को मिली। बुजुर्ग की कोई संतान नहीं होने पर महिलाओं ने अर्थी को कांधा दिया। इसमें मुस्लिम महिला भी शामिल हुई।
जानकारी के अनुसार शहर के आशियाना वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय वृद्ध पूरनलाल चौरसिया पिछले 2-3 वर्षों से अपनी 65 वर्षीय पत्नी शकुंतला के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। शुक्रवार रात को पूरनलाल की मौत हो गई। परिवार में और कोई नहीं होने के कारण अर्थी को कांधा देने महिलाएं आगे आईं। आश्रम संचालिका अनवरी खातून और सामाजिक कार्यकर्ता सपना चौरसिया ने बुजुर्ग की अर्थी को कांधा दिया। अंतिम संस्कार भी इन्होंने ही किया।
निभाया इंसानियत का फर्ज
दूर की रिश्तेदार और सामाजिक कार्यकर्ता सपना चौरासिया ने अंतिम संस्कार, अस्थि विसर्जन के लिए इलाहाबाद जाने से लेकर तेरहवीं और श्राद्ध सहित अन्य सारे क्रियाकर्मों का बीड़ा और खर्च उठाने की बात कही है। आशियाना वृद्धआश्रम संचालिका अनवरी खातून ने कहा कि हम पहले इंसान हैं। बाद में हिन्दू और मुस्लिम, यहां हमने जाति-धर्म, हिन्दू-मुस्लिम और महिला-पुरुष की वर्जनाओं को तोड़ते हुए इंसानियत का फर्ज अदा किया है। जो मेरी नजर में इन सबसे बड़ा है।
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जानकारी के अनुसार शहर के आशियाना वृद्धाश्रम में 70 वर्षीय वृद्ध पूरनलाल चौरसिया पिछले 2-3 वर्षों से अपनी 65 वर्षीय पत्नी शकुंतला के साथ जीवन व्यतीत कर रहे थे। उनकी कोई संतान नहीं थी। शुक्रवार रात को पूरनलाल की मौत हो गई। परिवार में और कोई नहीं होने के कारण अर्थी को कांधा देने महिलाएं आगे आईं। आश्रम संचालिका अनवरी खातून और सामाजिक कार्यकर्ता सपना चौरसिया ने बुजुर्ग की अर्थी को कांधा दिया। अंतिम संस्कार भी इन्होंने ही किया।
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निभाया इंसानियत का फर्ज
दूर की रिश्तेदार और सामाजिक कार्यकर्ता सपना चौरासिया ने अंतिम संस्कार, अस्थि विसर्जन के लिए इलाहाबाद जाने से लेकर तेरहवीं और श्राद्ध सहित अन्य सारे क्रियाकर्मों का बीड़ा और खर्च उठाने की बात कही है। आशियाना वृद्धआश्रम संचालिका अनवरी खातून ने कहा कि हम पहले इंसान हैं। बाद में हिन्दू और मुस्लिम, यहां हमने जाति-धर्म, हिन्दू-मुस्लिम और महिला-पुरुष की वर्जनाओं को तोड़ते हुए इंसानियत का फर्ज अदा किया है। जो मेरी नजर में इन सबसे बड़ा है।
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